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ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ाएगी LIC, RBI ने 9.99% तक खरीद को दी मंजूरी
आईसीआईसीआई बैंक ने 5 सितंबर को नियामकीय फाइलिंग के जरिए RBI की मंजूरी की जानकारी दी. इसके तहत LIC बैंक की चुकता शेयर पूंजी या वोटिंग अधिकारों में कुल मिलाकर 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 17 hours ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक ICICI Bank में 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के बाद देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के पास बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नियामकीय मंजूरी उपलब्ध हो गई है.
ICICI Bank ने 5 सितंबर को नियामकीय फाइलिंग के जरिए RBI की मंजूरी की जानकारी दी. इसके तहत LIC बैंक की चुकता शेयर पूंजी या वोटिंग अधिकारों में कुल मिलाकर 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है. हालांकि, इसके लिए उसे सभी लागू नियामकीय और वैधानिक नियमों का पालन करना होगा.
यह कदम ऐसे समय में आया है जब बड़े संस्थागत निवेशक भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं. वहीं, बैंकों में किसी एक निवेशक की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी की सीमा नियामकीय मंजूरियों के जरिए तय होती है.
बैंकिंग क्षेत्र में LIC का बढ़ेगा एक्सपोजर
RBI की मंजूरी से LIC को ICICI Bank में अपना निवेश बढ़ाने की अधिक गुंजाइश मिल गई है. हालांकि, मंजूरी का यह मतलब नहीं है कि LIC तुरंत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत कर देगी. LIC देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शामिल है और वित्तीय सेवा क्षेत्र में उसका पहले से बड़ा निवेश है. ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ने से देश के प्रमुख निजी बैंकों में से एक के प्रति LIC का एक्सपोजर और बढ़ जाएगा. हिस्सेदारी खरीद से जुड़े लेनदेन में LIC को बैंकिंग, प्रतिभूति बाजार, विदेशी मुद्रा और अन्य लागू नियमों का पालन करना होगा. RBI की मंजूरी के साथ जुड़ी शर्तों का पालन करते हुए ही LIC अतिरिक्त हिस्सेदारी हासिल कर सकेगी.
एक साल के भीतर पूरी करनी होगी खरीद
RBI ने कहा है कि मंजूर की गई हिस्सेदारी खरीद की प्रक्रिया मंजूरी की तारीख से एक वर्ष के भीतर पूरी करनी होगी. नियामकीय खुलासे के अनुसार, यदि LIC निर्धारित अवधि के भीतर अधिग्रहण पूरा नहीं करती है, तो यह मंजूरी रद्द मानी जाएगी. केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि ICICI Bank में LIC की कुल हिस्सेदारी 9.99 प्रतिशत की स्वीकृत सीमा के भीतर ही रहनी चाहिए. यह मंजूरी LIC को बैंकिंग क्षेत्र में अतिरिक्त पूंजी लगाने की सुविधा देती है, जबकि निजी बैंकों में बड़ी हिस्सेदारी रखने से जुड़े नियामकीय सुरक्षा उपाय भी लागू रहेंगे.
ICICI Bank के लिए भी इस कदम से संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी मजबूत हो सकती है. हालांकि, LIC वास्तव में कितनी अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदेगी, यह उसके निवेश संबंधी फैसलों और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
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