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भारत के फार्मा-हेल्थकेयर डील्स Q1FY26 में स्थिर, 1.9 अरब डॉलर पर टिकी गतिविधि
Grant Thornton Bharat की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का हेल्थकेयर डील मार्केट स्थिर तो है लेकिन सतर्क मोड में आगे बढ़ रहा है. निवेशक अब बड़े सौदों की बजाय डिजिटल हेल्थ, हेल्थटेक और मिड-मार्केट कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत का फार्मा और हेल्थकेयर डील मार्केट वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1FY26) में स्थिर बना रहा. इस दौरान कुल 78 डील्स हुईं, जिनकी संयुक्त वैल्यू 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर रही. हालांकि डील्स की संख्या स्थिर रही, लेकिन बड़ी डील्स की कमी के कारण कुल वैल्यू में नरमी देखी गई. Grant Thornton Bharat की रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों का फोकस अब बड़े सौदों की बजाय मिड-मार्केट और शुरुआती चरण की कंपनियों पर अधिक रहा.
डील वॉल्यूम स्थिर, लेकिन वैल्यू में गिरावट
Q1FY26 में कुल 78 डील्स दर्ज की गईं, जो पिछले ट्रेंड के अनुरूप स्थिरता दिखाती हैं. लेकिन कुल वैल्यू में गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण बड़ी (mega) डील्स का न होना रहा. रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश अब छोटे और मिड-साइज़ सौदों की ओर शिफ्ट हो रहा है, जिससे बाजार में “सेलेक्टिव इन्वेस्टमेंट अप्रोच” दिख रही है.
M&A डील्स में गिरावट, घरेलू सौदे हावी
मर्जर और एक्विजिशन (M&A) सेगमेंट में इस तिमाही में 30 डील्स हुईं, जिनकी कुल वैल्यू 915 मिलियन डॉलर रही. इस दौरान वैल्यू में लगभग 40% की तिमाही गिरावट दर्ज हुई, जबकि अधिकतर डील्स 50 मिलियन डॉलर से कम की रेंज में रहीं. अस्पताल और फार्मा-बायोटेक सेक्टर में छोटे सौदे प्रमुख रहे. घरेलू डील्स का दबदबा कायम रहा, जबकि विदेशी निवेश (inbound deals) कमजोर रहा. इस दौरान एक बड़ी डील में इंफोसिस (Infosys Limited) ने ऑपटिमम (Optimum Healthcare IT) का 465 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया, जिसने कुल डील वैल्यू का बड़ा हिस्सा कवर किया.
प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल में मजबूती
प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियां अपेक्षाकृत मजबूत रहीं. इस सेगमेंट में कुल 45 डील्स हुईं, जिनकी वैल्यू 456 मिलियन डॉलर रही. वॉल्यूम में 22% की तिमाही वृद्धि दर्ज हुई, जबकि वैल्यू में 4% की हल्की बढ़ोतरी देखी गई. यह दिखाता है कि निवेशक अभी भी शुरुआती चरण की हेल्थकेयर कंपनियों में सक्रिय हैं. रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 69% PE डील्स प्री-सीड से सीरीज A राउंड के बीच रहीं और करीब 95% ट्रांजैक्शन 50 मिलियन डॉलर से कम वैल्यू के थे. यह ट्रेंड डिजिटल और टेक-इनेबल्ड हेल्थकेयर बिजनेस में लगातार बढ़ते निवेश को दर्शाता है.
हेल्थटेक और वेलनेस बना निवेश का नया केंद्र
हेल्थटेक, डिजिटल हेल्थ और वेलनेस सेगमेंट इस तिमाही के प्रमुख ड्राइवर बने. निवेशकों की दिलचस्पी AI आधारित डायग्नॉस्टिक्स, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और डिजिटल केयर प्लेटफॉर्म्स में लगातार बढ़ रही है. इसके साथ ही फार्मा और हॉस्पिटल सेक्टर भी कुल डील वैल्यू को सपोर्ट करते रहे.
बड़ी प्राइवेट इक्विटी डील्स
तिमाही की सबसे बड़ी PE डील में क्रिसकैपिटल (ChrysCapital) और अन्य निवेशकों ने नोवार्टिस (Novartis India Limited) में 71% हिस्सेदारी 157 मिलियन डॉलर में खरीदी. वहीं एक अन्य महत्वपूर्ण डील में अल्कम लैबोरेट्रीज (Alkem Laboratories) की मेडटेक यूनिट ने ऑक्लूटेक होल्डिंग एजी (Occlutech Holding AG) में 55% हिस्सेदारी 117 मिलियन डॉलर में अधिग्रहित की.
IPO बाजार सुस्त, QIP में हल्की रिकवरी
IPO गतिविधियां इस तिमाही में लगभग ठप रहीं और सिर्फ एक पब्लिक इश्यू के जरिए 18 मिलियन डॉलर जुटाए गए. हालांकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) में हल्की रिकवरी देखने को मिली, जहां दो इश्यू के जरिए कुल 500 मिलियन डॉलर जुटाए गए. इसमें बड़ा हिस्सा Biocon Limited द्वारा जुटाए गए 461 मिलियन डॉलर से आया.
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