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काइंडनेस प्रैक्टिस फाउंडेशन ने एसोसिएशन फॉर वूमन इन हेल्थकेयर की शुरुआत की

इस एसोसिएशन का उद्देश्य गैर-संचारी रोगों (NCDs) और पर्यावरणीय स्वास्थ्य से निपटना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

मुंबई में प्रख्यात महिला नेताओं, कॉर्पोरेट अधिकारियों और वैश्विक विचारकों की उपस्थिति में एसोसिएशन फॉर वूमन इन हेल्थकेयर (AWH) का औपचारिक शुभारंभ किया गया. यह पहल काइंडनेस प्रैक्टिस फाउंडेशन के अंतर्गत शुरू की गई है और इसका उद्देश्य महिलाओं को पर्यावरणीय गिरावट के कारण बढ़ रहे गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) के खिलाफ नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाना है. लॉन्च इवेंट में एक संदेश को बार-बार दोहराया गया: "सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य और जीवन के लिए अनिवार्य है."

कार्यक्रम में मानव स्वास्थ्य और ग्रह की भलाई के बीच के महत्वपूर्ण संबंध को उजागर किया गया. डॉ. रचना छाछी, काइंडनेस प्रैक्टिस और AWH™ की संस्थापक, ने बताया कि फाउंडेशन का मिशन सस्टेनेबल न्यूट्रिशन और पर्यावरणीय संरक्षण के माध्यम से NCDs से लड़ना है. डॉ. छाछी ने कहा, "हममें से हर किसी के परिवार या समुदाय में कोई न कोई हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा, COPD, कैंसर या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौती से जूझ रहा है. हमारा लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और ग्रह दोनों के लिए पीड़ा को कम करना है." प्रोफेसर गणेश चन्ना, वर्ल्ड एनवायरनमेंट काउंसिल के संस्थापक और अध्यक्ष ने भी कहा कि महिलाएं सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरणीय बदलाव की मुख्य प्रेरक हैं.

प्रमुख प्रतिभागियों का पैनल

लॉन्च इवेंट में कई बड़े लीडर्ग ने भाग लिया:

1. प्रीति चंद्रशेखर, अध्यक्ष, इंस्टिट्यूट ऑफ एक्चुरियर्स इंडिया
2. डॉ. शिल्पा वोर, चीफ R&D ऑफिसर, Marico
3. डॉ. बानी यादव, भारत की शीर्ष महिला रैली चालक
4. फोरम नागोरी, हेड CSR और सस्टेनेबिलिटी, Tata Power
5. डॉ. अन्नुराग बत्रा, चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ, BW Businessworld
6. डॉ. जवाहर पांजवानी, वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन
7. विक्रम छाछी, एशिया हेड, DHR Global
8. डॉ. मनीषा गुप्ता, वरिष्ठ वैज्ञानिक, ISRO
9. तन्वी शर्मा, UN यूथ एडवोकेट और इनोवेशन लीडर
10 भावना राव, ग्लोबल ऑफरिंग लीड, Accenture
11. अराधना छाछी, संस्थापक – Unhurry®
12. सविता गायकवाड़, लीडरशिप कोच
13. पारुल गोस्सैन, बॉलीवुड पब्लिसिस्ट
14. सुजल चवटे, संस्थापक – Indoor Greens

वैश्विक लॉन्च में खास संदेश

यून यूथ एडवोकेट तन्वी शर्मा ने कहा, "हमारे रोजमर्रा के कार्य पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों पर असर डालते हैं. विकास और महासागर स्वास्थ्य के बीच की खाई को पाटना जरूरी है ताकि भविष्य सशक्त हो."

भारत में अब गैर-संक्रामक रोग कुल मौतों का 63–65% हैं, जो 1990 में 37.9% थे. मानसिक स्वास्थ्य विकार, ऑटोइम्यून और ऑटिज्म जैसी स्थितियां भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो पर्यावरणीय कारकों से जुड़ी हैं. अनुसंधान बताता है कि महिलाएं घर, समुदाय और संगठनों में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

डॉ. जवाहर पांजवानी ने कहा, "सस्टेनेबल न्यूट्रिशन मानव स्वास्थ्य में सुधार और सूजन कम करने का महत्वपूर्ण कारक है. महिलाएं अपने घर और समुदाय में इसे लागू कर, जीवन बदल सकती हैं." इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए काइंडनेस प्रैक्टिस ने सस्टेनेबल न्यूट्रिशन सर्टिफिकेशन के साथ एक ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिससे लोग दुनिया भर में CO2 उत्सर्जन को 3 टन तक कम करने और पृथ्वी की रक्षा करने में सक्षम होंगे.

इस सम्मेलन में सिंगापुर, मुंबई, नई दिल्ली, बैंगलोर, गुरुग्राम, देहरादून और वड़ोदरा सहित विभिन्न शहरों के नेताओं ने अपनी उपस्थिति और भाषणों के माध्यम से इस मिशन के प्रति समर्थन व्यक्त किया. AWH™ एक वैश्विक मंच बनने जा रहा है, जहां महिला नेता स्वास्थ्य देखभाल समाधानों पर सहयोग करेंगी, जो पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी हों और स्वस्थ ग्रह के माध्यम से स्वस्थ समाज सुनिश्चित करें.


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