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UPI पर MDR का असर! ट्रांजैक्शन वैल्यू 10% और वॉल्यूम 4% तक घटने का अनुमान
15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होने का प्रस्ताव है. सर्वे के मुताबिक, अतिरिक्त शुल्क लगने पर 76% यूजर्स बड़े भुगतान के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का रुख कर सकते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) भुगतान पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में करीब 10% और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की गिरावट आ सकती है. LocalCircles के मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है. सर्वे के मुताबिक, MDR लागू होने के बाद अधिक राशि वाले UPI भुगतान का एक हिस्सा कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बैंक ट्रांसफर की ओर जा सकता है.
₹2,000 से अधिक के भुगतान UPI वैल्यू का 67%
LocalCircles के CEO सचिन तापड़िया के मुताबिक, यह अनुमान MDR लागू होने से पहले किए गए अलग-अलग मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे पर आधारित है. अगस्त में ₹2,000 से अधिक के भुगतान मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का केवल करीब 4% थे, लेकिन इनका हिस्सा कुल मर्चेंट UPI भुगतान की वैल्यू में 67% था. इन भुगतानों की कुल राशि करीब ₹6 लाख करोड़ प्रति माह बैठती है.
अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही. इनमें मर्चेंट भुगतान की संख्या 15.51 अरब और वैल्यू ₹8.95 लाख करोड़ रही. ऐसे में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान संख्या में कम होने के बावजूद UPI की कुल वैल्यू पर बड़ा असर डाल सकते हैं.
MDR लगने पर 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका
2 अक्टूबर को जारी LocalCircles के कंज्यूमर सर्वे में 76% लोगों ने कहा कि अगर UPI इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे बड़े भुगतानों के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं. केवल 14% लोगों ने कहा कि अगर मर्चेंट MDR का बोझ उन पर डालता है तो वे अतिरिक्त राशि देकर भी UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे.
अगर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर मर्चेंट ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लेता है, तो 27% लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड की ओर जाने की बात कही. 14% डेबिट कार्ड और 4% बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का इस्तेमाल कर सकते हैं.
भविष्य में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड और इतने ही लोगों ने कैश को पसंदीदा विकल्प बताया. 13% ने डेबिट कार्ड और 11% ने बैंक ट्रांसफर को प्राथमिकता दी. वहीं, केवल 20% लोगों ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद UPI उनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला माध्यम रहेगा.
UPI वॉल्यूम पर 4% असर का अनुमान
LocalCircles के मुताबिक, MDR लागू होने के पहले पूरे महीने में UPI की कुल वैल्यू में करीब 10% की गिरावट आ सकती है. वहीं, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की कमी का अनुमान है.
इस 4% गिरावट में करीब 1% सीधा असर उन ट्रांजैक्शन पर पड़ सकता है जिन पर MDR लागू होगा. बाकी करीब 3% गिरावट उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार में बदलाव से हो सकती है. यानी जहां मर्चेंट अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे, वहां ग्राहक UPI के बजाय दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
### ₹2,000 तक UPI भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क
MDR एक तरह का शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक और भुगतान कंपनियों को दिया जाता है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति से मर्चेंट (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा.
सरकार ने 14 सितंबर को ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो चार्ज जारी रखने का फैसला किया था. UPI QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट भी प्रस्तावित MDR से बाहर रहेंगे. LocalCircles का अनुमान है कि मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का करीब 96% हिस्सा इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होगा.
सरकार ने कहा- ग्राहकों से MDR नहीं वसूला जाएगा
सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में कहा था कि इस शुल्क की जिम्मेदारी ग्राहकों की नहीं है. सरकार भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जिसके जरिए बैंक मर्चेंट्स की निगरानी कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि MDR ग्राहकों से न वसूला जाए.
ज्यादातर मर्चेंट MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं
LocalCircles के 32,796 मर्चेंट्स के सर्वे में 41% ने कहा कि वे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं देंगे. वहीं, 9% मर्चेंट UPI भुगतान स्वीकार ही नहीं करते. सिर्फ 17% मर्चेंट 0.4% या उससे अधिक MDR वहन करने के लिए तैयार दिखे. 15% ने कहा कि वे अधिकतम 0.04% MDR ही स्वीकार करेंगे.
LocalCircles के मुताबिक, MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं होने वाले मर्चेंट कीमत बढ़ा सकते हैं, अलग से शुल्क लगा सकते हैं या ग्राहकों को कैश, कार्ड और बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों की ओर भेज सकते हैं.
जीरो MDR व्यवस्था में हो रहा बदलाव
प्रस्तावित MDR व्यवस्था UPI पर लंबे समय से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. UPI के विस्तार में इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगस्त में संसद ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया था. इससे RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने पर लगी व्यापक रोक हट गई और केंद्र को यह तय करने की अनुमति मिली कि किन भुगतान माध्यमों को शुल्क मुक्त रखा जाएगा.
सरकार ने UPI सिस्टम को बनाए रखने की लागत का भी हवाला दिया है. UPI ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहन राशि वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹3,631 करोड़ पहुंच गई थी, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वित्तीय सेवा विभाग ने संसदीय समिति को बताया है कि लंबे समय तक जीरो MDR व्यवस्था को बनाए रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता.
नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं होगा. ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े भुगतान पर ₹5 का फ्लैट शुल्क होगा, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR लगेगा.
कारोबारी संगठनों ने किया विरोध
प्रस्तावित MDR का कारोबारी संगठनों ने भी विरोध किया है. उनका कहना है कि मर्चेंट बिल को अलग-अलग हिस्सों में बांट सकते हैं, ग्राहकों को बैंक ट्रांसफर की ओर भेज सकते हैं या अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए कीमतों में बदलाव कर सकते हैं.
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस व्यवस्था का विरोध किया है, जबकि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने इसे वापस लेने की मांग की है. 30 सितंबर को CAIT के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की थी, जिसके बाद प्रस्तावित 'नो UPI डे' प्रदर्शन वापस ले लिया गया.
LocalCircles ने सुझाव दिया है कि शुरुआत में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR सिर्फ बड़े कॉरपोरेट मर्चेंट्स पर लागू किया जाए और MSMEs को इससे बाहर रखा जाए. संगठन का अनुमान है कि इससे संभावित MDR राजस्व का करीब 98% हासिल किया जा सकता है, जबकि छोटे कारोबारियों पर असर भी सीमित रहेगा.
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