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म्यूचुअल फंड और PMS के बीच नया विकल्प बनेगा SIF? JioBlackRock ने समझाया पूरा मॉडल
JioBlackRock की चीफ क्लाइंट ऑफिसर कोमल नारंग ने BW हिंदी से की खास बातचीत में कंपनी की निवेश रणनीति, AI और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, भारतीय निवेशकों की बदलती जरूरतों और मौजूदा वैश्विक हालात में निवेश के सही तरीके पर विस्तार से अपनी बात रखी.
रितु राणा 1 hour ago
राजधानी दिल्ली में आयोजित JioBlackRock और SIF 360 के संयुक्त इवेंट ‘Partner Prive’ में निवेश के बदलते स्वरूप और नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस यह था कि किस तरह Specialized Investment Funds यानी SIFs, म्यूचुअल फंड, PMS और AIF जैसे निवेश विकल्पों के बीच अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. इस दौरान BW हिंदी ने JioBlackRock की चीफ क्लाइंट ऑफिसर कोमल नारंग से खास बातचीत की. इंटरव्यू में उन्होंने कंपनी की निवेश रणनीति, AI और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, भारतीय निवेशकों की बदलती जरूरतों और मौजूदा वैश्विक हालात में निवेश के सही तरीके पर विस्तार से अपनी बात रखी. प्रस्तुत हैं कोमल नारंग के साथ बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:
सवाल: भारत में निवेशकों की बदलती जरूरतों को देखते हुए JioBlackRock क्या नया कर रहा है?
कोमल नारंग: हमारी कोशिश सिर्फ नए फंड लॉन्च करने की नहीं होती, बल्कि हर फंड के पीछे एक स्पष्ट उद्देश्य और वैल्यू प्रपोजिशन होता है. हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि निवेशकों के पोर्टफोलियो में कौन-सी जरूरत अभी पूरी नहीं हो रही है और हम उसे किस तरह बेहतर तरीके से पूरा कर सकते हैं.
आज भारतीय निवेशक पहले के मुकाबले ज्यादा जागरूक हो चुके हैं. वे सिर्फ पारंपरिक रिटर्न नहीं, बल्कि रिस्क मैनेजमेंट, स्थिरता और लंबे समय की वैल्यू चाहते हैं. इसी सोच के साथ हमने अपने एक्टिव इक्विटी फंड्स में “सिस्टेमैटिक एक्टिव इक्विटी” जैसी निवेश रणनीति अपनाई है. पारंपरिक फंड्स जहां कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर रिसर्च आधारित पोर्टफोलियो बनाते हैं, वहीं हमारा मॉडल ज्यादा रिस्क-अवेयर और डेटा-ड्रिवन है.
हम चाहते हैं कि हमारे फंड बाकी फंड्स की कॉपी न बनें, बल्कि निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक अलग भूमिका निभाएं. अगर बाजार में गिरावट आती है, तो हर फंड एक जैसा व्यवहार न करे. यही JioBlackRock की सबसे बड़ी सोच और अलग पहचान है.
सवाल: SIF को आप पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स और PMS से कितना अलग मानते हैं?
कोमल नारंग: SIF को आप म्यूचुअल फंड और PMS के बीच का एक आधुनिक निवेश मॉडल कह सकते हैं. पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स काफी स्केलेबल और आसान होते हैं, लेकिन उनमें कई एडवांस रणनीतियों का इस्तेमाल सीमित रहता है. उदाहरण के लिए, डेरिवेटिव्स, कॉल ऑप्शंस या कुछ खास हेजिंग स्ट्रेटेजीज का उपयोग वहां सीमित रूप में ही किया जा सकता है.
दूसरी तरफ PMS और AIF में निवेशकों को ज्यादा लचीलापन मिलता है और एडवांस रणनीतियां इस्तेमाल की जा सकती हैं, लेकिन उनकी एंट्री टिकट साइज बहुत बड़ी होती है. कई बार 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का निवेश जरूरी होता है. इसके अलावा उनकी टैक्सेशन संरचना भी आम निवेशकों के लिए जटिल हो सकती है.
SIF इन दोनों के बीच एक संतुलन बनाता है. इसमें निवेशकों को एडवांस निवेश रणनीतियों का फायदा मिलता है, लेकिन साथ ही यह ज्यादा सुलभ और व्यवस्थित भी है. हमें लगता है कि आने वाले समय में यह कैटेगरी तेजी से लोकप्रिय होगी क्योंकि यह निवेशकों को बेहतर विविधीकरण और रिस्क मैनेजमेंट का विकल्प देती है.
सवाल: JioBlackRock के नए SIF प्रोडक्ट की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
कोमल नारंग: हमारा नया SIF प्रोडक्ट “अनकॉरिलेटेड रिटर्न” की सोच के साथ डिजाइन किया गया है. आमतौर पर देखा जाता है कि अगर इक्विटी मार्केट 10% गिरता है, तो अधिकांश फंड्स भी उसी दिशा में प्रभावित होते हैं. लेकिन हमारा उद्देश्य ऐसा प्रोडक्ट देना है जो हर समय बाजार की दिशा पर पूरी तरह निर्भर न रहे.
हम इसे 9% से 11% के एब्सोल्यूट रिटर्न माइंडसेट के साथ लॉन्च कर रहे हैं. खास बात यह है कि अगर इस तरह के प्रोडक्ट को इक्विटी टैक्सेशन का लाभ मिलता है, तो यह निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक विकल्प बन सकता है.
दरअसल, फिक्स्ड इनकम और डेट प्रोडक्ट्स में टैक्सेशन बदलाव के बाद निवेशकों के पास एक संतुलित विकल्प की कमी महसूस की जा रही थी. ऐसे में यह SIF प्रोडक्ट उस खाली जगह को भरने की क्षमता रखता है. यह उन निवेशकों के लिए खास हो सकता है जो न तो बहुत ज्यादा जोखिम लेना चाहते हैं और न ही सिर्फ पारंपरिक डेट प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहना चाहते हैं.
सवाल: 3. क्या आपको लगता है कि आने वाले वर्षों में SIF भारत के हाई नेटवर्थ और रिटेल निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय होंगे?
कोमल नारंग: मुझे लगता है कि SIF भारत के निवेश बाजार में एक बड़ा बदलाव ला सकता है. हाई नेटवर्थ निवेशकों के पास पहले से कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन 25 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक के पोर्टफोलियो वाले निवेशकों के लिए यह एक बहुत मजबूत कैटेगरी बन सकती है.
अभी यह सेगमेंट शुरुआती दौर में है और लगभग 12,000 करोड़ रुपये का AUM है, लेकिन जिस तरह निवेशकों की सोच बदल रही है और वे बेहतर विविधीकरण चाहते हैं, उसे देखते हुए हमें उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में यह आंकड़ा 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
भारत में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के कारण निवेश अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. ऐसे में SIF जैसी कैटेगरी को बड़ा अवसर मिल सकता है.
सवाल: 4. भारतीय निवेश बाजार में टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती जा रही है, और JioBlackRock इस दिशा में क्या नया कर रहा है?
कोमल नारंग: JioBlackRock की सबसे बड़ी ताकत BlackRock का “Aladdin” प्लेटफॉर्म है. बहुत लोग इसका नाम सुनकर इसे किसी जादुई टेक्नोलॉजी की तरह समझते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक अत्याधुनिक रिस्क मैनेजमेंट, निवेश प्रबंधन और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सिस्टम है.
BlackRock दुनिया भर में लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर के एसेट्स को इसी प्लेटफॉर्म के जरिए मैनेज करता है. इतना ही नहीं, बाहरी संस्थागत क्लाइंट्स के भी करीब 16 ट्रिलियन डॉलर के एसेट्स इसी टेक्नोलॉजी पर आधारित सिस्टम से संचालित होते हैं.
इस प्लेटफॉर्म में AI का इंटीग्रेशन भी है. AI की मदद से हम सिर्फ पारंपरिक वित्तीय डेटा ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक डेटा का भी विश्लेषण कर सकते हैं. इससे निवेश निर्णय ज्यादा सटीक और तेज बनते हैं. आने वाले समय में AI निवेश उद्योग का बहुत बड़ा हिस्सा बनने वाला है और JioBlackRock इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.
सवाल: 5. मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निवेशकों को किस तरह की निवेश रणनीति अपनानी चाहिए?
कोमल नारंग: इस समय दुनिया में काफी अनिश्चितता का माहौल है. वैश्विक संघर्ष, सप्लाई चेन में रुकावट, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई जैसे कई फैक्टर्स बाजार को प्रभावित कर रहे हैं. अभी इसका पूरा असर आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है, लेकिन आने वाले समय में इसका प्रभाव और स्पष्ट दिख सकता है.
ऐसे माहौल में निवेशकों को बहुत संतुलित और अनुशासित तरीके से निवेश करना चाहिए. हमारा सुझाव है कि लोग अपना निवेश एक साथ बाजार में लगाने के बजाय STP यानी Systematic Transfer Plan के जरिए 3 से 9 महीनों में धीरे-धीरे निवेश करें.
अगर कोई निवेशक ज्यादा जोखिम लेने को तैयार है, तो वह तीन महीनों में निवेश फैला सकता है. वहीं, जो निवेशक थोड़ा संतुलित दृष्टिकोण रखते हैं, वे छह से नौ महीने का समय ले सकते हैं. थोड़ा शुरुआती रिटर्न छूट जाना ठीक है, लेकिन अनिश्चित माहौल में एक ही समय पर पूरा निवेश करना जोखिम बढ़ा सकता है.
सवाल: 5. मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निवेशकों को किस तरह की निवेश रणनीति अपनानी चाहिए?
कोमल नारंग: यह JioBlackRock का नॉर्थ इंडिया में एक महत्वपूर्ण डिस्ट्रीब्यूशन लॉन्च इवेंट है. अब तक हमारी 6 से 9 महीनों की यात्रा मुख्य रूप से डिजिटल और डायरेक्ट मॉडल पर केंद्रित रही है, जहां हम अपने प्रोडक्ट्स सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रहे थे.
अब हम अपने रेगुलर प्लान्स को डिस्ट्रीब्यूटर्स और पार्टनर्स के जरिए भी उपलब्ध कराने जा रहे हैं. इसी उद्देश्य से हमने इस इवेंट का आयोजन किया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा फाइनेंशियल पार्टनर्स हमारे साथ जुड़ें.
इस कार्यक्रम का दूसरा बड़ा उद्देश्य फाइनेंशियल एजुकेशन और एक्सेस बढ़ाना है. जब निवेशकों तक सही जानकारी और सही प्लेटफॉर्म पहुंचता है, तभी फाइनेंशियल सेक्टर का वास्तविक विस्तार होता है. यहां मौजूद हर पार्टनर हजारों निवेशकों तक इस जानकारी और अवसर को पहुंचा सकता है.
सवाल: तेजी से बढ़ते निवेश के दौर में आज निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए?
कोमल नारंग: आज भी कई निवेशक सिर्फ शॉर्ट टर्म रिटर्न देखकर निवेश का फैसला लेते हैं. सोशल मीडिया, तेजी से बदलते ट्रेंड्स और जल्दी मुनाफा कमाने की मानसिकता के कारण लोग बिना सही एसेट एलोकेशन के निवेश कर देते हैं. यह सबसे बड़ी गलती है.
निवेश हमेशा व्यक्ति के लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समय अवधि के हिसाब से होना चाहिए. अगर कोई निवेशक सिर्फ बाजार की तेजी देखकर निवेश करता है, तो गिरावट आने पर घबरा भी जल्दी जाता है. इसलिए सबसे जरूरी है कि निवेशक अनुशासन बनाए रखें और अपने पोर्टफोलियो में विविधता रखें.
हमारा मानना है कि आने वाले समय में सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि रिस्क मैनेजमेंट और पोर्टफोलियो बैलेंसिंग ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाले हैं. इसी वजह से हम ऐसे प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रहे हैं, जो निवेशकों को अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में स्थिरता दे सकें.
सवाल: नए और युवा निवेशकों के लिए आपका सबसे बड़ा संदेश क्या होगा?
कोमल नारंग: भारत में युवा निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और यह भारतीय फाइनेंशियल सेक्टर के लिए बहुत सकारात्मक संकेत है. लेकिन नए निवेशकों को शुरुआत में ही यह समझना होगा कि निवेश कोई शॉर्टकट नहीं, बल्कि लंबी अवधि की प्रक्रिया है.
आज टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने निवेश को बेहद आसान बना दिया है. मोबाइल फोन से कुछ मिनटों में निवेश शुरू किया जा सकता है, लेकिन आसान एक्सेस के साथ सही जानकारी और वित्तीय समझ भी जरूरी है.
मैं हमेशा युवा निवेशकों को यही सलाह देती हूं कि वे जल्दी शुरुआत करें, नियमित निवेश करें और बाजार के हर उतार-चढ़ाव पर भावनात्मक फैसले लेने से बचें. अगर निवेशक धैर्य और अनुशासन बनाए रखते हैं, तो लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा उन्हें मजबूत वित्तीय सुरक्षा दे सकता है.
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