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भारतीय बॉन्ड बाजार में लौटी रौनक, एशिया में सबसे बेहतर प्रदर्शन; FIIs ने खरीदे ₹5,200 करोड़ के बॉन्ड
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने इस हफ्ते करीब 5,200 करोड़ रुपये के बॉन्ड की शुद्ध खरीदारी की है. यह जुलाई के बाद किसी एक हफ्ते में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में इस हफ्ते जोरदार तेजी देखने को मिली है. कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से भारतीय बॉन्ड को सहारा मिला है. इसका असर विदेशी निवेशकों की खरीदारी में भी दिखाई दिया. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने इस हफ्ते करीब 5,200 करोड़ रुपये के बॉन्ड की शुद्ध खरीदारी की है. यह जुलाई के बाद किसी एक हफ्ते में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है. इस प्रदर्शन के साथ भारतीय सरकारी बॉन्ड उभरते एशियाई बाजारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बॉन्ड बन गए हैं.
सरकारी बॉन्ड की यील्ड में 22 बेसिस पॉइंट की गिरावट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया, फिलीपींस, चीन, मलेशिमया और थाईलैंड जैसे बाजारों की तुलना में इस हफ्ते भारतीय बॉन्ड का प्रदर्शन बेहतर रहा. शुक्रवार, 6 नवंबर को सुबह 11:40 बजे भारत के बेंचमार्क 6.94 फीसदी वाले 2036 में मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.1973 फीसदी पर थी.
दिन के कारोबार के दौरान यील्ड में 2.5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन पूरे सप्ताह में इसमें करीब 22 बेसिस पॉइंट की गिरावट दर्ज की गई. अप्रैल के बाद यह बॉन्ड बाजार का सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन हो सकता है. गौरतलब है कि बॉन्ड की यील्ड में गिरावट का मतलब उसकी कीमतों में बढ़ोतरी होता है.
FIIs ने एक हफ्ते में खरीदे ₹5,200 करोड़ के बॉन्ड
भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है. इस हफ्ते FIIs ने करीब 5,200 करोड़ रुपये के बॉन्ड की शुद्ध खरीदारी की. जुलाई के बाद यह किसी एक सप्ताह में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है.
इसकी प्रमुख वजह अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आई गिरावट है. अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड इस हफ्ते करीब 10 बेसिस पॉइंट नीचे आई है. इससे भारतीय बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक हो गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार,रुपये की स्थिरता, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें भारतीय बॉन्ड बाजार के लिए अहम हैं. इन परिस्थितियों के कारण भारत वैश्विक बॉन्ड निवेशकों के रडार पर तेजी से आ रहा है.
कच्चे तेल की कीमतों में 15% की गिरावट से रुपये को सहारा
कच्चे तेल की कीमतों में इस हफ्ते करीब 15 फीसदी की गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद से तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. अप्रैल 2020 के बाद यह कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट बताई जा रही है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है. ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट से देश को कई मोर्चों पर राहत मिल सकती है. इससे आयात बिल और महंगाई का दबाव कम होने के साथ रुपये को भी मजबूती मिल सकती है.
इस सप्ताह रुपया करीब 1 फीसदी मजबूत होकर 94.10 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. वहीं, निफ्टी 50 भी सप्ताह के दौरान 6.7 फीसदी चढ़कर 24,612 के स्तर पर पहुंच गया. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावनाओं ने भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है. हालांकि, उनका मानना है कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आगे और गिरावट के लिए ईरान संकट का समाधान होना और कच्चे तेल की कीमतों का 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना जरूरी होगा.
RBI की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका घटी
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका भी कम हुई है. एक निजी बैंक के ट्रेडर के मुताबिक, पहले बाजार में RBI की ओर से कुल 125 बेसिस पॉइंट तक ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई जा रही थी. अब यह अनुमान घटकर 50 से 75 बेसिस पॉइंट रह गया है.
इसका असर ब्याज दरों से जुड़े ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (OIS) बाजार में भी देखने को मिला है. एक साल की OIS दर इस हफ्ते 32 बेसिस पॉइंट घटकर 6.40 फीसदी पर आ गई. वहीं, दो साल की दर 34 बेसिस पॉइंट गिरकर 6.40 फीसदी और पांच साल की दर 37 बेसिस पॉइंट घटकर 6.49 फीसदी रह गई. OIS दरों में आई गिरावट से संकेत मिलता है कि बाजार अब भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर पहले के मुकाबले कम आशंकित है.
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