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अडानी पोर्ट्स का यूरोप में बड़ा दांव, €2.56 अरब में Evos का अधिग्रहण करेगी कंपनी
नीदरलैंड की कंपनी Evos में 100% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी APSEZ, यूरोप के 5 देशों में 8 पोर्ट टर्मिनल मिलेंगे; सौदे से कंपनी की वैश्विक मौजूदगी 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनल तक पहुंचेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अडानी समूह (Adani) की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने जा रही है. कंपनी ने यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर Evos B.V. में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौता किया है. यह सौदा 2.56 अरब यूरो (करीब 2.56 बिलियन यूरो) के एंटरप्राइज वैल्यू पर ऑल-कैश आधार पर होगा. नीदरलैंड मुख्यालय वाली Evos को खरीदने के बाद APSEZ को यूरोप के पांच देशों में मौजूद आठ पोर्ट टर्मिनल का कारोबार मिलेगा. इस अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक मौजूदगी बढ़कर 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनल तक पहुंच जाएगी.
कंपनी की ओर से 5 नवंबर 2026 को जारी बयान के मुताबिक, Evos की इक्विटी वैल्यू 1.18 अरब यूरो आंकी गई है. यह सौदा वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के आधार पर 11.7 गुना EV/EBITDA मल्टीपल पर किया जा रहा है. Evos ने कैलेंडर वर्ष 2025 में 39.2 करोड़ यूरो का राजस्व और 21.9 करोड़ यूरो का EBITDA दर्ज किया था. कंपनी का EBITDA मार्जिन 56 फीसदी रहा. प्रस्तावित अधिग्रहण नियामकीय मंजूरियों और वर्क्स काउंसिल से परामर्श की प्रक्रिया पूरी होने के अधीन है.
यूरोप के 5 देशों में मिलेगा 8 पोर्ट टर्मिनल का नेटवर्क
Evos के पास कुल 63 लाख क्यूबिक मीटर की लिक्विड स्टोरेज क्षमता है. कंपनी नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा में आठ बंदरगाह आधारित टर्मिनल संचालित करती है. इसके टर्मिनल यूरोप के प्रमुख ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों में स्थित हैं. इनमें एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प (ARA) क्षेत्र, हैम्बर्ग और भूमध्यसागरीय क्षेत्र शामिल हैं.
कंपनी के नेटवर्क में 452 स्टोरेज टैंक और जहाजों व बार्ज के लिए 63 बर्थ शामिल हैं. इसके अलावा कई एकीकृत पाइपलाइन कनेक्टिविटी भी हैं, जिनमें एम्स्टर्डम शिफोल एयरपोर्ट और सेंट्रल यूरोप पाइपलाइन सिस्टम से जुड़ाव शामिल है. Evos ने कैलेंडर वर्ष 2025 में 37 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो का संचालन किया था.
99% कमर्शियल ऑक्यूपेंसी, 56% EBITDA मार्जिन
Evos का कारोबार पारंपरिक ईंधन के साथ ऊर्जा संक्रमण से जुड़े नए ईंधनों के भंडारण और संचालन तक फैला हुआ है. इसके उत्पादों में पेट्रोल, गैस ऑयल, समुद्री ईंधन और जेट फ्यूल शामिल हैं. इसके अलावा कंपनी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), बायोफ्यूल, मेथनॉल और बायोएथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों के कारोबार में भी मौजूद है.
कंपनी का औसत कमर्शियल ऑक्यूपेंसी स्तर 99 फीसदी है. इसके राजस्व का एक बड़ा हिस्सा टेक-ऑर-पे (Take-or-Pay) अनुबंधों और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट के तहत आता है. इस तरह कंपनी को अपेक्षाकृत स्थिर राजस्व और नकदी प्रवाह मिलता है. Evos के ग्राहक आधार में वैश्विक ऊर्जा कंपनियां, प्रमुख औद्योगिक और केमिकल कंपनियां तथा कमोडिटी ट्रेडर्स शामिल हैं.
अडानी पोर्ट्स के कारोबार को मिलेगा विस्तार
APSEZ के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने कहा कि Evos का अधिग्रहण कंपनी की वैश्विक एकीकृत परिवहन प्लेटफॉर्म बनाने की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे कंपनी को दुनिया के प्रमुख लिक्विड स्टोरेज और ऊर्जा केंद्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का मौका मिलेगा. उन्होंने कहा कि कंपनी यूरोप के ऊर्जा बदलाव में भागीदारी करने और दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने की दिशा में काम करेगी.
कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण से उसके लिक्विड कारोबार का विस्तार होगा और भौगोलिक स्तर पर विविधता बढ़ेगी. इसके अलावा यूरोप में नए ऊर्जा ईंधनों की ओर बढ़ते बदलाव से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी. Evos का 56 फीसदी EBITDA मार्जिन APSEZ के अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार के वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही के 44.8 फीसदी मार्जिन से अधिक है. इससे संयुक्त कारोबार के मार्जिन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
कर्ज के जरिए होगा सौदे का वित्तपोषण, FY27 तक घटेगा डेट रेशियो
इस अधिग्रहण के लिए APSEZ कर्ज के जरिए फंडिंग करेगी. कंपनी के मुताबिक, APSEZ और Evos के वित्तीय आंकड़ों के आधार पर संयुक्त इकाई का प्रो-फॉर्मा नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 2.76 गुना रहेगा. वित्त वर्ष 2027 तक इसके करीब 2.5 गुना होने का अनुमान है.
प्रस्तावित सौदे के लिए MUFG ने एकमात्र अंडरराइटर के रूप में 2.8 अरब यूरो तक की फाइनेंसिंग प्रतिबद्धता दी है. APSEZ के लिए Linklaters और Cyril Amarchand Mangaldas ने क्रमशः अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनी सलाहकार के रूप में काम किया है.
अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार में भी बढ़ी कंपनी की गतिविधियां
APSEZ के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 को समाप्त वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही तक कंपनी के पास 12,502 करोड़ रुपये का नकद बैलेंस था. अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में 3,586 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व और 1,608 करोड़ रुपये का EBITDA दर्ज किया. इस दौरान EBITDA मार्जिन भी रिकॉर्ड 44.8 फीसदी रहा.
अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार का वॉल्यूम वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के 17 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में 47 मिलियन मीट्रिक टन हो गया. इसमें कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल, तंजानिया के परिचालन और ऑस्ट्रेलिया के NQXT कारोबार का योगदान रहा.
भारत में 27% पोर्ट कार्गो वॉल्यूम संभालती है APSEZ
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन अडानी समूह का हिस्सा है. कंपनी भारत के पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तट पर 16 बंदरगाह और टर्मिनल संचालित करती है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कोलंबो, इजरायल और तंजानिया में चार अंतरराष्ट्रीय पोर्ट भी हैं.
कंपनी की मौजूदा कार्गो हैंडलिंग क्षमता 671 मिलियन टन सालाना है और भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 तक अपने कार्गो थ्रूपुट को बढ़ाकर 1 अरब टन करने का लक्ष्य रखा है. Evos का अधिग्रहण इसी वैश्विक विस्तार रणनीति का हिस्सा है.
टैग्स €2.56 billion Deal