✕

होम / रियल एस्टेट / घर खरीदने की बजाय किराए को क्यों चुन रहे हैं युवा? EMI से ज्यादा निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे तरजीह

घर खरीदने की बजाय किराए को क्यों चुन रहे हैं युवा? EMI से ज्यादा निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे तरजीह

महंगी प्रॉपर्टी, ऊंची होम लोन EMI और बदलते करियर ट्रेंड के चलते मिलेनियल्स और जेन-जी का रुख बदला. NoBroker की रिपोर्ट में 46% किराएदारों ने लंबे समय तक किराए पर रहने को बताया बेहतर विकल्प

रितु राणा 3 months ago

भारत में अपना घर होना लंबे समय से आर्थिक स्थिरता और सफलता की पहचान माना जाता रहा है, लेकिन नई पीढ़ी का नजरिया तेजी से बदल रहा है. मिलेनियल्स और जेन-जी अब घर खरीदने को केवल भावनात्मक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा वित्तीय निर्णय मान रहे हैं. महंगी होती प्रॉपर्टी कीमतें, ऊंची होम लोन EMI और करियर में लचीलापन बनाए रखने की जरूरत ने कई युवाओं को घर खरीदने की बजाय किराए पर रहने के विकल्प की ओर मोड़ा है.

प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker की हाल में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए के मकान में रहना बेहतर विकल्प मानते हैं. इनमें 25-34 वर्ष आयु वर्ग के 53 फीसदी और 35-44 वर्ष के 48 फीसदी लोग शामिल हैं. उनका मानना है कि लंबे समय तक EMI में पैसा फंसाने के बजाय निवेश और वित्तीय स्वतंत्रता पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद है.

EMI के मुकाबले किराया पड़ रहा ज्यादा किफायती

युवाओं के इस बदलते रुझान की सबसे बड़ी वजह महानगरों में तेजी से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और महंगी होम लोन दरें हैं. कई बड़े शहरों में घर की मासिक EMI अब उसी प्रॉपर्टी के किराए से दोगुने से भी अधिक हो चुकी है.

पिछले पांच वर्षों में गुरुग्राम का EMI-टू-रेंट रेशियो 1.86 से बढ़कर 2.68 हो गया है. वहीं बेंगलुरु में यह 2.38, हैदराबाद में 2.47 और मुंबई में 2.19 तक पहुंच चुका है. यानी जिस घर का मासिक किराया 50 हजार रुपये है, उसे खरीदने पर EMI एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है.

घर खरीदने से पीछे नहीं हटे युवा, बदल रहा है फैसला लेने का तरीका

रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि युवा घर खरीदने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे इसे अधिक सोच-समझकर लेने वाला फैसला बना रहे हैं.

रिषभ पेरिवाल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, पायनियर इंफ्रास्ट्रक्चर कहते हैं, "युवा भारतीयों के बीच अपना घर खरीदने की आकांक्षा आज भी उतनी ही मजबूत है; बदला है तो केवल घर खरीदने का उनका दृष्टिकोण. आज के खरीदार पहले की तुलना में अधिक जागरूक और वित्तीय रूप से अनुशासित हैं. वे घर खरीदने का निर्णय लेने से पहले वहनीयता, दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धताओं और करियर से जुड़ी लचीलापन की जरूरत का सावधानीपूर्वक आकलन करते हैं."

उन्होंने कहा कि बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें, महंगी ब्याज दरें और नौकरी के लिए बार-बार शहर बदलने की प्रवृत्ति ने कई लोगों को घर खरीदने का फैसला टालने के लिए प्रेरित किया है, न कि उसे पूरी तरह छोड़ने के लिए. उनके अनुसार, जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, वित्तीय स्थिरता आएगी और खरीदारों को सही लोकेशन, बेहतर गुणवत्ता तथा दीर्घकालिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स मिलेंगे, यह वर्ग आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र की अगली विकास यात्रा का प्रमुख आधार बनेगा.

निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे प्राथमिकता

आज की युवा पीढ़ी डाउन पेमेंट और लंबी अवधि की EMI में बड़ी रकम लॉक करने के बजाय उस पैसे को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, ETF, REITs और अन्य निवेश विकल्पों में लगाने को प्राथमिकता दे रही है.

वोमेकी ग्रुप के फाउंडर एंड चेयरमैन गौरव के सिंह कहते हैं, "आज के युवाओं के लिए घर खरीदना अब सिर्फ भावनाओं का सौदा नहीं, बल्कि पूरी तरह से वित्तीय गणित का खेल बन चुका है. आसमान छूती कीमतें, ऊंची ब्याज दरें और सालों-साल चलने वाली EMI उन्हें हर कदम फूंक-फूंक कर रखने पर मजबूर कर रही हैं."

उन्होंने कहा कि करियर में तरक्की के लिए बार-बार शहर बदलने की जरूरत ने किराए के घर को एक अधिक व्यावहारिक और आसान विकल्प बना दिया है. आज की पीढ़ी जल्दबाजी में कर्ज के जाल में फंसने के बजाय अपनी सेविंग्स और वित्तीय आजादी को ज्यादा महत्व दे रही है. हालांकि, अपने आशियाने का सपना खत्म नहीं हुआ है. जैसे ही आमदनी बढ़ेगी और बजट के अनुकूल सही प्रोजेक्ट मिलेंगे, यह वर्ग पूरी तैयारी के साथ घर खरीदने के लिए बाजार में वापस आएगा.

"युवा घर खरीदने के खिलाफ नहीं, सही समय का इंतजार कर रहे हैं"

गौरव भगत के अनुसार, "आज की युवा पीढ़ी घर खरीदने से पीछे नहीं हट रही, बल्कि घर खरीदने के समय और तरीके को लेकर पहले से कहीं अधिक रणनीतिक हो गई है. पहले घर खरीदना सामाजिक उपलब्धि माना जाता था, आज यह एक वित्तीय निर्णय है. यही सबसे बड़ा बदलाव है."

उन्होंने कहा कि 25 से 35 वर्ष की उम्र का युवा अब केवल यह नहीं पूछता कि "मैं घर कब खरीदूं?", बल्कि यह सोचता है कि "क्या अभी घर खरीदना मेरी नेटवर्थ बढ़ाएगा या मेरी वित्तीय स्वतंत्रता को सीमित कर देगा?"

गौरव भगत के मुताबिक, महानगरों में प्रॉपर्टी कीमतों में तेज वृद्धि और करीब 8 फीसदी के आसपास बनी होम लोन ब्याज दरों के कारण 25-30 साल की EMI व्यक्ति की मासिक आय का बड़ा हिस्सा एक ही एसेट में लॉक कर देती है. वहीं, किराए पर रहकर बची हुई राशि को इक्विटी, म्यूचुअल फंड, व्यवसाय या स्किल डेवलपमेंट में निवेश करने से लंबे समय में ज्यादा लचीलापन और बेहतर रिटर्न की संभावना बनती है.

उन्होंने कहा, "एक निवेशक के तौर पर मैं हमेशा एक बात कहता हूं, घर एक भावनात्मक संपत्ति (Emotional Asset) हो सकता है, लेकिन हर घर शुरुआत में एक अच्छा निवेश (Financial Investment) नहीं होता. यदि किसी व्यक्ति की डाउन पेमेंट के बाद भी उसके पास 12-18 महीनों का इमरजेंसी फंड, पर्याप्त निवेश और नियमित कैश फ्लो नहीं बचता, तो केवल घर खरीदने के लिए खुद को वित्तीय दबाव में डालना समझदारी नहीं है."

करियर में बदलाव और हाइब्रिड वर्क कल्चर भी बड़ा कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती नौकरी संस्कृति भी युवाओं के फैसले को प्रभावित कर रही है. हाइब्रिड वर्क मॉडल, स्टार्टअप कल्चर और बेहतर अवसरों के लिए शहर बदलने की प्रवृत्ति ने किराए के मकान को ज्यादा सुविधाजनक बना दिया है.

बिजनेस कंसल्टेंट व निवेशक गौरव भगत कहते हैं, "आज का प्रोफेशनल अपने करियर के शुरुआती 10-12 वर्षों में कई बार कंपनी, भूमिका या शहर बदलने के लिए तैयार रहता है. ऐसे में 20-30 साल के होम लोन की बजाय किराए पर रहना उन्हें अधिक लचीलापन देता है."

उन्होंने कहा कि GCCs, स्टार्टअप्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के विस्तार से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, गुरुग्राम और चेन्नई जैसे शहरों में जॉब मोबिलिटी बढ़ी है. ऐसे में युवा अपनी पूंजी को स्किल डेवलपमेंट, इक्विटी, म्यूचुअल फंड या व्यवसाय जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्पों में लगाना चाहते हैं.

रेंटल मार्केट में भी दिख रहा बदलाव

बदलते ट्रेंड का असर रेंटल मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है. NoBroker के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में किराए में सालाना 11 फीसदी की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है. इसके बाद चेन्नई में 8 फीसदी, बेंगलुरु में 7 फीसदी और हैदराबाद व दिल्ली-NCR में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

युवा अब केवल कम किराए वाले घर नहीं, बल्कि बेहतर लोकेशन, गेटेड सोसाइटी, फर्निश्ड अपार्टमेंट और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं. बेंगलुरु में 3-BHK फ्लैट्स की मांग उनकी उपलब्धता से अधिक है, जबकि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 40 हजार रुपये से अधिक मासिक किराए वाले घरों की मांग भी मजबूत बनी हुई है.

"Rent First, Buy Later" का ट्रेंड होगा मजबूत

गौरव भगत के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में "Rent First, Buy Later" की सोच और मजबूत होगी. उन्होंने कहा, "युवा घर के खिलाफ नहीं हैं; वे केवल चाहते हैं कि उनका पहला घर उनकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती नहीं, बल्कि सबसे समझदारी भरा निवेश साबित हो."

विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी के लिए घर खरीदना अब केवल सामाजिक जरूरत नहीं, बल्कि वित्तीय योजना का हिस्सा बन गया है. मजबूत आय, बेहतर वित्तीय तैयारी और सही समय आने पर यही युवा वर्ग रियल एस्टेट बाजार की अगली बड़ी मांग को आगे बढ़ाएगा.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

फेस्टिव सीजन में NCR के लग्जरी घरों की बढ़ी मांग, गुरुग्राम बना प्रीमियम हाउसिंग का हब

PropEquity के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में गुरुग्राम में आवासीय प्रॉपर्टी की लॉन्च वैल्यू 1.38 लाख करोड़ रुपये रही.

6 days ago

क्रिसुमी कॉर्पोरेशन गुरुग्राम में 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करेगी, द फॉरेस्ट रिजर्व के नए चरणों पर काम शुरू

द फॉरेस्ट रिजर्व को अल्ट्रा-लक्जरी आवासीय परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसमें 2, 3 और 4 एलडीके (लिविंग, डाइनिंग और किचन) वाले आवास शामिल होंगे. परियोजना का डिजाइन जापान की आर्किटेक्चर फर्म निकेन सेक्केई ने तैयार किया है.

16-October-2026

RBI MPC से पहले रियल्टी की उम्मीदें, 5.25% पर रेपो रेट रहने से होमबायर्स का भरोसा बढ़ने की आस

त्योहारी सीजन में घर खरीदारी के बीच रियल एस्टेट डेवलपर्स की नजर RBI के फैसले पर, स्थिर दरों से EMI, अफोर्डेबिलिटी और हाउसिंग डिमांड को मिल सकता है सहारा

06-October-2026

आवासीय बाजार में लौटी रफ्तार, Q3 में बिक्री 3% बढ़कर 1 लाख यूनिट के पार; त्योहारी सीजन से और तेजी की उम्मीद

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, रोजगार के अवसर और बदलती खरीदार प्राथमिकताओं के बीच आगामी त्योहारी सीजन मांग को और गति दे सकता है.

29-September-2026

3BHK और प्रीमियम घरों की बढ़ी मांग, क्या बदल रही है होमबायर्स की पसंद? डेवलपर्स ने बताया नया ट्रेंड

एनारॉक के एक सर्वे के अनुसार, सिर्फ घर का आकार ही नहीं, खरीदारों का बजट भी ऊपर जा रहा है. सर्वे में 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का प्राइस बैंड सबसे लोकप्रिय रहा. वहीं 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की ओर भी खरीदारों का झुकाव बढ़ा है.

24-September-2026


बड़ी खबरें

गिफ्ट निफ्टी 170 अंक उछला, बाजार में तेजी के संकेत; रिलायंस-जियो समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर

शुक्रवार को सेंसेक्स 308.49 अंक यानी 0.42 फीसदी चढ़कर 74,459.53 पर बंद हुआ था. वहीं, निफ्टी 116.35 अंक यानी 0.51 फीसदी की बढ़त के साथ 23,053.10 के स्तर पर पहुंच गया था.

2 hours ago

भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, अक्टूबर में हर दिन खरीदे 56 लाख बैरल

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने बढ़ाई खरीदारी, रूस से करीब 20 लाख और पश्चिम एशिया से 23 लाख बैरल प्रतिदिन हुआ आयात

2 hours ago

महादेव बेटिंग ऐप केस में बड़ी कार्रवाई, किंगपिन सौरभ चंद्राकर ओमान से भारत लाया गया; आज रायपुर कोर्ट में पेशी

अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को CBI की टीम प्रत्यर्पण कर भारत लाई है. उसके खिलाफ CBI के दो मामलों में चार्जशीट दाखिल है, जबकि ED भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है.

2 hours ago

दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

1 day ago

सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह

सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा

1 day ago