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2030 तक भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 530 GW पहुंचने का अनुमान, सौर ऊर्जा की होगी 80% से ज्यादा हिस्सेदारी: IEA
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 2030 तक बढ़कर करीब 530 गीगावॉट हो सकती है. इस विस्तार में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 80 फीसदी से अधिक रहने का अनुमान है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 21 minutes ago
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में तेजी से विस्तार होने की उम्मीद है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार, देश की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 2030 तक करीब 530 गीगावॉट (GW) तक पहुंच सकती है. इस बढ़ोतरी में सौर ऊर्जा सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी. इसके साथ ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी ग्रोथ मार्केट बन सकता है.
IEA की 'इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट रिपोर्ट 2026' के मुताबिक, 2026 की चौथी तिमाही में भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 300 GW के पार पहुंच गई. पिछले एक दशक में इसमें करीब चार गुना बढ़ोतरी हुई है. यह देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते योगदान को दर्शाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की सोलर फोटोवोल्टिक (PV) क्षमता 350 GW से अधिक हो सकती है, जबकि पवन ऊर्जा की क्षमता करीब 90 GW तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं, बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के शुरू होने और पंप्ड स्टोरेज में निवेश बढ़ने से जलविद्युत क्षमता 75 GW तक पहुंच सकती है.
इस विस्तार के साथ भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ेगा. देश ने 2025 में ही अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 फीसदी गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर लिया था. यह तय समयसीमा से पांच साल पहले की उपलब्धि थी.
IEA का अनुमान है कि 2030 तक हर साल 50 GW से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी जाएगी. 2025 में यह बढ़ोतरी 49 GW रही थी. वहीं, तेजी से विकास वाले परिदृश्य में दशक के अंत तक सालाना नई क्षमता बढ़कर 70 GW तक पहुंच सकती है.
बिजली उत्पादन में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ेगी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रिन्यूएबल एनर्जी से बिजली उत्पादन 2025 के करीब 500 टेरावॉट-घंटे (TWh) से बढ़कर 2030 तक लगभग 950 TWh हो सकता है. इसके परिणामस्वरूप देश के कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 2025 के करीब 25 फीसदी से बढ़कर 2030 तक 35 फीसदी पहुंचने का अनुमान है.
इसमें सौर ऊर्जा सबसे बड़ा योगदान देगी. दशक के अंत तक रिन्यूएबल एनर्जी से होने वाले कुल बिजली उत्पादन में सोलर PV की हिस्सेदारी आधे से अधिक हो सकती है. 2025 से 2030 के बीच सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन तीन गुना होने का अनुमान है. वहीं, पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है.
IEA ने इस वृद्धि के पीछे प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया, अनुकूल नीतिगत ढांचे और तकनीकी लागत में कमी को प्रमुख कारण बताया है. इसके अलावा, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की ओर से नवीकरणीय बिजली की बढ़ती मांग भी इस क्षेत्र में नई क्षमता जोड़ने में मदद करेगी.
इंफ्रास्ट्रक्चर और परियोजनाओं में देरी बनी चुनौती
रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की संभावनाओं के बावजूद IEA ने बुनियादी ढांचे और परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी कई चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है. एजेंसी के मुताबिक, बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को संभालने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार, एनर्जी स्टोरेज की क्षमता बढ़ाना और बिजली व्यवस्था में लचीलापन लाना जरूरी होगा.
इसके अलावा, जमीन अधिग्रहण से जुड़ी समस्याएं, परियोजनाओं को पूरा करने में देरी और बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की कमजोर वित्तीय स्थिति भी इस क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बाधाओं को दूर करने से 2026 से 2030 के दौरान रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करने की रफ्तार 20 फीसदी से अधिक बढ़ सकती है. इससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा विस्तार को और मजबूती मिलेगी.
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