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3BHK और प्रीमियम घरों की बढ़ी मांग, क्या बदल रही है होमबायर्स की पसंद? डेवलपर्स ने बताया नया ट्रेंड
एनारॉक के एक सर्वे के अनुसार, सिर्फ घर का आकार ही नहीं, खरीदारों का बजट भी ऊपर जा रहा है. सर्वे में 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का प्राइस बैंड सबसे लोकप्रिय रहा. वहीं 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की ओर भी खरीदारों का झुकाव बढ़ा है.
रितु राणा 1 hour ago
भारतीय रियल एस्टेट बाजार में होमबायर्स की पसंद तेजी से बड़े और प्रीमियम घरों की ओर बढ़ रही है. एनारॉक के H1 2026 कंज्यूमर सेंटीमेंट सर्वे में करीब आधे यानी 48% खरीदारों ने 3BHK को अपनी पहली पसंद बताया है. वहीं 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का बजट सबसे पसंदीदा प्राइस सेगमेंट बनकर सामने आया है. खास बात यह है कि दिल्ली-NCR में 53% खरीदारों की पसंद 3BHK रही. रियल एस्टेट डेवलपर्स का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ ज्यादा जगह की जरूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि खरीदार अब बेहतर लेआउट, प्राइवेसी, सुविधाओं और लंबे समय की वैल्यू को भी प्राथमिकता दे रहे हैं.
एनारॉक के सर्वे में 14 शहरों के 8,320 लोगों को शामिल किया गया. सर्वे के मुताबिक 38% लोगों की पसंद 2BHK रही, जबकि 4BHK और उससे बड़े घरों की मांग H1 2024 के करीब 3% से बढ़कर H1 2026 में करीब 5% हो गई. अहमदाबाद में 57% लोगों ने 3BHK को प्राथमिकता दी. चेन्नई और दिल्ली-NCR में यह हिस्सेदारी 53-53% और हैदराबाद में 52% रही. बेंगलुरु और कोलकाता में 46% और पुणे में 47% लोगों ने 3BHK को पसंद किया. MMR में 3BHK की पसंद 39% रही.
सिर्फ घर का आकार ही नहीं, खरीदारों का बजट भी ऊपर जा रहा है. सर्वे में 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का प्राइस बैंड सबसे लोकप्रिय रहा. वहीं 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की ओर भी खरीदारों का झुकाव बढ़ा है. दूसरी ओर 45 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की पसंद पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है. इससे संकेत मिलता है कि खरीदार बेहतर लोकेशन, ज्यादा स्पेस और बेहतर सुविधाओं के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं.
डेवलपर्स की नजर में बदलती होमबायर्स की पसंद
डेवलपर्स के मुताबिक, यह बदलाव खास तौर पर NCR के बाजारों में दिखाई दे रहा है. अनहद डेवलपर्स के सीईओ आदिल अल्ताफ का कहना है कि बड़े घरों की बढ़ती मांग बताती है कि होमबायर्स अब अपने रहने की जरूरतों को लेकर ज्यादा स्पष्ट हैं. उनके मुताबिक खरीदार केवल ज्यादा स्क्वायर फुटेज नहीं चाहते, बल्कि ऐसे लेआउट पसंद कर रहे हैं जिन्हें परिवार की बदलती जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल किया जा सके. प्राइवेसी, प्रीमियम सुविधाएं और बेहतर लिविंग एक्सपीरियंस भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो गए हैं.
कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग के अनुसार, NCR के होमबायर्स की सोच में महत्वपूर्ण बदलाव आया है. उनका कहना है कि खरीदार अब ज्यादा स्पेस के साथ बेहतर प्लानिंग, उपयोगिता और लंबे समय तक आरामदायक रहने की सुविधा को महत्व दे रहे हैं. गाजियाबाद जैसे बाजारों में भी एंड-यूजर्स बड़े और बेहतर तरीके से प्लान किए गए घरों में अपग्रेड करना चाहते हैं. उनके मुताबिक ज्यादा कीमत वाले घरों की ओर बढ़ता रुझान लोगों की बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती आकांक्षाओं को भी दर्शाता है.
गुरुग्राम में भी बड़े और प्रीमियम घरों की मांग को लेकर डेवलपर्स और रियल एस्टेट सलाहकारों का रुझान इसी दिशा की ओर है. सिल्वरडोम रियलटर्स के फाउंडर एवं सीईओ ऋषि सिंह के मुताबिक द्वारका एक्सप्रेसवे पिछले कुछ वर्षों में गुरुग्राम के प्रमुख रियल एस्टेट ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में उभरा है. उनका कहना है कि यहां बड़े डेवलपर्स के प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की बढ़ती मौजूदगी बेहतर कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े घरों की मांग के बीच संबंध को दिखाती है. दिल्ली, IGI एयरपोर्ट और गुरुग्राम के प्रमुख कमर्शियल हब्स से कनेक्टिविटी भी इस माइक्रो-मार्केट की मांग को सपोर्ट कर रही है.
JMS ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक गुरुग्राम और नोएडा में आवासीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को केवल अस्थायी तेजी के तौर पर नहीं देखा जा सकता. उनके अनुसार, खासकर सेक्टर 95 और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे कॉरिडोर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का प्रॉपर्टी कीमतों पर असर पड़ा है. उनका कहना है कि इन माइक्रो-मार्केट्स में रेंटल यील्ड में भी सुधार देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मांग केवल कीमतों में तेजी तक सीमित नहीं है.
हालांकि, महंगे होते घर खरीदारों के सामने चुनौती भी बढ़ा रहे हैं. एनारॉक सर्वे के मुताबिक 65% उत्तरदाताओं ने मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कम से कम मध्यम स्तर की चिंता जताई. 40% लोगों को लगता है कि कीमतों में बढ़ोतरी का यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है. इसके बावजूद 44% खरीदार अपनी तय योजना के मुताबिक घर खरीदने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं. वहीं 38% खरीदार खरीदारी में कुछ समय की देरी कर सकते हैं और 18% इसे अनिश्चित समय के लिए टालने या रद्द करने पर विचार कर रहे हैं.
अफोर्डेबिलिटी सबसे बड़ी चुनौती
घर खरीदने में देरी या खरीदारी रद्द करने की सबसे बड़ी वजह अफोर्डेबिलिटी है. 44% उत्तरदाताओं ने इसे प्रमुख कारण बताया. वहीं 32% लोगों ने अपने बजट में उपलब्ध प्रॉपर्टी के सीमित विकल्पों को बड़ी समस्या माना. बढ़ती कीमतों के बीच कुछ खरीदार बाहरी इलाकों में प्रॉपर्टी तलाश रहे हैं, जबकि कुछ खरीदारी का समय आगे बढ़ा रहे हैं या फिलहाल किराये के घर में रहने का विकल्प चुन रहे हैं.
इसके बावजूद हाउसिंग डिमांड में एंड-यूजर्स की भूमिका मजबूत बनी हुई है. सर्वे में 68% लोगों ने कहा कि वे खुद रहने के लिए घर खरीद रहे हैं, जबकि 32% का उद्देश्य निवेश है. इससे संकेत मिलता है कि बड़े घरों की मांग काफी हद तक वास्तविक आवासीय जरूरतों से जुड़ी है.
रियल एस्टेट को निवेश के तौर पर भी मजबूत पसंद
खरीदार घर को केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि लंबे समय के वित्तीय एसेट के रूप में भी देख रहे हैं. सर्वे में 77% उत्तरदाताओं ने रेंटल इनकम को महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण माना. वहीं 67% लोगों ने प्रॉपर्टी की संभावित रीसेल वैल्यू को महत्वपूर्ण बताया.
निवेश के विकल्पों में भी रियल एस्टेट की मजबूत स्थिति बनी हुई है. 60% उत्तरदाताओं ने निवेश के लिए रियल एस्टेट को प्राथमिकता दी. इसके मुकाबले 20% लोगों की पसंद शेयर बाजार, 11% की गोल्ड और 9% की फिक्स्ड डिपॉजिट रही. वहीं रियल एस्टेट के अलावा दूसरे एसेट्स में निवेश करने वाले 44% उत्तरदाताओं ने कहा कि वे भविष्य में अपने निवेश से मिलने वाले लाभ का इस्तेमाल घर खरीदने के लिए करना चाहते हैं.
न्यू लॉन्च प्रोजेक्ट्स का आकर्षण भी बढ़ा
बड़े घरों की बढ़ती मांग का असर नए प्रोजेक्ट्स पर भी दिखाई दे रहा है. H1 2026 में करीब 34% खरीदारों ने न्यू लॉन्च प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी, जबकि 18% की पसंद रेडी-टू-मूव-इन घर रहे. H1 2022 में यह अनुपात 25% न्यू लॉन्च और 30% रेडी-टू-मूव-इन का था.
नए प्रोजेक्ट को चुनते समय डेवलपर की साख सबसे महत्वपूर्ण कारक रही. 34% लोगों ने इसे प्राथमिकता दी, जबकि 21% खरीदारों के लिए शुरुआती कीमत में मिलने वाला फायदा, जैसे अर्ली-बर्ड प्राइसिंग या कम शुरुआती वित्तीय प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण रही.
कुल मिलाकर, होमबायर्स की बदलती पसंद से संकेत मिलता है कि भारतीय हाउसिंग मार्केट में अब केवल घर खरीदने की इच्छा ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि खरीदार यह भी तय कर रहे हैं कि उन्हें किस आकार, किस लोकेशन और किस स्तर की सुविधाओं वाला घर चाहिए. कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद बड़े और प्रीमियम घरों की मांग बनी हुई है. ऐसे में डेवलपर्स के सामने चुनौती केवल ज्यादा घर बनाने की नहीं, बल्कि खरीदारों की बढ़ती अपेक्षाओं के मुताबिक स्पेस, डिजाइन, सुविधाओं, लोकेशन और कीमत के बीच सही संतुलन बनाने की है.
यह वर्जन पुराने सर्वे को दोहराने के बजाय **डेवलपर्स की प्रतिक्रियाओं को नया संदर्भ** बनाता है, इसलिए 4-5 दिन पुरानी रिपोर्ट होने के बावजूद इसे फ्रेश रियल एस्टेट ट्रेंड स्टोरी की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
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