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धनतेरस से पहले बाजार में तेजी, सेंसेक्स उछला; निवेशकों की संपत्ति में ₹8 लाख करोड़ बढ़े
BSE का मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार, निफ्टी भी 24,500 के ऊपर बंद; कच्चे तेल में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 day ago
धनतेरस से पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. गुरुवार, 5 नवंबर को घरेलू शेयर बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल दर्ज किया गया. सेंसेक्स 2,008.61 अंक यानी 2.60 फीसदी की बढ़त के साथ 79,310.01 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 फीसदी चढ़कर 24,536.60 के स्तर पर पहुंच गया. इस तेजी के साथ निफ्टी ने 7 अगस्त के बाद पहली बार 24,500 के ऊपर क्लोजिंग दी. बाजार में आई तेजी से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और यह पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया.
शेयर बाजार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई. नवंबर 2025 के बाद यह बाजार की सबसे लंबी लगातार तेजी वाली अवधि है. इस दौरान निवेशकों का भरोसा मजबूत होने के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण रहे. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी, अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी और भारतीय रुपये में मजबूती ने बाजार को सहारा दिया. खास बात यह रही कि गुरुवार को तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऑटो, बैंकिंग, रियल एस्टेट और आईटी जैसे कई सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली.
BSE का मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में तेजी का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर दिखाई दिया. बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया. पिछले कारोबारी सत्र में बाजार बंद होने के समय यह करीब 493.44 लाख करोड़ रुपये था. गुरुवार की तेजी के बाद इसमें लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इस तरह भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर 5 लाख करोड़ डॉलर के बाजार पूंजीकरण का स्तर हासिल कर लिया. बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ा इजाफा किया. हालांकि, मार्केट कैप में बढ़ोतरी को निवेशकों का वास्तविक मुनाफा नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि यह सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बदलाव को दर्शाता है.
ऑटो और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी
गुरुवार को बाजार में तेजी का नेतृत्व ऑटो और बैंकिंग सेक्टर ने किया. सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 4.14 फीसदी उछलकर सबसे आगे रहा. वहीं, निफ्टी बैंक में 3.33 फीसदी, रियल्टी, सरकारी बैंक और निजी बैंक इंडेक्स में करीब 3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर के शेयर भी 2 फीसदी से ज्यादा चढ़े.
निफ्टी 50 में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे. दूसरी ओर, अपोलो हॉस्पिटल्स, ओएनजीसी, एनटीपीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट रही.
हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी रही, लेकिन इनका प्रदर्शन बड़े शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.8 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी चढ़कर बंद हुआ. इस बीच 120 से ज्यादा शेयरों ने अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ.
विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मिला सहारा
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने भी तेजी को मजबूती दी है. विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को करीब 7,284 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी. यह अक्टूबर 2025 के बाद भारत में विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी एकदिवसीय खरीदारी में से एक रही. इसके साथ ही नवंबर में विदेशी निवेशकों का कुल निवेश करीब 1.57 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
विदेशी निवेशकों की वापसी को घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. लंबे समय तक बिकवाली के बाद उनकी खरीदारी से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है. हालांकि, आने वाले सत्रों में इस खरीदारी का जारी रहना बाजार की तेजी के लिए अहम होगा.
ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के नीचे, चार दिन से जारी है गिरावट
भारतीय शेयर बाजार को मजबूती देने वाले सबसे बड़े कारकों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट शामिल रही. ब्रेंट क्रूड की कीमतें पिछले कारोबारी सत्र में करीब 8.7 फीसदी टूटकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थीं. गुरुवार को भी इसमें गिरावट जारी रही और कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं. वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई (WTI) का भाव 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब रहा.
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है और डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत हुई है. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला.
रुपये में भी मजबूती, दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बंद
शेयर बाजार के साथ भारतीय मुद्रा के मोर्चे पर भी राहत देखने को मिली. गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 94.47 पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.64 प्रति डॉलर पर था. Reuters के मुताबिक, रुपया करीब दो सप्ताह के सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गया.
रुपये में मजबूती के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी को अहम कारण माना जा रहा है. तेल की कीमतें कम होने से भारत का आयात बिल घटने की उम्मीद बढ़ती है, जबकि विदेशी पूंजी के प्रवाह से डॉलर की उपलब्धता को भी सहारा मिलता है.
अमेरिकी बाजारों की तेजी और वैश्विक संकेतों ने बढ़ाया भरोसा
भारतीय बाजार को वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले. बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 3 फीसदी चढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.91 फीसदी की बढ़त रही.
इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ा. इन सभी कारकों का असर भारतीय बाजार पर दिखाई दिया. हालांकि, बाजार की मौजूदा तेजी कितनी टिकाऊ रहती है, यह आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
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