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गिग वर्कर्स के लिए बड़ा बदलाव, Ola-Uber जैसी कंपनियों के अंशदान का नया फॉर्मूला होगा तय

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान की गणना के तरीके पर सरकार कर रही विचार; कारोबार या कामगारों को किए गए भुगतान के आधार पर तय हो सकता है अंशदान

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने के लिए सरकार नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय एग्रीगेटर कंपनियों से लिए जाने वाले सामाजिक सुरक्षा अंशदान की गणना के फॉर्मूले पर विचार कर रहा है. इसमें यह तय किया जाना है कि कंपनियों से अंशदान उनके सालाना कारोबार के आधार पर लिया जाए या कामगारों को किए जाने वाले भुगतान के आधार पर.

इस बदलाव का असर ओला (Ola), उबर (Uber) जैसी कैब और राइड-हेलिंग कंपनियों के साथ-साथ ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स पर पड़ सकता है. खासतौर पर भुगतान आधारित व्यवस्था लागू होने पर ज्यादा लेनदेन वाले प्लेटफॉर्म पर कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना है.

दो मॉडल पर विचार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार सामाजिक सुरक्षा अंशदान तय करने के लिए दो विकल्पों पर विचार कर रही है. पहला मॉडल एग्रीगेटर कंपनी के सालाना कारोबार के आधार पर अंशदान तय करने का है, जबकि दूसरे मॉडल में कामगारों को किए गए भुगतान या प्रति लेनदेन को आधार बनाया जा सकता है.

भुगतान आधारित मॉडल का असर उन कारोबारों पर ज्यादा पड़ सकता है, जहां लेनदेन की संख्या बहुत अधिक होती है, लेकिन हर लेनदेन का मूल्य अपेक्षाकृत कम होता है. राइड-हेलिंग कंपनियां इसी श्रेणी में आती हैं, क्योंकि कैब, ऑटो और बाइक सेवाओं में बड़ी संख्या में रोजाना ट्रांजैक्शन होते हैं.

क्या कहती है सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020?

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों के लिए गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा कोष में अंशदान करना अनिवार्य किया गया है. नियमों के मुताबिक, किसी एक एग्रीगेटर के साथ वित्त वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करने वाला गिग वर्कर या एक से अधिक एग्रीगेटर के साथ कुल 120 दिन काम करने वाला वर्कर योजना के तहत लाभ पाने का पात्र हो सकता है.

एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना अंशदान का आकलन कर उसे सामाजिक सुरक्षा कोष में जमा करना होता है. अब सरकार इस अंशदान की गणना और भुगतान के लिए तकनीकी व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर विचार कर रही है.

कारोबार का 1-2% तक हो सकता है अंशदान

सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 114(4) के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान करना होगा. हालांकि, यह अंशदान गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को किए गए कुल भुगतान के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता.

सरकार इस व्यवस्था के विकल्प के तौर पर सीधे कामगारों को किए जाने वाले भुगतान को आधार बनाने पर भी विचार कर रही है. इस मॉडल में भुगतान का 5 प्रतिशत तक अंशदान लिया जा सकता है.

Ola-Uber जैसी कंपनियों पर बढ़ सकता है खर्च

विश्लेषकों का मानना है कि अगर भुगतान आधारित व्यवस्था लागू होती है तो राइड-हेलिंग कंपनियों पर इसका वित्तीय असर ज्यादा हो सकता है. कैब, ऑटो और बाइक प्लेटफॉर्म पर रोजाना बड़ी संख्या में ट्रांजैक्शन होते हैं, इसलिए कामगारों को किए जाने वाले भुगतान के आधार पर अंशदान तय होने पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. वहीं, कारोबार आधारित मॉडल में अंशदान कंपनी के कुल सालाना कारोबार से जुड़ा होगा. ऐसे में अलग-अलग बिजनेस मॉडल वाली एग्रीगेटर कंपनियों पर दोनों व्यवस्थाओं का वित्तीय प्रभाव अलग-अलग हो सकता है.

गिग वर्कर्स को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ

प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है. अंशदान का फॉर्मूला तय होने के बाद सामाजिक सुरक्षा कोष के संचालन और पात्र कामगारों को योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट किया जा सकेगा. इसका लाभ कैब ड्राइवर, डिलीवरी पार्टनर और अन्य प्लेटफॉर्म आधारित कामगारों को मिल सकता है, जो पारंपरिक रोजगार व्यवस्था से अलग तरीके से काम करते हैं.


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