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NSE IPO में 5 सरकारी बीमा कंपनियां बेचेंगी शेयर, होगी ₹7,200 करोड़ की कमाई

NSE में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास है. LIC के पास एक्सचेंज के करीब 10.72 प्रतिशत शेयर यानी 265.28 मिलियन शेयर हैं. हालांकि, LIC प्रस्तावित आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी का कोई भी शेयर बेचने नहीं जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ देश की पांच सरकारी बीमा कंपनियों के लिए बड़ी वित्तीय राहत लेकर आ सकता है. ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक, ये कंपनियां आईपीओ में करीब 4 करोड़ शेयर बेचने की तैयारी में हैं. अगर शेयर का संभावित भाव ₹1,800 रहता है, तो इनकी हिस्सेदारी बिक्री से करीब ₹7,200 करोड़ जुट सकते हैं. इससे वित्तीय दबाव झेल रही सरकारी बीमा कंपनियों की स्थिति मजबूत होने और उनके सॉल्वेंसी रेशियो में सुधार की उम्मीद है.

1994 में मामूली निवेश, अब हजारों करोड़ की हिस्सेदारी

जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re), न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस NSE के शुरुआती निवेशकों में शामिल थीं. एक्सचेंज की शुरुआत 1994 में हुई थी और उस समय इन कंपनियों ने इसमें मामूली निवेश किया था. अब NSE के प्रस्तावित आईपीओ के जरिए ये पांचों सरकारी बीमा कंपनियां करीब 40 मिलियन यानी 4 करोड़ शेयर बेच सकती हैं.

शेयरों की बिक्री के बाद इन कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी 6.7 प्रतिशत से घटकर करीब 5.1 प्रतिशत रह जाएगी. चूंकि NSE का यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, इसलिए शेयरों की बिक्री से मिलने वाली रकम NSE के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी.

LIC नहीं बेचेगी NSE में अपनी हिस्सेदारी

NSE में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास है. LIC के पास एक्सचेंज के करीब 10.72 प्रतिशत शेयर यानी 265.28 मिलियन शेयर हैं. हालांकि, LIC प्रस्तावित आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी का कोई भी शेयर बेचने नहीं जा रही है.

LIC को NSE के गवर्निंग बोर्ड में एक निदेशक नामित करने का अधिकार भी हासिल है. वहीं, निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों में HDFC Life और SBI Life भी अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना में शामिल नहीं हैं. दूसरी ओर, ICICI Lombard अपने करीब 2.35 मिलियन शेयर बेचकर लगभग ₹383 करोड़ का मुनाफा बुक कर सकती है.

घाटे में चल रही सरकारी बीमा कंपनियों को बड़ी राहत

NSE IPO से मिलने वाली रकम सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए काफी अहम हो सकती है. खासकर उन कंपनियों के लिए जिनका सॉल्वेंसी रेशियो दबाव में है. मार्च 2025 तक ओरिएंटल इंश्योरेंस का सॉल्वेंसी रेशियो माइनस 1.03, नेशनल इंश्योरेंस का माइनस 0.67 और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस का माइनस 0.65 दर्ज किया गया था.

शेयरों की बिक्री से मिलने वाली पूंजी इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकती है. अनुमान है कि इससे इनके सॉल्वेंसी रेशियो में करीब 100 बेसिस पॉइंट तक सुधार हो सकता है.

शेयर बेचने के बाद भी बचेंगे हजारों करोड़ के शेयर

आईपीओ में हिस्सेदारी बेचने के बावजूद सरकारी बीमा कंपनियों के पास NSE के बड़ी संख्या में शेयर बने रहेंगे. नेशनल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस करीब 17 मिलियन शेयर बेचने के बाद भी लगभग 73 मिलियन शेयर अपने पास रख सकती हैं.

यदि NSE के शेयर का भाव ₹1,800 माना जाए, तो बची हुई हिस्सेदारी की कीमत करीब ₹13,100 करोड़ बैठती है. NSE की लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत बढ़ने पर इन कंपनियों को मार्क-टू-मार्केट लाभ भी मिल सकता है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति को आगे भी सहारा मिलेगा.

अंतिम कमाई NSE के IPO प्राइस पर निर्भर

हालांकि, सरकारी बीमा कंपनियों को वास्तव में कितनी रकम मिलेगी, यह NSE के आईपीओ के अंतिम ऑफर प्राइस पर निर्भर करेगा. फिलहाल ₹1,800 प्रति शेयर का भाव संभावित कीमत के तौर पर माना जा रहा है. ऐसे में करीब 4 करोड़ शेयरों की बिक्री से लगभग ₹7,200 करोड़ जुटाने का अनुमान है. अंतिम कीमत और आईपीओ की शर्तें तय होने के बाद ही इन कंपनियों की वास्तविक कमाई स्पष्ट होगी.
 


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