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Nifty 500 में DII का दबदबा रिकॉर्ड स्तर पर, FII हिस्सेदारी घटी: मोतीलाल ओसवाल
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 भारतीय इक्विटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. इस दौरान वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 49 minutes ago
भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal Financial Services) की एक रिपोर्ट के अनुसार Nifty 500 कंपनियों में DII की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी घटकर 17.1 प्रतिशत रह गई है. यह बदलाव बाजार में बदलते निवेश रुझानों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.
वैश्विक तनावों के बीच उतार-चढ़ाव भरा साल
वित्त वर्ष 2026 भारतीय इक्विटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. इस दौरान वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई. इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने लगातार बाजार को सहारा दिया और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
DII की मजबूत खरीदारी से बाजार को मिला सहारा
2026 की पहली तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 27.2 अरब डॉलर का निवेश किया. इस दौरान सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश प्रवाह ने भी बाजार को मजबूती दी. घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित किया.
खरीदारी से भारी बिकवाली तक
विदेशी निवेशकों का रुख इस अवधि में काफी अस्थिर रहा. फरवरी 2026 में FII ने लगभग 1.7 अरब डॉलर की शुद्ध खरीदारी की, लेकिन मार्च में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण उन्होंने 14.2 अरब डॉलर की भारी बिकवाली कर दी. इस तरह पूरे तिमाही में कुल विदेशी निवेश आउटफ्लो 15.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसने बाजार पर दबाव बढ़ाया.
ओनरशिप पैटर्न में बड़ा बदलाव
मार्च 2026 तक Nifty 500 में FII और DII के बीच ओनरशिप रेशियो घटकर 0.8 गुना रह गया. फ्री फ्लोट में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 360 बेसिस पॉइंट घटकर 33.8 प्रतिशत पर आ गई, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 310 बेसिस पॉइंट बढ़कर 41.2 प्रतिशत तक पहुंच गई. इस अवधि में प्रमोटर होल्डिंग 49.4 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़कर 12.7 प्रतिशत हो गई.
सेक्टर वाइज निवेश में अलग-अलग रणनीति
सेक्टर स्तर पर निवेश रणनीतियों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला. घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 24 में से 21 सेक्टरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, जिसमें प्राइवेट बैंक, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और एनबीएफसी प्रमुख रहे. दूसरी ओर विदेशी निवेशकों ने बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 32.1 प्रतिशत कर दी, जबकि मेटल्स, हेल्थकेयर, यूटिलिटीज और ऑयल-गैस में निवेश बढ़ाया. खास बात यह रही कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में FII की हिस्सेदारी घटकर रिकॉर्ड 7.3 प्रतिशत पर पहुंच गई.
रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार घरेलू संस्थागत निवेशकों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है और वे भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम ताकत बनते जा रहे हैं. यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आती है तो बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है, जबकि लगातार विदेशी निवेश वापसी से बाजार में तेज तेजी देखने को मिल सकती है.
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