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सरकार ने चावल बिक्री का लक्ष्य दोगुना किया, OMSS के तहत अब 50 लाख टन बेचेगी
सरकार 31 अक्टूबर तक ई-नीलामी के जरिए 25 लाख टन चावल बेच चुकी है. इसके साथ ही चावल और धान के स्टॉक की साप्ताहिक जानकारी देना भी अनिवार्य कर दिया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 12 minutes ago
केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चावल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) यानी OMSS (D) के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चावल बिक्री का लक्ष्य दोगुना कर दिया है. अब इस योजना के तहत 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) के बजाय 50 लाख मीट्रिक टन चावल बेचा जाएगा.
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक, सरकार 31 अक्टूबर 2026 तक निजी कारोबारियों को ई-नीलामी के माध्यम से 25 लाख मीट्रिक टन चावल बेच चुकी है. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह बिक्री 11 लाख मीट्रिक टन रही थी.
सरकार का कहना है कि खाद्यान्न, विशेष रूप से चावल की कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है. जमाखोरी रोकने, बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कई नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं.
चावल और धान के स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य
सरकार ने देशभर में चावल और धान का भंडारण करने वाली सभी संबंधित इकाइयों के लिए स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है. 6 नवंबर 2026 को जारी आदेश के तहत व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा कारोबारियों, बड़ी रिटेल चेन और प्रोसेसर या मिलर्स को अपने स्टॉक का ब्योरा देना होगा.
इसके तहत छह श्रेणियों में स्टॉक की जानकारी देनी होगी. इनमें बासमती चावल, नॉन-बासमती प्रीमियम चावल, नॉन-बासमती चावल, उसना चावल, टूटे चावल और धान शामिल हैं. सभी संबंधित कारोबारियों और संस्थाओं को सरकार के फूड स्टॉक पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा. इसके अलावा प्रत्येक शुक्रवार को अपने स्टॉक की जानकारी अपडेट करनी होगी.
सरकार ने चेतावनी दी है कि पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराने या निर्धारित स्टॉक सीमा का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
पांच दक्षिणी राज्यों को स्टॉक लिमिट लगाने की मंजूरी
केंद्र सरकार ने पांच दक्षिणी राज्यों को चावल और धान पर स्टॉक लिमिट लगाने की सहमति भी दे दी है. इनमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं. इन राज्यों को जरूरत के अनुसार उचित नियंत्रण आदेश जारी करके स्टॉक की सीमा तय करने की अनुमति दी गई है. ये प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगे. इस कदम का उद्देश्य खासतौर पर दक्षिण भारत में उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर पर्याप्त मात्रा में चावल उपलब्ध कराना है. केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें मिलकर इन प्रतिबंधों के क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके.
भारत राइस की अतिरिक्त खेप भी बाजार में उतरेगी
बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार भारत राइस (Bharat Rice) का अतिरिक्त आवंटन भी कर रही है. इसके लिए तीन एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है. इनमें नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED), नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) और केंद्रीय भंडार शामिल हैं.
इन एजेंसियों को भारत राइस के वितरण के लिए अतिरिक्त माध्यम तलाशने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खासतौर पर दक्षिणी राज्यों में इसकी पहुंच बढ़ाई जा सके.
सरकार को उम्मीद है कि अतिरिक्त आवंटन से बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ेगी, उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर चावल उपलब्ध होगा और खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी.
चावल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार की पहल
सरकार के ये कदम घरेलू बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को स्थिर रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं. इसके तहत खुले बाजार में बिक्री बढ़ाने, स्टॉक की निगरानी सख्त करने और रियायती दरों पर मिलने वाले भारत राइस का वितरण बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
सरकार का मानना है कि OMSS (D) के तहत बिक्री का लक्ष्य दोगुना करने और स्टॉक की साप्ताहिक जानकारी अनिवार्य करने से चावल की आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी. साथ ही, घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चावल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
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