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बॉम्बे हाईकोर्ट ने BCCI को दिया करारा झटका, जानें क्या है मामला
BCCI ने ESIC कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां भी उसे निराशा ही हाथ लगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
बॉम्बे हाईकोर्ट से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को झटका लगा है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि चूंकि BCCI कमर्शियल गतिविधियों में लगा हुआ है और उसी से मुनाफा कमा रहा है, इसलिए वह कर्मचारी राज्य बीमा निकाय (ESIC) अधिनियम के तहत आता है.
कोर्ट ने यह कहा
अदालत के इस फैसले का मतलब है कि बीसीसीआई ESIC कारपोरेशन को नियोक्ता के अंशदान का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है. बता दें कि ESI कर्मचारियों के कल्याण के लिए काम करती है. न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि BCCI व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल है और उससे कमाई कर रहा है. ये गतिविधियां केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके प्रसारण अधिकारों की भी बोर्ड द्वारा नीलामी की जाती है. लिहाजा, BCCI मुंबई शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत एक 'शॉप' है और इसलिए वो ईएसआई अधिनियम के दायरे में आएगा.
क्या है मामला?
BCCI ने मुंबई स्थित ESI अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. ESIC अदालत ने कहा था कि बोर्ड को शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत "शॉप" के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है और इसलिए, वो ईएसआई अधिनियम के दायरे में आएगा. दरअसल, यह पूरा मामला शुरू हुआ अप्रैल-मई 2011 में जब इंश्योरेंस इंस्पेक्टर ने बोर्ड के कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था. इस दौरान, वहां मौजूद कर्मचारियों और उनके वेतन की जांच की गई थी.
बोर्ड के तर्क बेअसर
मई 2007 से मार्च 2014 तक की अवधि के लिए कर्मचारी राज्य बीमा अंशदान के रूप में ₹5,04,075 का भुगतान करने के लिए 1 जुलाई 2014 को प्रोफार्मा सी-18 में एक नोटिस भेजा गया. इस पर बोर्ड ने दावा किया कि उसे ईएसआई अधिनियम के तहत कवर नहीं किया जा सकता, क्योंकि वो भारत में क्रिकेट के लिए एक शासी निकाय है और इसका प्राथमिक उद्देश्य पूरे देश में क्रिकेट का प्रशासन, प्रचार और नियंत्रण करना है. इसलिए, उसे मुंबई शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत "शॉप" के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता. हालांकि, अब बोर्ड को हाईकोर्ट से भी झटका लगा है.
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