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टाटा ग्रुप के अंदरूनी विवाद पर सरकार की नजर, 14 अरब डॉलर के निवेश पर असर की चिंता
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में टाटा ग्रुप के प्रस्तावित 14 अरब डॉलर के निवेश का भारत के लिए रणनीतिक महत्व, सरकार ने दखल से किया इनकार
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
टाटा ग्रुप में नेतृत्व और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर चल रहे विवाद पर सरकार की नजर है. सरकार को चिंता है कि ग्रुप के अंदरूनी मतभेदों का असर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी करीब 14 अरब डॉलर की निवेश योजनाओं पर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार ने टाटा ग्रुप के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोई योजना नहीं बनाई है. सरकार का भरोसा है कि ग्रुप खुद अपने मतभेदों को सुलझाएगा और प्रस्तावित निवेश योजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ेंगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार को भरोसा दिलाया गया है कि ये निवेश योजनाएं तय कार्यक्रम के मुताबिक जारी रहेंगी. इन परियोजनाओं को भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया पहले से मजबूत स्थिति में हैं. ऐसे में भारत इन क्षेत्रों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है.
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच बढ़ा विवाद
टाटा ग्रुप में विवाद अब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेदों से आगे बढ़कर टाटा संस के प्रशासन और उसके भविष्य के ढांचे तक पहुंच गया है. टाटा संस टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है.
विवाद का ताजा केंद्र टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति है. 17 सितंबर को हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक में चंद्रशेखरन को पांच साल का एक और कार्यकाल देने को मंजूरी दी गई. हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले का विरोध किया था.
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. नोएल टाटा ने इस बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग और बैठक के मिनट्स मांगे हैं, ताकि वह यह देख सकें कि बैठक में प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी और प्रस्ताव को मंजूरी देने का आधार क्या था.
इस मांग से टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस बोर्ड के बीच दोनों संस्थाओं की भूमिका और अधिकारों को लेकर मतभेद और स्पष्ट हुए हैं. साथ ही, टाटा संस के नेतृत्व को लेकर भी विवाद गहराता दिखाई दे रहा है.
पिछले साल भी सरकार ने जताई थी चिंता
टाटा ग्रुप के विवाद को लेकर सरकार की चिंता हालिया घटनाक्रम से पहले की है. पिछले साल अक्टूबर में टाटा ग्रुप के वरिष्ठ नेताओं ने कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की थी. यह बैठक टाटा ट्रस्ट्स के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय सरकार की ओर से संबंधित पक्षों को अपने मतभेद जल्द सुलझाने और ग्रुप में स्थिरता बनाए रखने का संदेश दिया गया था.
सेमीकंडक्टर निवेश भारत के लिए क्यों अहम
टाटा ग्रुप की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी निवेश योजनाओं को भारत की मैन्युफैक्चरिंग रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार देश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है.
ऐसे में टाटा ग्रुप की प्रस्तावित परियोजनाओं में किसी तरह की देरी का असर सिर्फ कंपनी की निवेश योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की इस रणनीतिक इंडस्ट्री में क्षमता बढ़ाने की योजनाओं पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि सरकार विवाद पर नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल ग्रुप के आंतरिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप से बच रही है.
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