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अगस्त में कपड़ा उत्पादन 13.1% बढ़ा, परिधान उत्पादन 7.4% गिरा; दोनों क्षेत्रों में बढ़ा अंतर
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 8% बढ़ा, जो जुलाई के 6.7% की तुलना में अधिक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत के कपड़ा उद्योग में अगस्त में उत्पादन के स्तर पर अलग-अलग रुझान देखने को मिले. एक ओर कपड़ा उत्पादन में सालाना आधार पर 13.1% की बढ़ोतरी हुई, वहीं तैयार परिधानों यानी कपड़ों के उत्पादन में 7.4% की गिरावट दर्ज की गई. इससे उद्योग के कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों वाले हिस्से तथा तैयार परिधानों के कारोबार के बीच अंतर और बढ़ गया है.
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 8% बढ़ा, जो जुलाई के 6.7% की तुलना में अधिक है. विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 18 ने अगस्त में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की.
अप्रैल-अगस्त में कपड़ा उत्पादन 11.9% बढ़ा
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-अगस्त के दौरान कपड़ा उत्पादन में 11.9% की संचयी वृद्धि दर्ज की गई. इसके विपरीत, इसी अवधि में तैयार परिधानों का उत्पादन 5.6% घट गया. इससे संकेत मिलता है कि कपड़ा क्षेत्र के शुरुआती चरणों में उत्पादन मजबूत रहने के बावजूद तैयार कपड़ों की मांग और उत्पादन में कमजोरी बनी हुई है.
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में कपड़ा क्षेत्र का भार 3.27 और तैयार परिधानों का भार 1.97 है. पूरे IIP में विनिर्माण क्षेत्र का भार 76.062 है. शेष भार खनन एवं उत्खनन, बिजली एवं गैस आपूर्ति तथा जल आपूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों का है.
परिधान उत्पादन में लगातार उतार-चढ़ाव
पिछले एक साल में तैयार परिधानों के उत्पादन में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. सितंबर 2025 में उत्पादन 2% और अक्टूबर में 7.3% घटा था. इसके बाद नवंबर में 6.7% और दिसंबर में 17% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई.
2026 की शुरुआत में यह सुधार टिक नहीं पाया. जनवरी में परिधान उत्पादन 8.6% और फरवरी में 3.4% घटा. मार्च में उत्पादन 4.8% बढ़ा, लेकिन अप्रैल में 10% से अधिक की गिरावट आई. इसके बाद मई में 3.6% और जून में 2.3% की वृद्धि दर्ज की गई.
जुलाई में परिधान उत्पादन फिर 2.3% घटा और अगस्त में 7.2% की गिरावट दर्ज की गई. यानी कुल औद्योगिक उत्पादन में अगस्त में तेज वृद्धि के बावजूद तैयार परिधानों का उत्पादन कमजोर रहा.
इसके उलट, कपड़ा उत्पादन में अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच अक्टूबर को छोड़कर लगातार मासिक वृद्धि दर्ज की गई. अक्टूबर 2025 में इसमें 7.7% की गिरावट आई थी. इसके बाद जनवरी 2026 में कपड़ा उत्पादन 5.7% और फरवरी में 24.2% घटा. हालांकि, मार्च में इसमें करीब 48% की जोरदार वृद्धि हुई और अगस्त तक मजबूत उत्पादन का रुझान बना रहा.
यार्न और कपड़े की मांग अलग, परिधान कारोबार पर निर्यात का असर
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल के मुताबिक, कपड़ा और तैयार परिधान IIP की अलग-अलग श्रेणियां हैं और ये उत्पादन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को दर्शाती हैं. कपड़ा क्षेत्र में यार्न और फैब्रिक जैसे शुरुआती चरण शामिल होते हैं, जिनका उत्पादन कच्चे माल की कीमतों, इन्वेंटरी और मध्यवर्ती मांग से प्रभावित होता है.
उन्होंने कहा कि तैयार परिधान उत्पादन मूल्यवर्धन की अंतिम कड़ी है और यह निर्यात ऑर्डर, खरीदारों के पास मौजूद इन्वेंटरी और वैश्विक खुदरा मांग से ज्यादा सीधे तौर पर जुड़ा है. हाल में यार्न की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा भू-राजनीतिक और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं का असर भी परिधान उत्पादन पर तेजी से पड़ सकता है, क्योंकि यह बाहरी मांग पर अधिक निर्भर है.
घरेलू बाजार भी बड़ा सहारा
भारत के कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए घरेलू बाजार भी काफी महत्वपूर्ण है. कपड़ा मंत्रालय के नेशनल हाउसहोल्ड सर्वे 2024 के अनुसार, भारत का कुल कपड़ा बाजार करीब 14.95 लाख करोड़ रुपये का था. इसमें घरेलू बाजार की हिस्सेदारी करीब 12.02 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 80% थी.
भारत ने 2030 तक परिधान निर्यात को बढ़ाकर 40 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल यह करीब 16 अरब डॉलर है. उद्योग नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और दूसरे देशों में बाजार पहुंच बढ़ाकर निर्यात बाजार में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है.
नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स 2025 के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के औसत आधार पर कपड़ा और परिधान क्षेत्र का देश की GDP में करीब 2% और विनिर्माण सकल मूल्यवर्धन (GVA) में करीब 11% योगदान रहा है.
शक्तिवेल ने कहा कि परिधान विनिर्माण में लंबे समय तक गिरावट रहने से विनिर्माण, मूल्यवर्धन, निर्यात, निवेश और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा IIP आंकड़ों पर करीब से नजर रखने की जरूरत है. साथ ही उद्योग नए बाजारों में पहुंच बढ़ाने और निर्यात के लिए नए अवसर तलाश रहा है.
अप्रैल-अगस्त में परिधान निर्यात 9.1% घटा
वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-अगस्त के दौरान भारत का परिधान निर्यात 9.1% घटा है. यह वैश्विक बाजार में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को दर्शाता है. हालांकि, शक्तिवेल के मुताबिक हाल के महीनों में गिरावट की रफ्तार कुछ कम हुई है.
उद्योग को आगामी त्योहारी सीजन से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार की उम्मीद है. कंपनियां विदेशों में त्योहारी सीजन और क्रिसमस से जुड़े ऑर्डर पर भी नजर रख रही हैं. नए FTA और व्यापक बाजार पहुंच से निर्यात बाजार में विविधता बढ़ने की उम्मीद है, जबकि घरेलू बाजार अतिरिक्त मांग का आधार उपलब्ध कराता है.
उद्योग को अगले 2-3 महीनों में सुधार की उम्मीद
मुंबई स्थित निर्यातक और Technocraft Industries के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शरद सराफ ने मौजूदा विनिर्माण सुस्ती को चक्रीय बताया. उन्होंने अगले दो से तीन महीनों में वृद्धि में सुधार की उम्मीद जताई. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी फिलहाल क्रिसमस से जुड़े ऑर्डर पर काम कर रही है, जिससे निर्यात बाजार में गतिविधि जारी रहने का संकेत मिलता है.
सराफ के मुताबिक, विनिर्माण इकाइयों को स्थायी आधार पर कुशल कर्मचारियों की जरूरत होती है. ऑर्डर बुक के आधार पर कंपनियों को अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती भी करनी पड़ती है. ऐसे में उत्पादन और ऑर्डर के स्तर के अनुसार श्रम की जरूरत में बदलाव आता रहता है.
कुल मिलाकर, चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों के IIP आंकड़े कपड़ा और तैयार परिधान क्षेत्र के बीच स्पष्ट अंतर दिखाते हैं. कपड़ा उत्पादन में शुरुआती गिरावट के बाद मजबूत सुधार हुआ है, जबकि तैयार परिधान उत्पादन अभी भी पिछले साल के स्तर से नीचे है. अब उद्योग की नजर आगामी निर्यात ऑर्डर, त्योहारी मांग, नए व्यापार समझौतों और नए बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर है.
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