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भारत में सीनियर लिविंग का बाजार रफ्तार पकड़ रहा, 2030 तक ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान
वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती आबादी और आधुनिक, सुरक्षित व हेल्थकेयर सुविधाओं से लैस घरों की मांग बढ़ा रही बाजार का आकार, करीब ₹13,000 करोड़ के निवेश की भी तैयारी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत में सीनियर लिविंग सेगमेंट तेजी से रियल एस्टेट के नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है. वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती आबादी, बदलती पारिवारिक संरचना और सुरक्षित व स्वतंत्र जीवनशैली की बढ़ती चाहत के चलते इस बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है. कोलियर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच सकता है. यह मौजूदा स्तर के मुकाबले करीब चार गुना वृद्धि होगी.
बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए रियल एस्टेट डेवलपर्स, हेल्थकेयर कंपनियां और निवेशक भी इस सेगमेंट में तेजी से रुचि दिखा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब ₹13,000 करोड़ के निवेश की योजनाएं सामने आ चुकी हैं.
₹30,000 करोड़ का बाजार, 2030 तक तेज विस्तार की उम्मीद
फिलहाल भारत में सीनियर लिविंग मार्केट का आकार करीब ₹30,000 करोड़ है, जो 2024 में लगभग ₹18,000 करोड़ था. यानी कुछ ही समय में इस सेगमेंट में करीब 70 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. अनुमान है कि 2028 तक यह बाजार करीब ₹70,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि 2030 तक इसका आकार ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है. इस तेजी के पीछे देश में बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी एक प्रमुख कारण है. वर्तमान में भारत की करीब 11 फीसदी आबादी 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की है और 2050 तक यह हिस्सा बढ़कर लगभग 21 फीसदी होने का अनुमान है.
रिटायरमेंट होम से आगे बढ़ा सीनियर लिविंग कॉन्सेप्ट
बदलती जीवनशैली और पारिवारिक संरचना के साथ वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतें भी बदल रही हैं. अब मांग केवल ऐसे घरों तक सीमित नहीं है, जहां बुजुर्ग आराम से रह सकें. सीनियर सिटीजंस अब सुरक्षित वातावरण के साथ बेहतर हेल्थकेयर, वेलनेस, मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव जैसी सुविधाओं को भी प्राथमिकता दे रहे हैं. यही बदलाव पारंपरिक रिटायरमेंट होम के कॉन्सेप्ट को आधुनिक और संगठित सीनियर लिविंग कम्युनिटीज में बदल रहा है.
मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर
इस सेगमेंट में सबसे बड़ा अवसर मांग और संगठित सप्लाई के बीच मौजूद बड़े अंतर में छिपा है. भारत में सीनियर लिविंग की मौजूदा मांग करीब 20 से 22 लाख यूनिट की है, जबकि संगठित क्षेत्र में उपलब्ध इन्वेंट्री अभी करीब 25,000 यूनिट ही है. अनुमान है कि 2030 तक संगठित सीनियर लिविंग यूनिट्स की संख्या बढ़कर करीब 1 लाख तक पहुंच सकती है. इसके बावजूद मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बने रहने की संभावना है.
यही गैप डेवलपर्स और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है. आने वाले वर्षों में संगठित सीनियर लिविंग की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 4 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
अगले तीन से चार वर्षों में चार गुना बढ़ सकती है इन्वेंट्री
कोलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बादल याग्निक के अनुसार, संगठित सीनियर लिविंग इन्वेंट्री अगले तीन से चार वर्षों में करीब चार गुना बढ़ सकती है. उनका मानना है कि 2030 तक यह सेगमेंट एक ट्रिलियन रुपये यानी ₹1 लाख करोड़ से अधिक का बाजार बन सकता है. सीनियर लिविंग को अब केवल एक विशेष रियल एस्टेट कैटेगरी के बजाय दीर्घकालिक निवेश और विकास के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है.
गुरुग्राम और देहरादून में बढ़ती संभावनाएं
उत्तर भारत में गुरुग्राम और देहरादून जैसे शहर सीनियर लिविंग के लिए उभरते बाजारों के रूप में देखे जा रहे हैं. पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिषभ पेरिवाल के मुताबिक, संगठित सीनियर लिविंग का फोकस अब इन शहरों की ओर बढ़ रहा है.
गुरुग्राम की मजबूत कॉर्पोरेट मौजूदगी, हाई नेटवर्थ रिटायर्ड लोगों और एनआरआई परिवारों की बड़ी संख्या इस बाजार को समर्थन दे रही है. शहर की करीब 8 फीसदी आबादी 60 वर्ष से अधिक उम्र की है, जबकि लगभग 37 फीसदी लोगों की सालाना आय ₹10 लाख से ज्यादा है.
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, आरआरटीएस जैसी प्रमुख ट्रांसपोर्ट परियोजनाएं और आईजीआई एयरपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी भी गुरुग्राम की संभावनाओं को मजबूत कर रही हैं. इसके अलावा फोर्टिस और मेदांता जैसे प्रमुख अस्पतालों की मौजूदगी इसे उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकर्षक बनाती है, जो स्वतंत्र जीवनशैली के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहते हैं.
सिर्फ देखभाल नहीं, बेहतर और सम्मानजनक जीवन पर जोर
एलिगेंस एंटरप्राइजेज के संस्थापक रवि कांत का कहना है कि भारत में सीनियर लिविंग बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. बढ़ती जीवन प्रत्याशा, बदलते पारिवारिक ढांचे और स्वतंत्र जीवन जीने की चाहत इस सेगमेंट को नया रूप दे रही है.
उनके अनुसार, भविष्य में ऐसे आधुनिक समुदायों की मांग बढ़ेगी, जहां हेल्थकेयर के साथ वेलनेस, मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव की सुविधाएं भी उपलब्ध हों. सीनियर लिविंग अब केवल देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवनशैली का माध्यम बन रहा है.
रियल एस्टेट के लिए बन सकता है नया ग्रोथ इंजन
सीनियर लिविंग सेगमेंट आने वाले वर्षों में भारतीय रियल एस्टेट उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बन सकता है. वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या, बेहतर आय स्तर, बदलती पारिवारिक संरचना और हेल्थकेयर व वेलनेस पर बढ़ता फोकस इस बाजार को लगातार मजबूत कर रहा है.
आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जहां आवास के साथ हेल्थकेयर, वेलनेस, मनोरंजन और कम्युनिटी लाइफ की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हों. 2030 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक का बाजार बनने की संभावनाओं के साथ सीनियर लिविंग सेगमेंट डेवलपर्स, हेल्थकेयर कंपनियों और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए नए अवसरों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
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