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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी भारत की ब्रांड इमेज
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत को संभावनाओं वाले देश से तकनीक, प्रतिभा, विनिर्माण और उद्यमिता के दम पर उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी बदलती तस्वीर दुनिया के सामने रखने का अवसर देता है.
डॉ. अनुराग बत्रा 2 hours ago
वर्षों से भारत को संभावनाओं वाले देश के रूप में देखा जाता रहा है. लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है. आज भारत के पास वैश्विक विमर्श को प्रभावित करने का पैमाना, प्रतिभा, तकनीक और महत्वाकांक्षा है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत को इस बदलाव और अपनी बढ़ती वैश्विक भूमिका को दुनिया के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर देती है.
संभावनाओं से वैश्विक शक्ति तक
एक समय था जब भारत की वैश्विक छवि काफी हद तक उसकी आबादी, लोकतांत्रिक साख और अंग्रेजी बोलने वाली प्रतिभाओं के समूह के इर्द-गिर्द बनी थी. ये अब भी महत्वपूर्ण ताकतें हैं, लेकिन आज का भारत इससे कहीं व्यापक तस्वीर पेश करता है. यह एक ऐसा देश है जो बड़े पैमाने पर तकनीक विकसित कर रहा है, वैश्विक कारोबार खड़ा कर रहा है, कुशल पेशेवर तैयार कर रहा है और पूंजी तथा विनिर्माण के लिए तेजी से महत्वपूर्ण गंतव्य बन रहा है.
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस नए भारत को एक मंच देता है. जब दुनिया की कुछ सबसे महत्वपूर्ण उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता भारत पहुंचते हैं, तो देश केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम की मेजबानी नहीं कर रहा होता. वह खुद को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा होता है.
और यह महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय छवि, बिल्कुल कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा की तरह, केवल इस बात से नहीं बनती कि कोई देश अपने बारे में क्या कहता है, बल्कि इस बात से बनती है कि दुनिया को वास्तव में क्या देखने को मिलता है.
तकनीक भारत की नई पहचान
शायद कहीं भी बदलाव तकनीक के क्षेत्र से अधिक स्पष्ट नहीं है. भारत की तकनीकी कहानी सॉफ्टवेयर सेवाओं और आईटी आउटसोर्सिंग से शुरू हुई थी. अब यह डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष तकनीक, डीप टेक और तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम तक काफी आगे बढ़ चुकी है.
भारत के डिजिटल बदलाव का पैमाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. देश ने यह दिखाया है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल छोटी और संपन्न आबादी के लिए ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के बीच भी किया जा सकता है.
बड़े पैमाने के लिए तकनीक विकसित करने की यह क्षमता भारत की सबसे शक्तिशाली वैश्विक संपत्तियों में से एक बन सकती है. दुनिया ऐसे समाधानों की तलाश में है जो किफायती, अनुकूलन योग्य और बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों. भारत पहले ही घरेलू स्तर पर इस मॉडल के साथ प्रयोग कर रहा है.
मानवीय प्रतिभा अब भी सबसे बड़ी ताकत
हालांकि, तकनीक कहानी का केवल एक हिस्सा है. भारत का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ अब भी उसके लोग हो सकते हैं. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से लेकर डॉक्टरों, उद्यमियों, डिजाइनरों, वित्तीय पेशेवरों और कॉर्पोरेट लीडर्स तक, भारतीय प्रतिभा तेजी से वैश्विक कार्यबल का हिस्सा बन गई है. भारतीय मूल के पेशेवर दुनियाभर में तकनीक, कारोबार और शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावशाली पदों पर हैं. लेकिन एक महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है. भारत अब केवल प्रतिभाओं को विदेश नहीं भेज रहा है. वह तेजी से देश के भीतर ही इन प्रतिभाओं के लिए अवसर पैदा कर रहा है.
यह संयोजन तकनीक के समर्थन वाली मानवीय प्रतिभा और एक विशाल घरेलू बाजार, एक मजबूत आर्थिक लाभ बन सकता है.
उभर रहा है विनिर्माण वाला भारत
दशकों तक भारत की आर्थिक कहानी में सेवाओं का असमान रूप से अधिक योगदान रहा. अब यह बदल रहा है. चाहे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा या अन्य उभरते क्षेत्र हों, विनिर्माण देश की वैश्विक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है. आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की कोशिश कर रही वैश्विक कंपनियां भारत को अपने विकल्पों में तेजी से शामिल कर रही हैं.
ब्रांड इंडिया के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि विनिर्माण एक अलग धारणा बनाता है. यह दुनिया को बताता है कि भारत केवल ऐसा बाजार नहीं है जहां उत्पाद बेचे या सेवाएं प्रदान की जाती हैं. यह वह जगह भी हो सकती है जहां उत्पादों को डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित किया जाता है.
उद्यमिता की ऊर्जा
एक और ताकत जिस पर ध्यान देने की जरूरत है, वह है भारत की उद्यमशील संस्कृति. स्टार्टअप इकोसिस्टम ने ऐसी पीढ़ी तैयार की है जो पहले दिन से ही वैश्विक स्तर पर सोचने में सहज है. युवा उद्यमी फिनटेक, ई-कॉमर्स, SaaS, हेल्थकेयर, शिक्षा, मोबिलिटी और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में कंपनियां बना रहे हैं.
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उद्यमिता अब कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहर और उपभोक्ताओं की नई पीढ़ी भी भारत के डिजिटल और आर्थिक विस्तार का हिस्सा बन रही है. यह उद्यमशील ऊर्जा राष्ट्रीय ब्रांड में एक महत्वपूर्ण बात जोड़ती है: ऐसे देश की धारणा जो प्रयोग करने के लिए तैयार है.
बुनियादी ढांचा बदल रहा है अनुभव
ब्रांड इंडिया तेजी से इस बात से भी आकार ले रहा है कि आगंतुक वास्तव में क्या अनुभव करते हैं. नए हवाई अड्डे, राजमार्ग, मेट्रो सिस्टम, डिजिटल सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और बेहतर कनेक्टिविटी देश के भौतिक अनुभव को बदल रहे हैं. बदलाव असमान है और अभी भी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन दिशा स्पष्ट है.
शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले किसी अंतरराष्ट्रीय आगंतुक के लिए ये भौतिक अनुभव कभी-कभी सरकारी प्रस्तुति से कहीं अधिक प्रभावशाली तरीके से संदेश दे सकते हैं.
संस्कृति भारत को भावनात्मक बढ़त देती है
एक और आयाम है जिसे आर्थिक आंकड़े नहीं दर्शा सकते.
भारत की सांस्कृतिक पहुंच ऐसी है, जिसकी बराबरी बहुत कम देश कर सकते हैं. इसका खान-पान, सिनेमा, संगीत, योग, त्योहार, फैशन, आध्यात्मिकता और विविध परंपराएं देश की सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंच चुकी हैं. यह ब्रांड इंडिया को ऐसी चीज देता है जिसे बनाने के लिए कई आर्थिक शक्तियां संघर्ष करती हैं, एक भावनात्मक जुड़ाव.
अवसर यह है कि इस सांस्कृतिक ताकत को भारत की आर्थिक और तकनीकी कहानी के साथ जोड़ा जाए. आधुनिक भारत को अपनी विरासत और अपनी महत्वाकांक्षा के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. दोनों साथ-साथ चल सकते हैं.
दुनिया की नजर भारत पर
आखिरकार, यही वजह है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण है. भारत को एक वैश्विक मंच पर कूटनीति, कारोबार, तकनीक, संस्कृति और मानवीय प्रतिभा को एक साथ लाने का अवसर मिलता है. नेता बैठकों के लिए आ सकते हैं, लेकिन दुनिया उस देश को भी देख रही होगी जहां ये बैठकें हो रही हैं.
बड़ा अवसर वैश्विक नैरेटिव को “भारत में संभावनाएं हैं” से बदलकर “भारत एक महत्वपूर्ण शक्ति है” करने का है.
यह बदलाव किसी एक शिखर सम्मेलन की वजह से नहीं होगा. यह निरंतर आर्थिक विकास, बेहतर बुनियादी ढांचे, नवाचार, संस्थागत मजबूती और भारत की विशाल मानवीय पूंजी को वैश्विक मूल्य में बदलने की क्षमता के जरिए होगा, लेकिन हर देश को ऐसे पलों की जरूरत होती है जब दुनिया ठहरकर उसे एक अलग नजरिए से देखे.
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए ऐसा ही एक पल हो सकता है. और अगर ब्रांड इंडिया इस अवसर का सही इस्तेमाल कर पाता है, तो इसका लाभ शिखर सम्मेलन से कहीं आगे तक पहुंच सकता है.
डॉ. अनुराग बत्रा, BW रिपोर्टर्स
डॉ. अनुराग बत्रा BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ हैं. वह exchange4media ग्रुप के संस्थापक भी हैं. पहली पीढ़ी के उद्यमी और मीडिया लीडर होने के साथ-साथ वह एंजल निवेशक, लेखक, टेलीविजन होस्ट और उद्यमियों तथा मीडिया पेशेवरों के मेंटोर भी हैं. वह कई कॉर्पोरेट और संस्थागत बोर्डों में कार्यरत हैं और प्रबंधन शिक्षा से उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है. MDI Gurgaon के पूर्व छात्र और इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में कार्य कर चुके हैं और MDI Alumni Association के अध्यक्ष भी रहे हैं. वह International Academy of Television Arts & Sciences के सदस्य भी हैं. डॉ. बत्रा का मानना है कि जब जुनून किसी का पेशा बन जाता है, तो काम उद्देश्य की गहरी भावना हासिल कर लेता है.
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