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रेड चीफ का डिजिटल शिफ्ट: टियर-2 और टियर-3 बाजारों में बढ़े कदम, महिलाओं और सस्टेनेबिलिटी पर जोर

रेड चीफ के हेड ऑफ मार्केटिंग राहुल शर्मा का कहना है, रेड चीफ की रणनीति साफ है, डिजिटल की ओर मजबूत कदम, टियर-2 और टियर-3 बाजारों पर फोकस, और बदलती उपभोक्ता जरूरतों के अनुसार ब्रांड का विस्तार.

रितु राणा 2 months ago

डिजिटल मार्केटिंग के इस तेजी से बदलते दौर में पारंपरिक ब्रांड्स भी अपनी रणनीतियों को नए सिरे से गढ़ रहे हैं. ऐसे ही बदलाव के दौर से गुजर रहा है रेड चीफ, कंपनी ने गुरुवार को  अभिनेता आयुष्मान खुराना को अपना नया ब्रांड एंबेसडर बनाने के साथ ‘नो शॉर्टकट्स’ की नई ब्रांड फिलॉसफी पेश की है. इस मौके पर BW हिंदी ने रेड चीफ के हेड ऑफ मार्केटिंग राहुल शर्मा से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने डिजिटल शिफ्ट, टियर-2 और टियर-3 मार्केट पर फोकस और ब्रांड के भविष्य को लेकर खुलकर अपनी रणनीति साझा की. प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:

रेड चीफ ने अपने मीडिया बजट में बड़े बदलाव किए हैं. इस बदलाव के पीछे आपकी रणनीति क्या रही?
राहुल शर्मा:  हमने यह बदलाव जानबूझकर और धीरे-धीरे किया है. पहले प्रिंट और टीवी पर हमारा खर्च 40-50% था, जिसे हमने घटाकर 20% कर दिया है. इस साल 60% बजट डिजिटल पर जाएगा. 10% केवल प्रिंट में, टीवी पर 10%, आउटडोर पर 10% और एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग में भी 10% निवेश किया जाएगा. यह कोई साहसिक रणनीति नहीं थी, बल्कि समय की जरूरत थी. लोग अब पारंपरिक मीडिया पर उतना समय नहीं दे रहे हैं, और बजट भी उसी दिशा में गया. आज कंटेंट ही सबसे अहम है. जितनी बेहतर स्टोरीटेलिंग होगी, ब्रांड उतना ही उपभोक्ताओं के दिमाग में रहेगा.

ई-कॉमर्स में रेड चीफ की रणनीति क्या है?

राहुल शर्मा: ई-कॉमर्स हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है. हमारे करीब 80-85% बिजनेस का हिस्सा परफॉर्मेंस मार्केटिंग से आता है. हम Amazon, Flipkart, Myntra, Ajio जैसे सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद हैं. हमारा मानना है कि जहां पहले से करोड़ों यूजर्स आते हैं, वहीं अपनी विजिबिलिटी बढ़ाना ज्यादा समझदारी है, बजाय इसके कि हम खुद ट्रैफिक लाने पर भारी खर्च करें.

क्या आपका फोकस Gen Z पर है?

राहुल शर्मा: हमारी टारगेट ऑडियंस 25 से 40 साल की उम्र के लोग हैं. यही वह वर्ग है जहां हमारा ज्यादा मार्केटिंग निवेश जाता है. 18-24 आयु वर्ग से हमें कुछ ग्राहक अपने आप मिल जाते हैं, लेकिन हम सीधे उन्हें टारगेट नहीं करते क्योंकि हमारा प्रोडक्ट प्रीमियम है और क्वालिटी की कीमत होती है.

टियर-2 और टियर-3 शहरों को लेकर आपकी रणनीति क्या है?*

राहुल शर्मा: रेड चीफ का लगभग 70% बिजनेस टियर-2 और टियर-3 शहरों से आता है. टियर-1 से करीब 15% और मेट्रो से सिर्फ 5% योगदान है. इसलिए हमारा फोकस इन बाजारों पर बना हुआ है. यहां नई पीढ़ी को भी जोड़ना जरूरी है, क्योंकि पुरानी पीढ़ी ब्रांड को जानती है, लेकिन युवा वर्ग को जोड़ना हमारे लिए अगली चुनौती है.

रेड चीफ सिर्फ पुरुषों का ब्रांड है, लेकिन भारतीय मार्केट में महिलाओं का योगदान अधिक है. क्या आप महिलाओं के लिए भी प्रोडक्ट्स लाने पर विचार कर रहे हैं?
राहुल शर्मा:
 हां, बिल्कुल, हम महिलाओं के लिए भी अपना कैटेगरी एक्सपैंड करने जा रहे हैं. अगले सात से आठ महीनों में हम महिलाओं के लिए स्नीकर और स्पोर्ट्स शूज लॉन्च करने वाले हैं. हमारा फोकस यह सुनिश्चित करना है कि प्रोडक्ट्स सिर्फ स्टाइलिश ही न हों, बल्कि उन्हें पहनने में कम्फर्टेबल और परफॉर्मेंस फ्रेंडली भी बनाया जाए. भारतीय मार्केट में महिलाओं की खरीद शक्ति लगातार बढ़ रही है और हमें लगता है कि महिलाओं को टारगेट करना हमारे ब्रांड के विस्तार के लिए जरूरी है. हम उनके लिए डिजाइन और कलर ऑप्शन्स पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं, ताकि हर उम्र और लाइफस्टाइल के लिए प्रोडक्ट उपलब्ध हो.

क्या रेड चीफ पर्यावरण के अनुकूल या सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स पर काम कर रहा है?
राहुल शर्मा:
 हां, यह हमारे ब्रांड की जिम्मेदारी का हिस्सा है. हम लगातार सस्टेनेबिलिटी प्रोडक्ट्स पर काम कर रहे हैं. इस दिशा में दो-तीन ट्रायल्स सफल हो चुके हैं, जिसमें हमने बॉयो-डिग्रेडेबल मटेरियल और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग को टेस्ट किया. अगले 7-8 महीनों में हम इन प्रोडक्ट्स को मार्केट में लॉन्च करेंगे. हमारा उद्देश्य है कि उपभोक्ताओं को क्वालिटी और स्टाइल देने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी निभाई जाए. हम चाहते हैं कि युवा ग्राहक न सिर्फ हमारे डिज़ाइन और ब्रांड से जुड़ें, बल्कि हमारी सस्टेनेबिलिटी पहल को भी अपनाएं और उसका समर्थन करें.

आपने कहा कि अब आप साउथ इंडिया पर फोकस कर रहे हैं. क्या आप थोड़ा विस्तार से बता सकते हैं कि वहां आपकी रणनीति क्या होगी और क्यों यह बाजार खास है?

राहुल शर्मा: साउथ इंडिया हमारे लिए अब तक काफी अनछुआ बाजार रहा है. इस क्षेत्र में लोग रेड चीफ के नाम से परिचित हैं, लेकिन उत्पाद आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए हमारा फोकस यहाँ सिर्फ ब्रांड जागरूकता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पाद की उपलब्धता बढ़ाने पर भी है.

हमने यह तय किया है कि शुरुआत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से होगी. पहले हम ऑनलाइन रिटेल और ई-कॉमर्स का इस्तेमाल करेंगे ताकि लोगों तक हमारे प्रोडक्ट्स आसानी से पहुँचें. उसके बाद हम धीरे-धीरे रिटेल नेटवर्क बढ़ाएंगे, स्टोर और शोरूम की संख्या बढ़ाएंगे ताकि उपभोक्ता ब्रांड को न केवल ऑनलाइन बल्कि ऑफलाइन भी एक्सेस कर सकें.

साउथ इंडिया का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह एक बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार है, जहां युवा वर्ग बहुत सक्रिय है और ब्रांड्स के प्रति खुलापन ज्यादा है. हमारा उद्देश्य पुराने ग्राहकों को बनाए रखना और नए युवा उपभोक्ताओं को जोड़ना है. डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया, और ई-कॉमर्स के माध्यम से हम पहले उन्हें ब्रांड के साथ जोड़ेगें, फिर रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए उनके लिए आसान पहुँच सुनिश्चित करेंगे.

इस तरह हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि साउथ इंडिया में रेड चीफ सिर्फ एक जाना-पहचाना नाम न रहे, बल्कि आसानी से उपलब्ध और प्रिय ब्रांड भी बने.

 

रेड चीफ ने ‘नो शॉर्टकट्स’ की नई ब्रांड फिलॉसफी पेश की है. क्या आप बता सकते हैं कि इस सोच के पीछे कंपनी का उद्देश्य क्या है और यह उपभोक्ताओं तक क्या संदेश पहुंचाना चाहती है.

राहुल शर्मा: ‘नो शॉर्टकट्स’ हमारी ब्रांड यात्रा का मूल मंत्र है. इसका मतलब है कि किसी भी मंजिल तक पहुंचने के लिए समय, मेहनत और निरंतरता की जरूरत होती है. हम यह दिखाना चाहते हैं कि आसान या तेज रास्ता अपनाने से स्थायी गुणवत्ता और भरोसा नहीं मिलता.

हमारे फुटवियर और प्रोडक्ट्स में यह फिलॉसफी साफ झलकती है, चाहे वह डिजाइन हो, मटेरियल का चयन हो या कारीगरी. हम हर प्रोडक्ट को इस तरह तैयार करते हैं कि वह आरामदायक, स्टाइलिश और लंबे समय तक टिकाऊ हो. यह केवल एक प्रोडक्ट नहीं है, बल्कि हर कदम पर भरोसेमंद साथी के रूप में ग्राहकों के साथ खड़ा रहता है.

हमारा यह संदेश उपभोक्ताओं को प्रेरित करना है कि मेहनत और धैर्य के बिना कोई स्थायी सफलता संभव नहीं है. यही कारण है कि इस फिलॉसफी के माध्यम से हम अपने ब्रांड और प्रोडक्ट को एक नई लाइफस्टाइल और मूल्य की दिशा में प्रस्तुत कर रहे हैं.

आपने आयुष्मान खुराना को ब्रांड एंबेसडर बनाया है. क्या आप बता सकते हैं कि इस फैसले के पीछे क्या सोच है और यह ब्रांड की नई दिशा से कैसे मेल खाता है.

राहुल शर्मा: अब तक रेड चीफ की पहचान लेदर प्रोडक्ट्स और रग्ड इमेज के साथ जुड़ी थी. पहले हम ऐसे चेहरे चुनते थे जो इस रग्ड और हीरोइक इमेज को प्रतिबिंबित करें, जैसे विराट कोहली, विक्की कौशल और शाहिद कपूर. यह उस समय बिल्कुल उपयुक्त था, क्योंकि ब्रांड लेदर और ड्यूरेबिलिटी पर आधारित था. लेकिन अब हम ब्रांड के पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहे हैं, स्पोर्ट्स शूज, स्नीकर्स और फैशन-लाइफस्टाइल सेगमेंट में कदम रख रहे हैं. ऐसे में हमें ऐसे चेहरा चाहिए था जो सिर्फ टफ या हीरोइक न हो, बल्कि आम उपभोक्ता के साथ आसानी से जुड़ सके और उनका ध्यान आकर्षित कर सके.

इस दिशा में आयुष्मान खुराना बिल्कुल फिट बैठते हैं. वह रिलेटेबल हैं, उनका मास अपील है, और उनकी इमेज अप्रोचेबल वाइब देती है जो फैशन और लाइफस्टाइल सेगमेंट में काम आती है. वह युवा वर्ग और बड़े उम्र के लोगों दोनों के साथ कनेक्ट कर सकते हैं.

यह बदलाव इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अब हम सिर्फ लेदर पर निर्भर नहीं हैं. हमारा उद्देश्य है कि नया प्रोडक्ट सेगमेंट स्पोर्ट्स, स्नीकर्स और  लाइफस्टाइल शूज भी उपभोक्ताओं तक पहुंचे और उन्हें आकर्षित करे.

 


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