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टाटा संस में उत्तराधिकार की दौड़ तीन नामों तक सिमटी, टी. वी. नरेंद्रन सबसे आगे
मामले से परिचित लोगों के मुताबिक टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टी. वी. नरेंद्रन सबसे मजबूत आंतरिक दावेदार हैं, जबकि एनएसई के प्रमुख आशीष चौहान के नाम पर भी विचार किया जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 23 minutes ago
2.75 लाख करोड़ डॉलर से अधिक के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश को तीन नामों तक सीमित कर दिया है. मामले से परिचित लोगों के अनुसार, जिन नामों पर विचार चल रहा है, उनमें टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टी. वी. नरेंद्रन, टाटा संस के कार्यकारी निदेशक और ग्रुप सीएफओ सौरभ अग्रवाल तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एमडी और सीईओ आशीष चौहान शामिल हैं.
आंतरिक दावेदारों में नरेंद्रन सबसे आगे बताए जा रहे हैं, जबकि अग्रवाल के निवेश बैंकिंग और पूंजी आवंटन से जुड़े अनुभव को देखते हुए उनके नाम पर विचार किया जा रहा है. वहीं, भारत के पूंजी बाजार के अनुभवी और एनएसई की स्थापना में शामिल रहे चौहान इस दौड़ में संभावित ‘डार्क हॉर्स’ के रूप में उभरे हैं.
उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम फैसला नहीं हुआ है. मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, अगले चेयरमैन के चयन में टाटा संस का बोर्ड और कंपनी को नियंत्रित करने वाले टाटा ट्रस्ट्स अहम भूमिका निभाएंगे.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने शॉर्टलिस्ट किए गए नामों पर वरिष्ठ सरकारी नेताओं के साथ चर्चा की है. संबंधित पक्षों द्वारा उम्मीदवारों पर विचार किए जाने के बाद फैसला होने की उम्मीद है.
चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था और फिलहाल अपने दूसरे पांच साल के कार्यकाल में हैं. उन्होंने पिछले महीने घोषणा की थी कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे.
मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए अन्य नामों में नोएल टाटा का संभावित अंतरिम चेयरमैन के तौर पर नाम, टाटा संस की ग्रुप चीफ डिजिटल ऑफिसर आरती सुब्रमण्यम, टाटा मोटर्स के सीईओ शैलेश चंद्रा और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा शामिल हैं.
मामले से परिचित लोगों के अनुसार, तकनीक, पूंजी बाजार, वित्तीय सेवाओं और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में चौहान के अनुभव को देखते हुए वह एक अप्रत्याशित विकल्प के रूप में उभर सकते हैं.
चौहान 1990 के दशक में एनएसई की स्थापना में शामिल अधिकारियों में रहे हैं. इसके बाद उन्होंने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के एमडी और सीईओ के रूप में काम किया और 2022 में एनएसई के प्रमुख के तौर पर वापस लौटे. वह रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक में भी काम कर चुके हैं.
चौहान आईआईटी बॉम्बे से स्नातक हैं और उनके पास आईआईएम कलकत्ता से प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिग्री है. फिलहाल वह एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ की देखरेख कर रहे हैं, जिसके एक्सचेंज का मूल्यांकन करीब 5 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है.
आंतरिक दावेदारों में नरेंद्रन सबसे आगे
नरेंद्रन को समूह के भीतर सबसे मजबूत परिचालन दावेदार माना जा रहा है. वह तीन दशक से अधिक समय से टाटा समूह से जुड़े हैं. उन्होंने 1988 में टाटा स्टील के साथ अपना करियर शुरू किया और एक दशक से अधिक समय से कंपनी के सीईओ और एमडी हैं.
अपने कार्यकाल के दौरान नरेंद्रन ने वैश्विक कमोडिटी चक्रों, बड़े पूंजी निवेश और यूरोपीय कारोबार से जुड़ी चुनौतियों के बीच टाटा स्टील का नेतृत्व किया है. उन्होंने कंपनी के जैविक और अकार्बनिक विस्तार की भी देखरेख की है. इसके अलावा वह वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के चेयरमैन और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष जैसे उद्योग पदों पर भी रह चुके हैं.
टाटा समूह के साथ लंबे जुड़ाव की वजह से उन्हें समूह के कारोबार की गहरी समझ है. हालांकि, चर्चा से परिचित लोगों के अनुसार, उनका अनुभव मुख्य रूप से टाटा स्टील तक केंद्रित रहा है और होल्डिंग कंपनी के स्तर पर उनका अनुभव अपेक्षाकृत सीमित है.
अग्रवाल के पास वित्त और रणनीति का अनुभव
अग्रवाल समूह के भीतर वित्त और रणनीति पर केंद्रित विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं. वह 2017 में चंद्रशेखरन के कार्यकाल में ग्रुप सीएफओ के तौर पर टाटा संस से जुड़े थे और फिलहाल कार्यकारी निदेशक एवं ग्रुप सीएफओ हैं.
उनकी जिम्मेदारियों में समूह के स्तर पर पूंजी आवंटन, निवेश से जुड़े फैसले और पोर्टफोलियो प्रबंधन शामिल हैं. टाटा संस से जुड़ने से पहले अग्रवाल ने टाटा समूह समेत कई बड़ी भारतीय कंपनियों को कारोबारी सौदों में सलाह दी थी. इससे उन्हें वित्तीय बाजारों के साथ-साथ समूह की निवेश संरचना की भी समझ मिली.
वह टाटा स्टील, वोल्टास और टाटा डिजिटल समेत कई टाटा कंपनियों के बोर्ड में रह चुके हैं. इसके अलावा वह टाटा कैपिटल, टाटा प्ले, टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा 1mg और बिगबास्केट जैसी कंपनियों के चेयरमैन भी हैं.
फिलहाल नरेंद्रन आंतरिक दावेदारों में सबसे आगे हैं, जबकि अग्रवाल वित्त पर केंद्रित विकल्प पेश करते हैं. वहीं, चौहान का तकनीक, वित्तीय बाजार और संस्थान निर्माण से जुड़ा अनुभव उन्हें उत्तराधिकार की दौड़ में संभावित ‘वाइल्ड कार्ड’ बनाता है.
उम्मीद है कि चयन समिति आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया पर विचार-विमर्श जारी रखेगी. चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने के बाद टाटा संस के नए चेयरमैन पदभार संभालेंगे.
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