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RBI ने बैंकों से सोखे ₹2.10 लाख करोड़, सिस्टम में अभी भी ₹5.16 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी
VRRR नीलामी के जरिए RBI ने दो चरणों में सोखी अतिरिक्त नकदी, 4 अक्टूबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹5.16 लाख करोड़ की सरप्लस लिक्विडिटी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए सोमवार को दो ओवरनाइट वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामियों के जरिए कुल 2.10 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सोखी. बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और 4 अक्टूबर तक यह करीब 5.16 लाख करोड़ रुपये थी.
पहली VRRR नीलामी में बैंकों ने 2 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 2.11 लाख करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. RBI ने पूरी 2 लाख करोड़ रुपये की राशि स्वीकार की. इस नीलामी में भारित औसत दर 5.24 फीसदी रही.
दूसरी नीलामी में कम रही मांग
दूसरी VRRR नीलामी में बैंकों की भागीदारी अपेक्षाकृत कमजोर रही. 50,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले बैंकों ने सिर्फ 10,142 करोड़ रुपये की बोलियां जमा कीं. RBI ने पूरी राशि स्वीकार कर ली. दोनों नीलामियों को मिलाकर केंद्रीय बैंक ने कुल 2,10,192 करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम से सोखे.
दो महीने से अतिरिक्त नकदी कम कर रहा RBI
RBI पिछले करीब दो महीनों से बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए कई VRRR नीलामियां कर चुका है. इसका उद्देश्य सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करना और ओवरनाइट मनी मार्केट की ब्याज दरों को रेपो रेट के आसपास बनाए रखना है.
4 अक्टूबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 5.16 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस लिक्विडिटी थी. इतनी बड़ी अतिरिक्त नकदी की वजह से ओवरनाइट ब्याज दरों पर नीचे की ओर दबाव बन सकता है. VRRR के जरिए RBI इस अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से अपने पास खींचता है.
FCNR(B) जमा से बढ़ी रुपये की लिक्विडिटी
बैंकिंग सिस्टम में हालिया लिक्विडिटी बढ़ने की एक वजह बैंकों की ओर से FCNR(B) जमा में हुई मजबूत बढ़ोतरी भी है. इन विदेशी मुद्रा जमाओं से देश में विदेशी मुद्रा आती है और RBI के साथ स्वैप के बाद बैंकिंग सिस्टम में रुपये की लिक्विडिटी बढ़ती है. इसके अलावा महीने के अंत में सरकार की ओर से वेतन और पेंशन भुगतान समेत विभिन्न खर्चों ने भी बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाने में योगदान दिया है.
रेपो रेट के आसपास दरें रखने की कोशिश
बार-बार VRRR नीलामी कराने से संकेत मिलता है कि RBI बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने पर लगातार ध्यान दे रहा है. केंद्रीय बैंक की कोशिश है कि अतिरिक्त लिक्विडिटी की वजह से ओवरनाइट मनी मार्केट की ब्याज दरें पॉलिसी रेपो रेट से बहुत नीचे न चली जाएं. इस तरह VRRR नीलामी RBI के लिए बैंकिंग सिस्टम में नकदी की मात्रा को संतुलित रखने और मौद्रिक नीति के असर को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है.
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