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जोमैटो ने कैश ऑन डिलीवरी पर लगाया नया शुल्क, चुनिंदा ऑर्डर पर 20 रुपये तक देना होगा अतिरिक्त चार्ज

ऑनलाइन भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं लगेगा यह शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क और पैकेजिंग चार्ज के अलावा देनी होगी नई फीस

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो (Zomato) ने कैश ऑन डिलीवरी करने वाले ग्राहकों के लिए नया शुल्क लागू किया है. कंपनी चुनिंदा ऑर्डर पर ‘डिलीवरी पर भुगतान शुल्क’ के नाम से अतिरिक्त रकम वसूल रही है. अलग-अलग मामलों में यह शुल्क 5 रुपये से लेकर 20 रुपये तक देखा गया है. यह शुल्क मंच शुल्क, रेस्तरां पैकेजिंग शुल्क और लागू वस्तु एवं सेवा कर के अलावा लिया जा रहा है.

बिल में अलग से दिखाई दे रहा है नया शुल्क

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन ग्राहकों ने कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुना, उनके बिल में ‘डिलीवरी पर भुगतान शुल्क’ अलग से दिखाई दे रहा है. कुछ मामलों में यह शुल्क 5 रुपये है, जबकि कुछ ग्राहकों ने 7 रुपये और यहां तक कि 20 रुपये तक शुल्क लगाए जाने की जानकारी दी है. हालांकि, ऑनलाइन भुगतान करने वाले ग्राहकों पर यह कैश ऑन डिलीवरी शुल्क लागू नहीं हो रहा है.

मंच शुल्क के अलावा बढ़ा एक और चार्ज

जोमैटो का नया कैश ऑन डिलीवरी शुल्क मौजूदा मंच शुल्क और अन्य शुल्क के अतिरिक्त है. ग्राहकों को ऑर्डर के दौरान खाने की कीमत के अलावा वितरण, मंच सेवा, पैकेजिंग और कर जैसे अलग-अलग शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है. खाद्य वितरण कंपनियां अब अलग-अलग लेनदेन पर शुल्क बढ़ाकर अपनी कमाई बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में जोमैटो का नया कैश ऑन डिलीवरी शुल्क भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

बढ़ रही है खाद्य वितरण बाजार में प्रतिस्पर्धा

भारत के खाद्य वितरण बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है. रैपिडो की ओनली अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है, जबकि फ्लिपकार्ट अपनी ‘ईट इन’ खाद्य वितरण सेवा का परीक्षण कर रहा है. खाद्य वितरण कंपनी स्विश ने भी हाल में नई फंडिंग जुटाई है. फिलहाल जोमैटो और स्विगी इस बाजार की प्रमुख कंपनियां हैं. स्विगी ने अभी तक कैश ऑन डिलीवरी पर ऐसा कोई समान शुल्क लागू नहीं किया है. कंपनी भविष्य में इस तरह का शुल्क लागू करेगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है.

छोटा शुल्क, लेकिन बड़ी कमाई की संभावना

ऐसे शुल्क का वित्तीय असर प्रति ग्राहक वसूली जाने वाली रकम से ज्यादा ऑर्डर की बड़ी संख्या पर निर्भर करता है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जोमैटो रोजाना करीब 23 से 25 लाख खाद्य वितरण ऑर्डर पूरे करता है. अगर हर ऑर्डर पर 5 रुपये का शुल्क लगाया जाए, तो सैद्धांतिक तौर पर कंपनी रोजाना करीब 1.15 से 1.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटा सकती है. सालाना आधार पर यह रकम करीब 420 से 456 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह केवल सैद्धांतिक अधिकतम अनुमान है, क्योंकि जोमैटो के सभी ऑर्डर कैश ऑन डिलीवरी के जरिए नहीं किए जाते. कैश ऑन डिलीवरी वाले ऑर्डर कंपनी के कुल ऑर्डर का केवल एक हिस्सा हैं. फिर भी, यह आंकड़ा बताता है कि लाखों लेनदेन पर छोटी रकम का शुल्क भी कंपनियों के लिए बड़ी आय का जरिया बन सकता है.

पहले भी बढ़ा चुकी है मंच शुल्क

कैश ऑन डिलीवरी शुल्क लागू करने से पहले भी खाद्य वितरण कंपनियां मंच शुल्क के साथ प्रयोग करती रही हैं. स्विगी ने शुरुआत में 2 रुपये के मंच शुल्क का परीक्षण किया था, जिसके बाद जोमैटो ने भी मंच शुल्क लागू किया.

जोमैटो ने इस साल की शुरुआत में अपना मंच शुल्क 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया था. इस पर वस्तु एवं सेवा कर अलग से लगाया जाता है. कंपनी के बड़े ऑर्डर स्तर को देखते हुए शुल्क में मामूली बढ़ोतरी भी सालाना आय में बड़ा इजाफा कर सकती है.

ग्राहकों के लिए बढ़ रहा है अंतिम बिल

खाद्य वितरण मंचों के लिए इस तरह के शुल्क बिना खाने या वितरण की सूचीबद्ध कीमत बढ़ाए कमाई बढ़ाने का एक तरीका हैं. प्रति ऑर्डर कुछ रुपये की अतिरिक्त फीस लाखों लेनदेन पर लागू होने के बाद बड़ी रकम में बदल सकती है.

जोमैटो का नया कैश ऑन डिलीवरी शुल्क इसी रणनीति को भुगतान के तरीके तक बढ़ाता है. यानी जो ग्राहक कैश ऑन डिलीवरी करना पसंद करते हैं, उन्हें मौजूदा शुल्क के अलावा इसके लिए भी अतिरिक्त रकम चुकानी होगी.

ऐसे में खाद्य वितरण का अंतिम बिल पहले की तुलना में ज्यादा हिस्सों में बंटता जा रहा है. ग्राहकों को खाने की कीमत के अलावा वितरण, मंच सेवा, पैकेजिंग, भुगतान के तरीके और कर के लिए अलग-अलग शुल्क का सामना करना पड़ सकता है.
 


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