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“अगर बोर्ड बंटा हुआ है, तो सभी की ब्रांड वैल्यू घटती है”
रवि राजन एंड कंपनी के संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर और BSE के पूर्व चेयरमैन एस रवि ने BW Businessworld के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा के साथ इस बातचीत में उत्तराधिकारियों के मूल्यांकन, सार्वजनिक विवादों से कारोबार को बचाने और संपत्ति सृजन में कॉरपोरेट गवर्नेंस की अहमियत पर चर्चा की.
डॉ. अनुराग बत्रा 2 hours ago
रवि राजन एंड कंपनी के संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर और BSE के पूर्व चेयरमैन एस रवि ने BW Businessworld के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा के साथ बातचीत में पारिवारिक कारोबार में उत्तराधिकार की योजना, अगली पीढ़ी के नेतृत्व का आकलन और सार्वजनिक विवादों से कंपनी की प्रतिष्ठा को बचाने जैसे अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी. उन्होंने बताया कि कारोबार की दीर्घकालिक सफलता और संपत्ति सृजन के लिए मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस, स्पष्ट उत्तराधिकार योजना और बोर्ड की एकजुटता कितनी जरूरी है. प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:
अगली पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने से पहले प्रमोटर को किन बातों का आकलन करना चाहिए?
सबसे पहले अगली पीढ़ी के गुणों और क्षमताओं का आकलन करना चाहिए. दूसरा, उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को समझना चाहिए. तीसरा, यह देखना चाहिए कि वे मौजूदा कारोबारी मॉडल में किस तरह खुद को शामिल करेंगे. कोई व्यक्ति कारोबार में रुचि रखने वाला और भविष्य को लेकर दूरदर्शी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति में कारोबारी समझ या इसमें रुचि ही न हो. हर व्यक्ति अलग होता है.
परिवारों का विस्तार हुआ है और अब उनके पास स्थिर कारोबार, संपत्ति और पूंजी है. अगली पीढ़ी के विचार और कारोबारी मॉडल अलग हैं, लेकिन उसे अपने पूर्वजों की विरासत भी आगे बढ़ानी है. मैं देख रहा हूं कि परिवार उत्तराधिकार की योजना के अनुरूप अपने कारोबारी मॉडल में बदलाव कर रहे हैं.
अगर अगली पीढ़ी कारोबार चलाने के बजाय फैमिली ऑफिस को प्राथमिकता दे तो क्या होगा?
कुछ युवाओं ने देखा है कि पिछली पीढ़ी ने लाइसेंस, सरकार और सही कारोबारी माहौल तैयार करने के लिए कितनी मेहनत की. उन्हें लग सकता है कि परिवार के पास पर्याप्त संपत्ति और डिविडेंड से होने वाली आय है. ऐसे में पेशेवर लोगों को कारोबार संभालने दिया जाए और वे अपना फैमिली ऑफिस बनाएं. इसमें बिल्कुल कुछ गलत नहीं है. यह व्यक्तिगत पसंद है और हमें इसे स्वीकार करना चाहिए.
लेकिन जब तक आप पूरे समय निवेश के काम में नहीं लगे हैं, तब तक फैमिली ऑफिस में आपका केवल 20 या 30 फीसदी समय ही लग सकता है. युवा पीढ़ी को भी व्यस्त रहना होगा और ऐसा काम तलाशना होगा, जिसे करने में उसकी रुचि हो.
क्या उत्तराधिकार की योजना पर प्रमोटर परिवार से आगे भी पर्याप्त ध्यान दिया जाता है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि उत्तराधिकार केवल परिवार के भीतर होता है. लेकिन यह अगली पीढ़ी के अधिकारियों और बोर्ड के सदस्यों से भी जुड़ा है. बोर्ड में हर किसी का एक कार्यकाल होता है. ऐसे में अगली जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी? कुछ कंपनियां अगले 10 या 15 वर्षों के लिए बोर्ड में पदों की योजना बना रही हैं.
जब कोई संस्थान बहुत अधिक एक व्यक्ति पर केंद्रित हो जाता है, तो शेयरधारकों और प्रबंधन के बीच अंतर करना चुनौती बन जाता है. अच्छे लोग रिटायर होते हैं, लेकिन क्या आपने अपने अगले जनरल मैनेजर, वाइस प्रेसिडेंट या प्रेसिडेंट की योजना बनाई है? उत्तराधिकार की योजना स्वामित्व, बोर्ड और प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिकों (Key Managerial Personnel) के स्तर पर होनी चाहिए.
जब उत्तराधिकार को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो जाते हैं, तो क्या होता है?
अगर बोर्ड बंटा हुआ है और यह बात सार्वजनिक हो जाती है, तो सभी की ब्रांड वैल्यू घटती है. इसमें कोई विजेता नहीं होता. यह व्यक्ति और कंपनी, दोनों के लिए नुकसान है. हम अगली पीढ़ी के सामने कैसी मिसाल पेश कर रहे हैं?
पेशेवर लोगों ने कारोबार की वृद्धि में बहुत बड़ा योगदान दिया है, लेकिन वे कंपनी के संरक्षक भी हैं. ब्रांड की रक्षा करना सभी पेशेवरों का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है. स्वतंत्र निदेशकों और ट्रस्टियों की भूमिका कॉरपोरेट गवर्नेंस, नीतियों और भविष्य को लेकर होती है, लेकिन उन्हें स्वामित्व के अधिकारों में हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
हर व्यक्ति हर बात पर सहमत नहीं हो सकता. महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कारोबारों को सफलतापूर्वक अलग कैसे किया जा सकता है.
पारिवारिक कारोबार के बंटवारे में किस व्यावहारिक जटिलता पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है?
क्रॉस गारंटी एक बड़ी चुनौती है. मान लीजिए कोई समूह 30 या 40 वर्षों से अस्तित्व में है और उसकी कंपनियों ने एक-दूसरे के लिए गारंटी दी हुई है. जब कारोबार अलग होते हैं, तो इन गारंटी का समाधान कैसे किया जाएगा? इसके लिए आपको बैंकरों और नियामकों पर निर्भर रहना पड़ता है. बंटवारे के बाद भी मैं आपके कारोबार के लिए जिम्मेदार क्यों रहूं?
ऐसा मध्यम आकार के कारोबारों में भी होता है. वे बढ़ते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं, लेकिन पहले दी गई गारंटी जारी रहती है, क्योंकि उस समय कर्ज लिया गया था. हमें ऐसे स्पष्ट नियामकीय प्रावधानों की जरूरत है, जिनसे कारोबारों का हस्तांतरण और बंटवारा आसान हो सके.
भारत के आशाजनक उद्यमशीलता माहौल की राह में क्या बाधा बन सकता है?
हमने अच्छा काम किया है और कई अच्छी कंपनियां सामने आ रही हैं. हमें सकारात्मक उदाहरण दिखाई देते हैं, लेकिन असफलताएं भी हैं. प्रमुख शेयरधारकों के बीच अक्सर अच्छे समझौते नहीं होते. शेयरधारकों के समझौते कमजोर होते हैं. प्रमोटर्स और हितधारकों को एक साथ रहना चाहिए.
नई पीढ़ी की कंपनियों के लिए काफी संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें अधिक स्पष्ट कॉरपोरेट गवर्नेंस की जरूरत है. जिन लोगों का गवर्नेंस अच्छा होगा, उन्हें निवेश आसानी से मिलेगा. निवेशक फंड के दुरुपयोग या हेराफेरी नहीं चाहते. जब IPO के बाद प्रमोटर्स की दिलचस्पी कारोबार के बजाय निजी संपत्ति, घर और फ्लैट बनाने में अधिक हो जाती है, तो इससे निवेश का माहौल बेहतर नहीं होता.
आप अपनी कंपनी में उत्तराधिकार की योजना किस तरह बना रहे हैं?
इस पर काम चल रहा है. मेरा बेटा यहां है और मैंने उसे अपनी जगह बनाने की आजादी दी है. अकाउंटिंग के दायरे में टैक्स, ऑडिट, पारिवारिक समझौते, ट्रस्ट, वसीयत और फॉरेंसिक कार्य शामिल हैं. हर कोई सब कुछ नहीं कर सकता. किसी एक क्षेत्र को चुनना, उसमें विशेषज्ञता हासिल करना और आगे बढ़ना जरूरी है.
ग्राहक हमारे काम का पैमाना हैं. सेवा क्षेत्र के कारोबार में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी लोग होते हैं. इसमें आपका ज्ञान और उस दिन दी गई सलाह शामिल होती है. अगर सलाह गलत हो, तो इसकी कीमत चुकानी पड़ती है. चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म में उत्तराधिकार का मतलब भरोसा है. अगली पीढ़ी को ग्राहकों के साथ उस भरोसे को अगले स्तर तक ले जाना होगा.
डॉ. अनुराग बत्रा, BW रिपोर्टर्स
(डॉ. अनुराग बत्रा BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा exchange4media Group के संस्थापक हैं. पहली पीढ़ी के उद्यमी और मीडिया जगत की प्रमुख हस्ती होने के साथ-साथ वह एंजेल निवेशक, लेखक, टेलीविजन होस्ट और उद्यमियों एवं मीडिया पेशेवरों के मेंटर भी हैं. वह कई कॉरपोरेट और संस्थागत बोर्डों में सेवाएं दे रहे हैं और प्रबंधन शिक्षा से लंबे समय से जुड़े हैं.
MDI गुरुग्राम के पूर्व छात्र डॉ. बत्रा इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में रह चुके हैं और MDI एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे हैं. वह इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज के सदस्य भी हैं. उन्हें पढ़ने का शौक है और उनका मानना है कि जब जुनून ही पेशा बन जाता है, तो काम को एक गहरा उद्देश्य मिल जाता है.)
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