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विदेशी और MF निवेशकों को मिल सकती है टैक्स राहत, सेबी ने सरकार को भेजा प्रस्ताव
इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. मौजूदा व्यवस्था में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने को यूनिट्स की बिक्री माना जाता है और इस पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और घरेलू निवेशकों के घटते रिटर्न के बीच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सरकार को दो अहम टैक्स राहत देने की सिफारिश की है. इसके तहत विदेशी निवेशकों पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स खत्म करने और घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक स्कीम से दूसरी स्कीम में निवेश ट्रांसफर करने पर टैक्स छूट देने का प्रस्ताव है. हालांकि, इन सिफारिशों पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है.
बजट से पहले सरकार को भेजे गए सुझाव
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से बताया कि सेबी ने ये सुझाव फरवरी 2027 में पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले सरकार को दिए हैं. हालांकि, सेबी की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं और इन्हें लागू करने का फैसला सरकार को करना है.
बताया जा रहा है कि सेबी ने पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशकों के साथ हुई कई बैठकों के बाद ये प्रस्ताव तैयार किए हैं. इन बैठकों में विदेशी निवेशकों ने भारत में लागू टैक्स व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं. लगातार विदेशी बिकवाली के कारण भारतीय रुपये पर भी दबाव पड़ा है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली रोकने की कोशिश
भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन पिछले दो वर्षों में कई अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा है. इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में रिकॉर्ड 31 अरब डॉलर की बिकवाली की है. वहीं, घरेलू शेयर बाजार से मिलने वाला रिटर्न ठहरने के कारण खुदरा निवेशकों का विदेशों में निवेश बढ़ा है.
सूत्रों के मुताबिक, सेबी के प्रस्ताव का उद्देश्य विदेशी निवेशकों पर शुरुआती टैक्स बोझ कम करना और भारतीय बाजार में निवेश को आकर्षक बनाना है.
फिलहाल भारत में एक साल से अधिक समय तक रखे गए शेयरों और अन्य पात्र प्रतिभूतियों पर 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. वहीं, एक साल या उससे कम समय तक रखी गई प्रतिभूतियों की बिक्री से होने वाले मुनाफे पर 20 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स देना पड़ता है. इसके अलावा शेयरों की खरीद-बिक्री पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और लाभांश पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) भी लागू होता है.
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कैपिटल गेन टैक्स में कटौती से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार का आकर्षण बढ़ सकता है और निवेश को समर्थन मिल सकता है. वहीं, ब्रोकरेज फर्म IIFL का अनुमान है कि कैपिटल गेन टैक्स खत्म होने से विदेशी निवेशकों का रिटर्न 2.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकता है.
म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी मिल सकती है टैक्स राहत
सेबी ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी टैक्स राहत का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत अगर कोई निवेशक अपनी म्यूचुअल फंड स्कीम की यूनिट्स को दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करता है, तो इसे टैक्स के दायरे में आने वाली बिक्री नहीं माना जाना चाहिए. हालांकि, इस छूट का लाभ तभी मिल सकता है, जब निवेशक ने संबंधित यूनिट्स को एक साल से अधिक समय तक अपने पास रखा हो.
इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. मौजूदा व्यवस्था में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने को यूनिट्स की बिक्री माना जाता है और इस पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.
बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच प्रस्ताव
पिछले दो वर्षों में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर रहा है. इस दौरान निफ्टी 50 में 4.8 फीसदी की गिरावट आई, जबकि MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में 40 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी इक्विटी स्कीमों से अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला है. फंड रिसर्च कंपनी मॉर्निंगस्टार के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में लार्जकैप शेयरों में निवेश करने वाले फंड्स का औसत रिटर्न 1.6 फीसदी घटा है.
भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के पास फिलहाल 82.6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति प्रबंधन के तहत है. इस उद्योग में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये हर महीने औसतन 3,000 करोड़ रुपये का निवेश आता है.
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