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पिक्चर अभी बाकी है: ZEE की वापसी पर डॉ. सुभाष चंद्रा

डॉ. अनुराग बत्रा के साथ बातचीत में, भारत के मूल मीडिया पायनियर ने ZEE के 33 वर्षों, चुकाए गए ₹43,000 करोड़ के कर्ज और इस बात पर चर्चा की कि उनके समूह से सबसे बड़ा बदलाव अभी आना बाकी है.

डॉ. अनुराग बत्रा 6 months ago

भारतीय मीडिया उद्योग ने कई बदलाव देखे हैं: 1990 के दशक का एनालॉग केबल बूम, 2000 के दशक के DTH युद्ध, और आज सब कुछ बदल देने वाला स्ट्रीमिंग का दौर, लेकिन बहुत कम ऐसे लोग रहे हैं जो हर बदलाव के दौर में मौजूद रहे और सिर्फ उसका हिस्सा नहीं बने, बल्कि उसे दिशा भी दी. एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी एंटरटेनमेंट को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले डॉ. सुभाष चंद्रा उन्हीं में से एक हैं.

अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा Exchange4media ग्रुप के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के साथ विस्तृत बातचीत में, सुभाष चंद्रा ने अपनी असफलताओं, चुनौतियों और इस विश्वास पर खुलकर बात की कि जी का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है.

वो शख्स जो उम्र नहीं गिनता

करीब छह दशकों से व्यवसाय में सक्रिय रहने वाले चंद्रा उम्र को लेकर बेहद सहज हैं. 30 नवंबर 2025 को वे 75 साल के हो गए.

“ये मेरे लिए सिर्फ एक संख्या है, इससे ज्यादा कुछ नहीं,” उन्होंने कहा. “मैं खुद को 35 या 37 साल जैसा महसूस करता हूं.” उनके साथ काम करने वाले भी इससे सहमत हैं. वे आज भी वीकेंड पर ऑफिस आते हैं, फैसले तेजी से लेते हैं और वही ऊर्जा दिखाते हैं जो जी के शुरुआती दिनों में दिखती थी.

यह ऊर्जा सिर्फ महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि मजबूरी से आई. 1966 में उनके परिवार का व्यवसाय खत्म हो गया था. इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ रहे चंद्र को एक पोस्टकार्ड मिला, जिसमें घर लौटने को कहा गया क्योंकि परिवार उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकता था. तब उनकी उम्र 17 साल थी.

“तब से मैंने हमेशा अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाया है. मुझे ऐसा करना ही था,” उन्होंने कहा.

इसके बाद उन्होंने हिसार में जूट बैग और दाल के उप-उत्पादों का व्यापार शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई.

जी के 33 साल और आगे की कहानी

इस साल 34 साल पूरे करने जा रही जी एंटरटेनमेंट आज भी ब्रांड पहचान के मामले में सबसे बड़ा भारतीय भाषा टीवी नेटवर्क है, हालांकि पिछले तीन वर्षों से इसके वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव रहा है.

फरवरी में जी टीवी ने पिछले चार वर्षों में अपनी सबसे ज्यादा व्यूअरशिप हासिल की.

Pitch Madison Advertising Report 2024 के अनुसार, भारतीय टीवी विज्ञापन बाजार करीब ₹30,000 करोड़ का है, जिसमें जनरल एंटरटेनमेंट और न्यूज़ चैनलों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. हालांकि, कभी मार्केट लीडर रही ज़ी की मार्केट वैल्यू करीब $14 बिलियन से घटकर $1 बिलियन से भी कम रह गई.

चंद्रा ने इसके पीछे 2019 की घटनाओं को जिम्मेदार ठहराया. IL&FS संकट के चलते एसेट-लायबिलिटी असंतुलन पैदा हुआ और एस्सेल ग्रुप भी इससे प्रभावित हुआ. ज़ी में उनकी हिस्सेदारी 42% से घटकर 5% से कम रह गई. इसके बाद कंपनी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें अधिग्रहण की कोशिश, सेबी की जांच और सोनी के साथ असफल मर्जर शामिल हैं.

“इन सभी कारणों से ज़ी की प्रगति प्रभावित हुई,” उन्होंने कहा.

₹43,000 करोड़ का कर्ज चुकाने की कहानी

26 जनवरी 2019 को चंद्रा ने 26 लेंडर्स के सामने बैठकर बिना किसी कानूनी जटिलता के पूरी स्थिति स्पष्ट की और अपने बेटों पुनीत और अमित के साथ हर पैसा चुकाने का वादा किया. “हमने ₹43,000 करोड़ चुकाए, अपनी अहम संपत्तियां बेचकर,” उन्होंने कहा. “मुझे कोई पछतावा नहीं है, बल्कि मैं अब ज्यादा हल्का और खुश महसूस करता हूं.”

आज के समय में जहां कई उद्योगपति कर्ज पुनर्गठन या दिवालियापन का रास्ता अपनाते हैं, यह कदम अलग नजर आता है.

वापसी और सुधार की शुरुआत

उन्होंने कहा, जब 2022-23 में जी बोर्ड ने उन्हें वापस बुलाया, तो उन्होंने पाया कि संगठन अपनी पुरानी सफलता में ही संतुष्ट हो गया था. “मुझे इसे बदलना पड़ा. जब तक आप अपनी गलती स्वीकार नहीं करेंगे, उसे सुधार नहीं सकते.”

अब कंपनी के प्रदर्शन में सुधार के संकेत दिख रहे हैं. जी टीवी के चार शो टॉप 10 में शामिल हैं और कंपनी की व्यूअरशिप हिस्सेदारी 17% से बढ़कर 18.8% हो गई है. लक्ष्य 20% से आगे जाना है.

ओम्नी-कंटेंट रणनीति पर फोकस

चंद्रा के अनुसार, जी अब ओम्नी-कंटेंट रणनीति पर काम कर रही है.

उन्होंने कहा, “दर्शक जहां भी है, वहां कंटेंट पहुंचना चाहिए, चाहे वह टीवी हो, डिजिटल हो या सोशल मीडिया.”

विज्ञापन कारोबार में बदलाव

उन्होंने जी की 500 सदस्यीय विज्ञापन टीम में से करीब 300 लोगों से मुलाकात की. उन्होंने कहा, “आपको अपने विज्ञापनदाता की समस्या हल करनी होगी. वही आपकी सैलरी देता है.”

ICL पर स्वीकार की गई गलती

2007 में शुरू हुई इंडियन क्रिकेट लीग (ICL) को लेकर चंद्रा ने पहली बार खुलकर कहा कि इसमें कंपनी की गलतियां थीं.

उन्होंने कहा, “ICL में हमने गलतियां कीं, इसलिए इसे बंद करना पड़ा.”

हालांकि उनका मानना है कि अगर लीग जारी रहती, तो कुछ सालों में लाभदायक हो सकती थी.

जी न्यूज और नेतृत्व की चुनौती

जी न्यूज पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नंबर वन बनने के बाद अहंकार आ गया था और फोकस दर्शकों से हट गया था.उन्होंने कहा, “जब आप नंबर वन होते हैं, तो अहंकार आ जाता है.”

आगे क्या: एक बड़ा बदलाव संभव

चंद्रा ने संकेत दिया कि अगले दो वर्षों में जी कुछ ऐसा करने की तैयारी में है जो पूरी इंडस्ट्री के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. हालांकि उन्होंने विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में यह संकेत अहम माना जा रहा है.

अंतिम विचार

भारत का पहला निजी सैटेलाइट टीवी नेटवर्क शुरू करने वाले और कई नई पहल करने वाले चंद्रा आज भी कुछ नया करने की इच्छा रखते हैं.

उन्होंने कहा, “आज की ऊर्जा ही भविष्य को आकार देती है.”

उनके बाल भले ही सफेद हो गए हों, लेकिन जुनून आज भी वैसा ही है.


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