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2030 तक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 220 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश की उम्मीद: प्रह्लाद जोशी
भारत ने अब तक 310 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित की है. 2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य हासिल करने के लिए 190 गीगावाट क्षमता और जोड़नी होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 2030 तक 220 अरब डॉलर की अनुमानित निवेश जरूरत से अधिक पूंजी आने की उम्मीद है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को यह भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का विस्तार तेजी से हो रहा है और इस क्षेत्र में घरेलू के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की भी दिलचस्पी बढ़ रही है.
भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी (BRE) समिट एंड एक्सपो 2026 से इतर बातचीत में जोशी ने बताया कि देश ने अब तक 310 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित कर ली है. सरकार ने 2030 तक इसे बढ़ाकर 500 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगले चार वर्षों में 190 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़नी होगी.
जोशी ने कहा कि सरकार को भरोसा है कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 220 अरब डॉलर की अनुमानित निवेश जरूरत से अधिक पूंजी जुटाई जा सकेगी. भारत का स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
दो साल में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आया 7 लाख करोड़ रुपये का निवेश
मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 7 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है. इसमें घरेलू निवेश के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी शामिल है. यह निवेश देश में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार और इस क्षेत्र में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.
जोशी ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ने की रफ्तार का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि देश को शुरुआती 100 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता स्थापित करने में 10 साल लगे थे. इसके बाद अगली 100 गीगावाट क्षमता जोड़ने में सात साल का समय लगा. वहीं, हाल की 100 गीगावाट क्षमता सिर्फ दो वर्षों में स्थापित की गई है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षमता विस्तार की यह रफ्तार आगे भी तेज बनी रहेगी और भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लेगा.
2030 के बाद 300 गीगावाट क्षमता जोड़ने की तैयारी
जोशी ने कहा कि सरकार 2030 के लक्ष्य से आगे की योजना पर भी काम कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के अनुरूप अतिरिक्त 300 गीगावाट क्षमता जोड़ने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी. इसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन को और बढ़ाना है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं से निपटने की तैयारी मजबूत कर रहा है. पहले आई चुनौतियों से मिले अनुभव के आधार पर सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रही है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के दौरान आपूर्ति में रुकावटों का असर कम किया जा सके.
वैश्विक निवेशकों की भागीदारी बढ़ने का दावा
BRE समिट एंड एक्सपो 2026 में नीति निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं. जोशी के मुताबिक, पहली बार नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े तीन अहम आयोजनों को एक साथ आयोजित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि इस आयोजन में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की मौजूदगी भारत के स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और ऊर्जा बदलाव में उसकी भूमिका को लेकर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दिखाती है.
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