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भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी में बड़ा निवेश प्लान, 15 साल में 100 अरब डॉलर और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य

निवेश, रोजगार और टेक्नोलॉजी से लेकर EV, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च तक 6 अहम समझौते; भारत में स्विस कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देने पर जोर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

भारत और स्विट्जरलैंड ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति देने के लिए कई अहम फैसले किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में निवेश, रोजगार, निर्यात, टेक्नोलॉजी, रिसर्च, EV और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. दोनों देशों के बीच हुई इस साझेदारी के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है.

भारत और यूरोपीय देशों के समूह EFTA के बीच हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के तहत यह निवेश लक्ष्य तय किया गया है. भारत स्विट्जरलैंड से खास तौर पर बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग, सस्टेनेबिलिटी और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना चाहता है. इससे नए उद्योगों के साथ मौजूदा कंपनियों के विस्तार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

6 अहम समझौतों से बढ़ेगा सहयोग

युवा प्रोफेशनल्स और रोजगार के अवसर: भारत और स्विट्जरलैंड ने यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS) के तहत समझौता किया है. इसके तहत दोनों देशों से हर साल 300 युवा प्रोफेशनल्स एक-दूसरे के देश में जाकर काम और अनुभव हासिल कर सकेंगे. जरूरत और आपसी सहमति के आधार पर यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है. छात्रों और युवाओं के लिए वीजा और रोजगार से जुड़े अवसरों को भी आसान बनाने पर जोर दिया गया है.

EV और इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी: दोनों देशों ने परिवहन तकनीक, मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया है. इसके दायरे में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, टनल और परिवहन बुनियादी ढांचा शामिल हैं. इस साझेदारी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने की योजना है.

विज्ञान और रिसर्च में साझेदारी: भारत के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के बीच वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति बनी है. इसका उद्देश्य दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच संयुक्त रिसर्च परियोजनाओं के लिए सहयोग का आधार तैयार करना है.

स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: DST और Zurich University of Applied Sciences के बीच इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए इम्प्लिमेंटेशन एग्रीमेंट हुआ है. इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए Indo-Swiss Academia-Industry Training शुरू की जाएगी. इससे स्टार्टअप्स को नई तकनीक और कारोबारी कौशल हासिल करने में मदद मिल सकती है.

इंडो-स्विस रिसर्च फ्लैगशिप: दोनों देशों ने Indo-Swiss Research Flagship कार्यक्रम का पहला सत्र भी शुरू किया है. इसका फोकस युवा शोधकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक और रिसर्च मेथडोलॉजी के आदान-प्रदान तथा दोनों देशों के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर है.

माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप: दोनों देशों ने माइग्रेशन और मोबिलिटी के क्षेत्र में भी समझौता किया है. इसके तहत पांच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीजा और छात्रों के लिए एक साल के रिन्यूएबल परमिट जैसी सुविधाओं का प्रावधान है. इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच छात्रों, युवाओं और प्रोफेशनल्स की आवाजाही को आसान बनाना है.

भारतीय उत्पादों के निर्यात को भी मिलेगा बढ़ावा

भारत और स्विट्जरलैंड ने बाजार पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को आसान बनाने पर भी जोर दिया है. इससे कृषि, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के भारतीय उत्पादों के स्विस बाजार में निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं. निर्यात बढ़ने से घरेलू उत्पादन और रोजगार को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है.

रक्षा और परमाणु ऊर्जा में भी सहयोग

आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ भारत और स्विट्जरलैंड ने रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है. प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा उत्पादन और रक्षा सहयोग के नए रास्तों की पहचान की है. परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त प्रयास बढ़ाने पर सहमति बनी है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्ते अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं. निवेश, रोजगार, निर्यात, टेक्नोलॉजी, रिसर्च और युवाओं के अवसर दोनों देशों की साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से बन रहे हैं.

 


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