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RBI की कटौती का असर सीमित, लोन सस्ते होने की रफ्तार धीमी: BoB रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, RBI की दर कटौती से कर्ज जरूर सस्ता हुआ, लेकिन इसका पूरा फायदा अभी तक ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाया है. बैंकिंग सिस्टम में असमान ट्रांसमिशन इस अंतर की बड़ी वजह बना हुआ है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 47 minutes ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में इसका पूरा लाभ उधारकर्ताओं तक नहीं पहुंच पाया. Bank of Baroda (BoB) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लेंडिंग रेट्स में गिरावट रेपो रेट की तुलना में धीमी रही, जिससे कर्ज सस्ता होने की प्रक्रिया आंशिक ही रही.
125 बेसिस पॉइंट की कटौती, लेकिन असर सीमित
आरबीआई ने फरवरी 2025 से रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 6.50 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था. इसका उद्देश्य कर्ज की लागत कम करना और निजी निवेश को बढ़ावा देना था. हालांकि, BoB की रिपोर्ट बताती है कि बैंकिंग सिस्टम में इस कटौती का असर समान रूप से नहीं दिखा.
लेंडिंग रेट्स में धीमी गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, नए कर्ज पर वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट (WALR) में 93 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई. वहीं, MCLR (Marginal Cost of Funds-based Lending Rate) में केवल 45 बेसिस पॉइंट की कमी दर्ज की गई. यह संकेत देता है कि बैंकों ने पॉलिसी रेट कट का पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया.
डिपॉजिट रेट्स में कटौती का भी असर
इस दौरान बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट को संतुलित रखने के लिए डिपॉजिट रेट्स भी घटाए. इसका असर MCLR जैसे आंतरिक बेंचमार्क पर पड़ा, जिससे लेंडिंग रेट्स में गिरावट की रफ्तार सीमित रही.
अलग-अलग बैंकों में ट्रांसमिशन असमान
रिपोर्ट में पाया गया कि ब्याज दरों में कटौती का असर सभी बैंकों में एक जैसा नहीं था:
1. विदेशी बैंकों में सबसे तेज गिरावट देखी गई
2. निजी बैंकों ने इसके बाद स्थान लिया
3. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे धीमा असर रहा
इसका मुख्य कारण EBLR (External Benchmark Lending Rate) से जुड़े लोन का अनुपात है.
1.विदेशी बैंकों में ~94% लोन EBLR से जुड़े
2. निजी बैंकों में ~89%
3. सार्वजनिक बैंकों में ~51%
जहां यह अनुपात ज्यादा था, वहां दरों में कटौती का असर भी तेज दिखा.
सेक्टर के हिसाब से भी अलग तस्वीर
विभिन्न सेक्टरों में ब्याज दरों का स्तर अलग-अलग रहा, जैसे अनसिक्योर्ड रिटेल लोन 10.1% (सबसे ज्यादा), कृषि लोन 9.81%, रुपये में एक्सपोर्ट क्रेडिट 6.78% (सबसे कम) रहा.
रिटेल सेगमेंट में होम लोन 7.63% (तुलनात्मक रूप से सस्ते), वाहन और एजुकेशन लोन 9% से अधिक रहा.
किन सेक्टर्स को मिला ज्यादा फायदा?
रिपोर्ट के अनुसार एक्सपोर्ट क्रेडिट और एजुकेशन लोन में 160 बेसिस पॉइंट से ज्यादा गिरावट, MSME और अनसिक्योर्ड लोन में भी रेपो कट के अनुरूप कमी आई. वहीं, कृषि, प्रोफेशनल सर्विसेज और बड़े उद्योगों में गिरावट सीमित रही.
उधारकर्ताओं को ₹19,000 करोड़ की बचत
कुल मिलाकर, कम ब्याज दरों से उधारकर्ताओं को लगभग 19,000 करोड़ रुपये की बचत हुई. इसमें सबसे बड़ा योगदान हाउसिंग और MSME लोन का रहा.
रिपोर्ट के मुताबिक, अब ब्याज दर चक्र स्थिरता के करीब है. ऐसे में निकट भविष्य में लेंडिंग रेट्स में बहुत बड़े बदलाव की संभावना कम है, जब तक मौद्रिक नीति में कोई बड़ा संकेत नहीं मिलता.
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