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VB-G-RAM G में कामों का दायरा बढ़ा, अब 375 तरह के कामों को मंजूरी; पानी और आजीविका पर जोर
सरकार का कहना है कि कामों का दायरा बढ़ाने का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मजदूरी के अवसर देने के साथ ऐसी परिसंपत्तियां तैयार करना है, जिनका गांवों में लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ बुनियादी सुविधाओं और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने कामों का दायरा काफी बढ़ा दिया है. विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी के तहत अब 375 तरह के काम कराए जा सकेंगे. ग्रामीण विकास मंत्रालय की नई सूची में पानी संरक्षण, गांवों की बुनियादी सुविधाओं, आजीविका से जुड़े ढांचे और आपदा से बचाव के काम शामिल किए गए हैं. पहले इस व्यवस्था में 266 तरह के काम शामिल थे, यानी नई सूची में इनकी संख्या करीब 41 फीसदी बढ़ गई है.
मंत्रालय के अनुसार, 375 कामों को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है. इनमें पानी की सुरक्षा से जुड़े 128 काम, गांवों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े 111 काम, आजीविका से जुड़े ढांचे के 98 काम और आपदा की तैयारी एवं बचाव से संबंधित 38 काम शामिल हैं. सरकार का कहना है कि कामों का दायरा बढ़ाने का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मजदूरी के अवसर देने के साथ ऐसी परिसंपत्तियां तैयार करना है, जिनका गांवों में लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके.
पानी संरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम
नई सूची में सबसे ज्यादा 128 काम पानी से जुड़े हैं. इनमें छोटे बांध बनाने, भूजल स्तर बढ़ाने वाले ढांचे तैयार करने, नदियों और नालों के सुधार, जलभराव वाली जमीन को उपयोगी बनाने और खेतों तक पानी पहुंचाने वाली नालियों की मरम्मत जैसे काम शामिल हैं.
इसके अलावा बूंद-बूंद सिंचाई, फव्वारा सिंचाई और छतों से बारिश का पानी जमा करने से जुड़े काम भी कराए जा सकेंगे. पानी संरक्षण और सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए बर्फ के स्तूप और कृत्रिम हिमनद जैसे उपायों को भी सूची में शामिल किया गया है.
गांवों में पुस्तकालय से स्वास्थ्य केंद्र तक
गांवों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 111 तरह के कामों को मंजूरी दी गई है. इनमें सौर ऊर्जा से चलने वाली सड़क बत्तियां, ग्रामीण पुस्तकालय, पशु चिकित्सा केंद्र, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और साझा सेवा केंद्र शामिल हैं.
सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का निर्माण भी कराया जा सकेगा. जल जीवन मिशन के तहत तैयार जलापूर्ति ढांचे की मरम्मत और रखरखाव के अलावा कचरे की छंटाई, पुनर्चक्रण और इस्तेमाल किए गए पानी को साफ करने से जुड़ी सुविधाएं भी इस श्रेणी में शामिल हैं.
ग्रामीण आजीविका बढ़ाने वाले 98 काम
नई सूची में ग्रामीण आय और कारोबार से जुड़े ढांचे पर भी खास जोर दिया गया है. इसके तहत 98 तरह के काम कराए जा सकेंगे. कुल कामों में इनकी हिस्सेदारी करीब 26 फीसदी है, जबकि पुराने ढांचे में ऐसे कामों की हिस्सेदारी केवल 1.1 फीसदी थी. यह आंकड़ा कामों की संख्या के आधार पर है.
इनमें कृषि उत्पादों की सफाई, छंटाई और पैकिंग की इकाइयां, शीत भंडारण, छोटी आटा मिलें, मंडी परिसर और डेयरी से जुड़े ढांचे शामिल हैं. इसके अलावा मशरूम उत्पादन, रेशम उत्पादन, पॉलीहाउस और मछली पालन के लिए जरूरी ढांचे भी बनाए जा सकेंगे.
महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए कार्यस्थल, समूहों के लिए बाजार केंद्र और उनके संघों के भवन बनाने के साथ प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्रों को भी मंजूरी दी गई है.
आपदा से बचाव के लिए अलग श्रेणी
नई सूची में पहली बार आपदा की तैयारी और उससे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अलग श्रेणी बनाई गई है. इसमें 38 तरह के काम शामिल हैं. बाढ़ के दौरान राहत आश्रय बनाने, मिट्टी खिसकने से रोकने वाली दीवारें तैयार करने, तटबंध मजबूत करने और बाढ़ से बचाव के उपायों को इसमें शामिल किया गया है. आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक सुविधाओं को फिर से तैयार करने के काम भी कराए जा सकेंगे. जंगल की आग को फैलने से रोकने वाले उपाय भी इस श्रेणी का हिस्सा हैं.
खेती, महिलाओं और युवाओं पर भी जोर
मंत्रालय ने खेती, कमजोर परिवारों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को ध्यान में रखते हुए भी कामों की पहचान की है. कुल सूची में खेती और इससे जुड़े क्षेत्रों के 181 काम हैं, जिनमें 52 काम व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए हैं.
कमजोर और अंत्योदय परिवारों के लिए 107 काम चिह्नित किए गए हैं. इनमें 68 काम व्यक्तिगत लाभार्थियों से जुड़े हैं. इनके तहत आवास, शौचालय, ऊर्जा, सिंचाई और पशुओं के आश्रय जैसी सुविधाएं तैयार की जा सकेंगी. महिलाओं और युवाओं से जुड़े 36-36 काम भी चिह्नित किए गए हैं. ये लाभार्थियों के आधार पर बनाई गई श्रेणियां हैं और इन्हें चार प्रमुख श्रेणियों के अतिरिक्त काम नहीं माना जाएगा.
ग्राम सभा तय करेगी प्राथमिकता
हर गांव में स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकसित ग्राम पंचायत योजना के जरिए कामों का चयन किया जाएगा. इसके बाद ग्राम सभा से इन योजनाओं को मंजूरी मिलेगी. कामों की डिजिटल निगरानी विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना ढांचे के जरिए की जाएगी.
सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था से केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर की विभिन्न योजनाओं के संसाधनों को एक साथ जोड़ने में मदद मिलेगी. साथ ही, एक ही काम पर अलग-अलग योजनाओं के तहत दोहराव वाला खर्च रोकने की कोशिश की जाएगी.
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