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India-EU FTA: कारोबारियों के लिए खुला 24 ट्रिलियन डॉलर का बाजार, मैन्युफैक्चरिंग से टेक्नोलॉजी तक मिलेंगे बड़े अवसर
पीयूष गोयल ने कहा- 27 देशों के यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता सप्लाई चेन को बनाएगा मजबूत; भारत और बेल्जियम के बीच सेमीकंडक्टर, रक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन और कृषि क्षेत्र में सहयोग की बड़ी संभावनाएं
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय कारोबारियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं, कृषि, टेक्नोलॉजी और निवेश के क्षेत्र में बड़े अवसर खोलेगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोप के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन में लचीलापन बढ़ाने में भी मदद करेगा.
मुंबई में भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में गोयल ने कहा कि इस समझौते पर बातचीत के दौरान दोनों बाजारों के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया है.
25 साल बाद हुआ समझौता
गोयल ने कहा कि करीब 25 वर्षों की बातचीत के बाद यह व्यापार समझौता पूरा हुआ है. इसके जरिए करीब 24 ट्रिलियन डॉलर के बाजार और लगभग 2 अरब लोगों तक पहुंच का रास्ता खुलेगा. उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देश समझौते से जुड़ी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर इसे लागू करने के समर्थन में हैं.
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोप के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करेगा और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को सप्लाई चेन में आने वाले व्यवधानों के प्रति अधिक लचीला बनाएगा. उनके मुताबिक, समझौते के तहत भारत और यूरोप के 95 प्रतिशत से अधिक वस्तु निर्यात पर टैरिफ या तो खत्म किए जाएंगे या उनमें कटौती की जाएगी.
डायमंड, फार्मा और ग्रीन हाइड्रोजन में सहयोग की संभावना
डी वेवर ने कहा कि इस समझौते से डायमंड, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्युटिकल्स, समुद्री सेवाओं, ग्रीन हाइड्रोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह को भारत और यूरोप के बीच महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स गेटवे बताया. गोयल ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार लगभग दोगुना होकर करीब 140 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र पर जोर
गोयल ने भारत और बेल्जियम के बीच सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा, उन्नत विनिर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन, कृषि और फूड प्रोसेसिंग में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं बताईं. उन्होंने कहा कि माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च में बेल्जियम की विशेषज्ञता को भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और प्रतिभा के साथ जोड़ा जा सकता है. इससे डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन तक एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी.
गोयल ने बेल्जियम की इंजीनियरिंग कंपनी John Cockerill के साथ काउंटर-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और प्रिसिजन म्यूनिशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावना भी जताई. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने हाल में इस दिशा में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया है.
एंटवर्प-मुंबई-सूरत के बीच डायमंड सहयोग
जेम्स एंड ज्वेलरी क्षेत्र में गोयल ने एंटवर्प, मुंबई और सूरत के प्रमुख डायमंड केंद्रों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया. इसमें लैब-ग्रोउन डायमंड और सर्टिफिकेशन जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी साथ काम कर सकते हैं. भारत की उत्पादन क्षमता को एंटवर्प-ब्रुग्स की बंकरिंग और ग्रीन शिपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जा सकता है. कृषि और फूड प्रोसेसिंग में आलू प्रसंस्करण, कोल्ड चेन और टिकाऊ कृषि मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं हैं.
सेमीकंडक्टर से अंतरिक्ष तक भारत का फोकस
गोयल ने भारत की बढ़ती टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहा है. उन्होंने बताया कि भारत के दूसरे सेमीकंडक्टर कार्यक्रम Semicon India 2.0 के लिए 14 अरब डॉलर का प्रावधान है, जिससे इस क्षेत्र में करीब 70 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है.
गोयल के मुताबिक, भारत की स्पेस इकोनॉमी फिलहाल करीब 8.5 अरब डॉलर की है और निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी से अगले आठ वर्षों में इसके 44 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है. उन्होंने कहा कि भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी का रास्ता भी खोला है और अगले दो दशकों में 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की योजना है.
स्किल और वर्कफोर्स मोबिलिटी पर जोर
गोयल ने भारत और बेल्जियम के बीच वर्कफोर्स मोबिलिटी बढ़ाने, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, संयुक्त कौशल विकास और डुअल-डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई. खासकर उन क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया जहां बेल्जियम में कुशल कर्मचारियों की कमी है. उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक और सप्लाई चेन अनिश्चितता के दौर में भारत और बेल्जियम को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक संबंध विकसित करने चाहिए.
गोयल ने कहा कि बेल्जियम की टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और पूंजी को भारत के बड़े बाजार, प्रतिभा और वर्कफोर्स के साथ जोड़कर दोनों देश वैश्विक स्तर पर बेहद मजबूत प्रतिस्पर्धी क्षमता तैयार कर सकते हैं.
यूरोपीय बाजार के लिए भारत के कारोबारियों का गेटवे बनेगा बेल्जियम
गोयल ने कहा कि बेल्जियम यूरोपीय बाजार में प्रवेश करने की इच्छा रखने वाली भारतीय कंपनियों के लिए गेटवे की भूमिका निभा सकता है. एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह सड़क, रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और डीप-वॉटर कनेक्टिविटी के जरिए यूरोप के विभिन्न हिस्सों को जोड़ता है.
उन्होंने बेल्जियम की कंपनियों को भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया. गोयल ने कहा कि भारत में बड़ा बाजार, युवा कार्यबल और तेजी से विस्तार करता औद्योगिक एवं टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम मौजूद है.
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