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OPEC+ का तेल उत्पादन बढ़ाने से इनकार, कच्चा तेल ₹100 के करीब; भारत पर बढ़ेगा महंगाई का दबाव

OPEC+ के मुताबिक, सातों देश हर महीने वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य की मांग का आकलन करते रहेंगे. अगली बैठक 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ ने अक्टूबर 2026 के लिए कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने से इनकार कर दिया है. रविवार को हुई बैठक में सात प्रमुख देशों ने सितंबर के उत्पादन स्तर को ही अक्टूबर में जारी रखने का फैसला किया. इस फैसले के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और ब्रेंट क्रूड 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. भारत के लिए यह फैसला चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात करता है.

अक्टूबर में नहीं बढ़ेगा तेल उत्पादन

OPEC+ की 6 सितंबर को हुई वर्चुअल बैठक में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने हिस्सा लिया. बैठक में इन देशों ने अक्टूबर के लिए सितंबर 2026 के निर्धारित उत्पादन स्तर को बनाए रखने पर सहमति जताई. OPEC+ के मुताबिक, सातों देश हर महीने वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य की मांग का आकलन करते रहेंगे. अगली बैठक 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है.

किस देश का कितना उत्पादन?

अक्टूबर के उत्पादन कार्यक्रम के तहत रूस का उत्पादन लक्ष्य 99.49 लाख बैरल प्रतिदिन और सऊदी अरब का 104.78 लाख बैरल प्रतिदिन रहेगा. अन्य देशों के उत्पादन लक्ष्य इस प्रकार हैं:

1. इराक: 44.31 लाख बैरल प्रतिदिन
2. कुवैत: 26.76 लाख बैरल प्रतिदिन
3. कजाकिस्तान: 16.28 लाख बैरल प्रतिदिन
4. अल्जीरिया: 10.07 लाख बैरल प्रतिदिन
5. ओमान: 8.41 लाख बैरल प्रतिदिन

मुआवजा उत्पादन को छोड़कर इन सात देशों का संयुक्त अक्टूबर उत्पादन लक्ष्य करीब 3.101 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहेगा.

होर्मुज संकट के बीच फैसला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, OPEC+ का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका ने वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के प्रमुख तेल शिपिंग मार्गों में शामिल है. यहां किसी भी तरह की लंबी रुकावट से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. ऐसे माहौल में OPEC+ की ओर से उत्पादन बढ़ाने से इनकार ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है.

सितंबर में बढ़ाया था उत्पादन

इससे पहले OPEC+ ने अगस्त में सितंबर के लिए तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया था. इसके साथ समूह ने 2023 में लागू की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त उत्पादन कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी. हालांकि, OPEC+ के 21 सदस्य देशों में से ज्यादातर के लिए 2026 के अंत तक एक और उत्पादन कटौती लागू है. इन कटौतियों को वापस लेने से पहले समूह को सदस्य देशों की वास्तविक उत्पादन क्षमता का आकलन करना होगा. इसके बाद 2027 के लिए नए उत्पादन बेसलाइन तय किए जाएंगे और इन्हीं के आधार पर अगले साल देशों के उत्पादन कोटा निर्धारित होंगे.

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात करता है. ऐसे में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है. महंगे कच्चे तेल का असर व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से घरेलू अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है.

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

OPEC+ के फैसले के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली. सुबह करीब 11:30 बजे ब्रेंट क्रूड 1.47 फीसदी की बढ़त के साथ 97.70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. वहीं, WTI क्रूड 1.49 फीसदी उछलकर 92.84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आगे भी बनी रहती है, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, रुपये और महंगाई के मोर्चे पर देखने को मिल सकता है.


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