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झोलाछाप डॉक्टरों की खैर नहीं, सरकार करने जा रही है ऐसा इलाज नहीं हो सकेगा फर्जीवाड़ा
सरकार जो उपाय करने जा रही है उसका मकसद सिर्फ झोलाछाप पर नियंत्रण पाना नहीं बल्कि डॉक्टरों का डेटा जुटाकर उसका इस्तेमाल पॉलिसी मेकिंग में करना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
हमारे देश में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या और उनके इलाज के कारण होने वाली मौतों का मामला अक्सर सामने आता रहता है. ये समस्या तो बहुत पुरानी है लेकिन आज तक इसका कोई इलाज नहीं निकल पाया. लेकिन अब सरकार ने इसके लिए एक उपाय निकाल लिया है. मरीज अपने डॉक्टर को पहचान सकें इसके लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी डॉक्टरों को डिजिटल डॉक्टर सर्टिफिकेट दे रही है. इसके जरिए मरीज डॉक्टर को पहचान पाएगा कि वो असली है या नहीं.
अब कैसे सुलझेगी फर्जी डॉक्टरों की समस्या
केन्द्र सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले इस डिजिटल डॉक्टर सर्टिफिकेट को सभी वेरिफाइड डॉक्टरों को अपने क्लिनिक के आगे लगाना होगा. उस सर्टिफिकेट में एक क्यूआर कोड होगा जिसे स्कैन करते ही आपको उस डॉक्टर से जुड़ी वो जानकारियां मिल जाएंगी जो किसी भी डॉक्टर को पहचानने में मददगार होती है. इस योजना को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत लाया जा रहा है.
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KYC की तर्ज पर बना है KYD
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिस तरह फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के लिए Know your Customer की सेवाएं होती हैं उसी तरह हेल्थ सेक्टर में Know your Doctor की सेवा की शुरूआत की गई है. इस सर्टिफिकेट को जारी करने के लिए हर राज्य सरकार को एक वेरिफॉयर की नियुक्ति करनी होगी या स्टेट मेडिकल काउंसिल की ओर से ये काम किया जाएगा. इन लोगों के जरिए ही इस सर्टिफिकेट को इश्यू किया जा सकेगा.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में 10 लाख फर्जी डॉक्टर नीम हकीम काम कर रहे हैं. इनमें 400000 भारतीय चिकित्सा के डॉक्टर भी शामिल हैं. इस दिशा में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी 30 मई को एक वर्कशॉप आयोजित करने जा रही है. इस वर्कशॉप में सभी चिकित्सा काउंसिल को इससे जुड़ी सभी जानकारियां दी जाएंगी. अथॉरिटी उन्हें जल्द से जल्द इस अभियान की शुरूआत करने से लेकर इसके फायदों के बारे में विस्तार से बताएगी.
अब तक इतने डॉक्टरों का हो चुका है वेरिफिकेशन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अभी तक इस अभियान के तहत 139000 डॉक्टरों का वेरिफिकेशन कर चुकी है, इन्हें ये सर्टिफिकेट दिया भी जा चुका है. यही नहीं नेशनल हेल्थ डिजिटल मिशन के अंतर्गत 2 लाख नर्सों को भी इसके तहत रजिस्टर्ड किया जा चुका है. सरकार के रजिस्टर में 76.56 प्रतिशत डॉक्टर प्राइवेट सेक्टर से हैं. इस बीच नेशनल हेल्थ अथॉरिटी इन दिनों डेंटिस्ट, नेशनल मेडिकल काउंसिल, और संबंधित पेशेवरों को रजिस्टर्ड कर रही है. सरकार का मकसद केवल फर्जी डॉक्टरों पर नकेल कसना ही नहीं बल्कि इस डेटा का इस्तेमाल पॉलिसी मेकिंग से लेकर डॉक्टरों की आयु वर्ग को भी पहचानने में की जाएगी. सरकार को इससे ये भी पता चलेगा कि किस स्ट्रीम में कितने डॉक्टर काम कर रहे हैं और कितने रिटायर होने वाले हैं, और कितने लोगों की भविष्य में जरूरत होगी. हालांकि इस बारे में नेशनल हेल्थ अथारिटी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है.
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