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Blinkit और Instamart के डार्क स्टोर हुए महंगे, खर्च ₹2.5 करोड़ तक पहुंचा; बड़े स्टोर फॉर्मेट पर जोर
UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो साल पहले प्रति डार्क स्टोर अनुमानित ₹1 करोड़ के मुकाबले अब लागत बढ़कर करीब ₹2.5 करोड़ हुई; क्विक कॉमर्स कंपनियां ग्रॉसरी से आगे बढ़ाकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी और अन्य कैटेगरी में बढ़ा रही हैं कारोबार
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
क्विक कॉमर्स कंपनियां बड़े फुलफिलमेंट सेंटर और ज्यादा प्रोडक्ट रेंज पर फोकस कर रही हैं, जिससे उनके डार्क स्टोर नेटवर्क में निवेश तेजी से बढ़ रहा है. UBS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Eternal की Blinkit और Swiggy की Instamart ने प्रति डार्क स्टोर अनुमानित पूंजीगत खर्च (Capex) बढ़ाकर करीब ₹2.5 करोड़ कर दिया है, जो करीब दो साल पहले लगभग ₹1 करोड़ आंका गया था.
2,000-3,000 वर्ग फुट से बड़े स्टोर की ओर बढ़ रहीं कंपनियां
UBS के अनुसार, डार्क स्टोर के आकार में यह बदलाव क्विक कॉमर्स सेक्टर की बदलती रणनीति को दिखाता है. पहले 2,000-3,000 वर्ग फुट के पड़ोस आधारित स्टोर इस क्षेत्र में प्रमुख थे, लेकिन अब कंपनियां 5,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र वाले स्टोर खोल रही हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2,500-3,000 वर्ग फुट के डार्क स्टोर की मौजूदा लागत करीब ₹1.4-1.6 करोड़ है. वहीं 5,000 वर्ग फुट की सुविधा पर करीब ₹2.4-2.5 करोड़ और 7,000 वर्ग फुट के स्टोर पर लगभग ₹3 करोड़ खर्च आता है. इसमें संबंधित वेयरहाउस इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत भी शामिल है. UBS ने कहा कि पिछले एक से दो वर्षों में नए डार्क स्टोर का आकार 60-100 प्रतिशत तक बढ़ा है. 5,000 वर्ग फुट से ज्यादा क्षेत्र वाले स्टोर अब तेजी से आम हो रहे हैं.
ज्यादा इन्वेंट्री रखने में मदद
बड़े डार्क स्टोर कंपनियों को ज्यादा रिजर्व इन्वेंट्री रखने और स्थानीय स्तर पर लंबी पूंछ वाले स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स (SKU) की व्यापक रेंज उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. इससे वेयरहाउस से बार-बार सामान मंगाने की जरूरत कम हो जाती है. UBS के अनुमान के अनुसार, 2,500-3,000 वर्ग फुट की सुविधा में वेयरहाउस एरिया मल्टीपल करीब 1.0 गुना है. यह 5,000 वर्ग फुट के स्टोर में घटकर 0.8 गुना और 7,000 वर्ग फुट के स्टोर में 0.6 गुना तक आ सकता है.
डार्क स्टोर बन रहे मिनी फुलफिलमेंट सेंटर
बड़े स्टोर फॉर्मेट के साथ डार्क स्टोर की भूमिका भी बदल रही है. अब इन्हें केवल पड़ोस के ग्राहकों के लिए इन्वेंट्री रखने वाली जगह के बजाय मिनी फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है.
UBS के मुताबिक, ऑर्डर वॉल्यूम बढ़ने के साथ कंपनियों को पिकिंग के लिए ज्यादा जगह, पैकिंग स्टेशन, डिलीवरी राइडर्स के लिए हैंडओवर एरिया और ऑर्डर स्टेजिंग स्पेस की जरूरत होती है. इससे स्टोर में भीड़ कम करने और डिलीवरी सर्विस का स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है.
बढ़ सकता है नेटवर्क विस्तार का फंडिंग खर्च
डार्क स्टोर में बढ़ते पूंजी निवेश से क्विक कॉमर्स कंपनियों के नेटवर्क विस्तार के लिए फंडिंग की जरूरत बढ़ सकती है. हालांकि, बड़े स्टोर ज्यादा ऑर्डर संभालने और उपलब्ध क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद कर सकते हैं. UBS के अनुसार, जैसे-जैसे ऑर्डर वॉल्यूम बढ़ता है, बड़े फुलफिलमेंट सेंटर कंपनियों की थ्रूपुट और यूटिलाइजेशन बेहतर कर सकते हैं. इससे लंबे समय में क्विक कॉमर्स कंपनियों की यूनिट इकनॉमिक्स में सुधार की संभावना है.
सिर्फ डिलीवरी स्पीड नहीं, प्रोडक्ट रेंज भी बनी प्रतिस्पर्धा का आधार
UBS ने कहा कि बड़े डार्क स्टोर की ओर बढ़ने की प्रमुख वजह अब सिर्फ तेज डिलीवरी नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट उपलब्ध कराने की प्रतिस्पर्धा भी है. क्विक कॉमर्स कंपनियां अब ग्रॉसरी और रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी और अन्य लॉन्ग-टेल प्रोडक्ट्स जैसी कैटेगरी में विस्तार कर रही हैं. इसके लिए ग्राहकों के नजदीक ज्यादा बड़ी और विविध प्रोडक्ट रेंज रखने की जरूरत पड़ रही है. यही वजह है कि कंपनियां बड़े डार्क स्टोर फॉर्मेट पर तेजी से निवेश कर रही हैं.
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