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RBI MPC से पहले रियल्टी की उम्मीदें, 5.25% पर रेपो रेट रहने से होमबायर्स का भरोसा बढ़ने की आस
त्योहारी सीजन में घर खरीदारी के बीच रियल एस्टेट डेवलपर्स की नजर RBI के फैसले पर, स्थिर दरों से EMI, अफोर्डेबिलिटी और हाउसिंग डिमांड को मिल सकता है सहारा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के 7 अक्टूबर को आने वाले फैसले से पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का रियल एस्टेट सेक्टर ब्याज दरों को लेकर सतर्क है. त्योहारी सीजन में घरों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद के बीच कई रियल एस्टेट डेवलपर्स को उम्मीद है कि RBI रेपो रेट को मौजूदा 5.25% पर बनाए रखेगा. उनके मुताबिक, ब्याज दरों में स्थिरता से होम लोन की EMI को लेकर अनिश्चितता कम होगी और खरीदारों को प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला लेने में मदद मिलेगी.
हालांकि, इस बार बाजार की उम्मीदें पूरी तरह एकतरफा नहीं हैं. एक के हालिया सर्वे में 61 अर्थशास्त्रियों में से 38, यानी 60% से अधिक, ने अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. ऐसा होने पर रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो सकता है. बढ़ती महंगाई, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक स्तर पर सख्त मौद्रिक रुख के बीच RBI के सामने महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन की चुनौती है.
स्थिर दरों से त्योहारी सीजन में खरीदारी को सहारा
रियल एस्टेट डेवलपर्स का कहना है कि नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के दौरान घर खरीदने की गतिविधियां आमतौर पर तेज होती हैं. ऐसे में अगर रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहता है तो होमबायर्स को होम लोन की लागत और EMI को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिल सकती है.
जेएमएस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह ने कहा, "अक्टूबर की MPC बैठक को देखते हुए RBI के सामने घरेलू महंगाई को नियंत्रित करने और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से उत्पन्न चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है. एक विशेषज्ञ के तौर पर मेरा मानना है कि 'होल्ड' की रणनीति जारी रह सकती है, जिससे बाजार को वह निरंतरता और स्थिरता मिलेगी जिसकी इस समय आवश्यकता है. लग्जरी सेगमेंट में हम देख रहे हैं कि हाई-एंड खरीदार ब्याज दरों में बदलाव से काफी हद तक अप्रभावित हैं और वे लाइफस्टाइल तथा एसेट वैल्यू को प्राथमिकता दे रहे हैं. कुल मिलाकर, फिलहाल बाजार 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है और अब तक बाजार ने मजबूती दिखाई है."
अफोर्डेबिलिटी बनी रहेगी अहम
रोयाल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासन ने कहा, "रियल एस्टेट सेक्टर RBI के मौद्रिक नीति फैसले पर करीब से नजर बनाए हुए है, खासकर वैश्विक अनिश्चितताओं और अस्थिर वित्तीय बाजारों की पृष्ठभूमि में. अनुकूल मौद्रिक रुख से बाजार में लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है, उधारी की परिस्थितियां आसान हो सकती हैं और विभिन्न सेगमेंट में हाउसिंग डिमांड को समर्थन मिल सकता है. पिछले कुछ वर्षों में अफोर्डेबिलिटी ने आवासीय बिक्री को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और फाइनेंसिंग लागत में किसी भी कमी से होमबायर्स का भरोसा और मजबूत हो सकता है. हमें उम्मीद है कि RBI आर्थिक विकास को समर्थन देने और मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता सुनिश्चित करने के बीच संतुलित रुख अपनाएगा, जिससे लंबे समय में रियल एस्टेट सेक्टर के विस्तार के लिए अनुकूल माहौल बना रहेगा."
कोलियर्स की सितंबर 2026 की Homebuying Sentiment Survey भी बताती है कि खरीदारों की प्रॉपर्टी खरीदने की इच्छा बनी हुई है, लेकिन अफोर्डेबिलिटी और कीमतें बड़ी चिंता हैं. सर्वे में 31% संभावित खरीदारों ने अफोर्डेबिलिटी और प्राइसिंग को सबसे बड़ी चिंता बताया. वहीं, 65% खरीदारों ने आकर्षक कीमत और फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान को तत्काल खरीदारी के फैसले में महत्वपूर्ण माना.
क्रेडिट उपलब्धता और निवेश गतिविधि पर नजर
रूट्स डेवसपर्स के डायरेक्टर राजन यादव ने कहा, "वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता को देखते हुए RBI की अक्टूबर नीति घोषणा उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो उपभोक्ता भावनाओं और दीर्घकालिक वित्तपोषण पर निर्भर हैं, जिनमें रियल एस्टेट भी शामिल है. सेक्टर ऐसी नीतियों का स्वागत करेगा जो क्रेडिट की उपलब्धता को समर्थन दें और अनुकूल लेंडिंग कंडीशंस बनाए रखें. कम ब्याज दरें न केवल घर खरीदने को अधिक सुलभ बनाती हैं, बल्कि आवासीय और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में निवेश गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करती हैं. हमारा मानना है कि विकास को समर्थन देने वाला नीतिगत ढांचा भारत को दुनिया के सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले रियल एस्टेट बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद कर सकता है."
NCR में आवासीय मांग के मजबूत बने रहने के संकेत पहले से मिल रहे हैं. एनरॉक के Q1 2026 के आंकड़ों के मुताबिक NCR में करीब 15,200 घरों की बिक्री हुई, जो सालाना आधार पर 21% अधिक थी. गुरुग्राम कुल NCR बिक्री में करीब 43% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की हिस्सेदारी क्रमशः 19% और 16% रही.
पहली बार घर खरीदने वालों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण
कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग ने कहा, "हमें उम्मीद है कि RBI आगामी मौद्रिक नीति घोषणा में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखेगा, जिससे हाउसिंग मार्केट को जरूरी स्थिरता मिलेगी. ब्याज दरों में यथास्थिति होमबायर्स, विशेषकर पहली बार घर खरीदने वालों और एंड-यूजर्स का भरोसा मजबूत करेगी, जो लगातार उधारी लागत पर नजर बनाए हुए हैं. स्थिर लेंडिंग रेट्स प्रॉपर्टी खरीदने के फैसलों के लिए एक पूर्वानुमेय माहौल तैयार करते हैं और आवासीय रियल एस्टेट में निरंतर मांग को समर्थन देते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "गाजियाबाद और व्यापक NCR जैसे बाजारों में, जहां अफोर्डेबिलिटी और फाइनेंसिंग खरीद के महत्वपूर्ण कारक हैं, नीतिगत निरंतरता उन संभावित खरीदारों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है, जो फिलहाल निर्णय लेने को लेकर असमंजस में हैं. हमारा मानना है कि स्थिर मौद्रिक नीति, बेहतर होती इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी और सकारात्मक उपभोक्ता भावनाएं आने वाली तिमाहियों में आवासीय बाजार की स्वस्थ गति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी."
गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद में मांग पर क्या असर?
त्योहारी सीजन में NCR के गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे बाजारों पर खास नजर रहेगी. गुरुग्राम में गोल्फ कोर्स रोड, द्वारका एक्सप्रेसवे, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, सदर्न पेरिफेरल रोड, न्यू गुरुग्राम और सोहना रोड जैसे माइक्रो-मार्केट लगातार डेवलपर गतिविधियों और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के कारण खरीदारों के रडार पर हैं.
एनरॉक के आंकड़ों में भी गुरुग्राम की NCR आवासीय बिक्री में मजबूत स्थिति सामने आई है. हालांकि, उपलब्ध इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा भी इसी बाजार में है, जिससे आने वाले समय में नई सप्लाई और बिक्री के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा.
अगर रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा तो?
रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होने पर होम लोन की ब्याज दरों पर ऊपर की ओर दबाव आ सकता है. इसका सबसे सीधा असर EMI और घर खरीदने की कुल लागत पर पड़ सकता है. खास तौर पर पहली बार घर खरीदने वाले और कीमत के प्रति संवेदनशील खरीदार अपने फैसले को टाल सकते हैं.
काउंटी ग्रुप के निदेशक अमित मोदी के अनुसार, "त्योहारी मौसम में ब्याज दरों का स्थिर रहना घर खरीदने वालों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होता है. अगर रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होती है तो इससे होम लोन की EMI बढ़ सकती है. इसका असर खास तौर पर पहली बार घर खरीदने वाले और कीमत को लेकर अधिक संवेदनशील लोगों पर पड़ सकता है."
कुशाग्र अंसल, डायरेक्टर, अंसल हाउसिंग, ने कहा, "रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर होम लोन की लागत पर पड़ता है. इससे खरीदार की EMI बढ़ सकती है और कुछ लोग घर खरीदने का फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते हैं. लेकिन अगर बढ़ोतरी सीमित रहती है तो इसका असर पूरे रियल एस्टेट बाजार पर बहुत अधिक नहीं होगा. जिन बाजारों में घरों की मांग मजबूत है, वहां खरीदार मामूली बढ़ोतरी के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं."
सिर्फ ब्याज दर नहीं, लोकेशन और कनेक्टिविटी भी अहम
मिगसन ग्रुप के निदेशक यश मिगलानी ने कहा, "ब्याज दर रियल एस्टेट में मांग को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन यह अकेला कारक नहीं है. आज खरीदार बेहतर स्थान, अच्छी कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं और भरोसेमंद डेवलपर को भी महत्व दे रहे हैं. इसलिए रेपो रेट में सीमित बढ़ोतरी से बाजार की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन मांग में बड़ी गिरावट जरूरी नहीं है."
यह बदलाव NCR के बाजार में भी दिखाई देता है. लंबे समय में बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर वाले कॉरिडोर खरीदारों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. द्वारका एक्सप्रेसवे, सोहना रोड और NCR के अन्य प्रमुख कनेक्टिविटी कॉरिडोर के साथ विकसित हो रहे आवासीय बाजारों में यह ट्रेंड महत्वपूर्ण हो सकता है.
गुरुग्राम में खरीदारों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं
एमआरजी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर रजत गोयल ने कहा, "RBI के आगामी रेपो रेट फैसले को देखते हुए हमारा मानना है कि महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के बीच संतुलन रखना जरूरी है. रियल एस्टेट के लिए कर्ज की लागत में स्थिरता और स्पष्टता महत्वपूर्ण है, क्योंकि घर खरीदना लंबे समय का फैसला होता है और खरीदारों की पसंद भी लगातार बदल रही है."
उन्होंने कहा, "गुरुग्राम में हम देख रहे हैं कि लोग बेहतर योजना, जगह के सही इस्तेमाल, डिजाइन और जीवन की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. ऐसे माहौल में ब्याज दरों का स्थिर और अनुमान के मुताबिक रहना खरीदारों को अधिक भरोसे के साथ फैसला लेने में मदद करेगा. साथ ही, डेवलपर्स को आज के होमबायर्स की जरूरतों के अनुसार बेहतर और सुनियोजित प्रोजेक्ट विकसित करने पर ध्यान देने में मदद मिलेगी."
RBI के फैसले से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा आगे का संकेत
फिलहाल रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सिर्फ 7 अक्टूबर का फैसला ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि RBI का आगे का रुख भी उतना ही अहम होगा. अगर केंद्रीय बैंक दरों को 5.25% पर बनाए रखता है तो इससे त्योहारी सीजन में होम लोन लागत को लेकर स्थिरता का संदेश जाएगा. वहीं, 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होती है तो इसका तत्काल असर सीमित हो सकता है, लेकिन आगे की दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं.
एक हालिया सर्वे में दर बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ने के पीछे अगस्त की खुदरा महंगाई का 4.82% तक पहुंचना, लगातार तीन महीनों तक RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर रहना और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के दबाव को प्रमुख कारण बताया गया है.
इसलिए NCR रियल एस्टेट के लिए MPC का फैसला एक तरह से 'EMI बनाम अफोर्डेबिलिटी' और 'महंगाई बनाम ग्रोथ' के संतुलन का संकेत होगा. स्थिर दरें त्योहारी सीजन में खरीदारों और डेवलपर्स दोनों को अधिक पूर्वानुमेय माहौल दे सकती हैं, जबकि दर बढ़ने की स्थिति में मजबूत लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी और वास्तविक एंड-यूजर डिमांड वाले बाजार अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.
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