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मुथूट फिनकॉर्प के IPO की राह आसान, सेबी ने 6 फैमिली ट्रस्टों को ओपन ऑफर नियम से दी छूट
सेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत केवल ओपन ऑफर नियमों तक सीमित है. अधिग्रहण करने वाले पक्षों को अन्य सभी लागू नियामकीय प्रावधानों का पालन करना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मुथूट फिनकॉर्प (Muthoot Fincorp) के प्रस्तावित आईपीओ (IPO) से पहले मुथूट परिवार के छह ट्रस्टों को बड़ी राहत दी है. नियामक ने इन ट्रस्टों को मुथूट माइक्रोफिन (Muthoot Microfin) में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी अधिग्रहण के लिए अनिवार्य ओपन ऑफर (Open Offer) नियम से छूट दे दी है. यह फैसला प्रमोटर समूह के आंतरिक पुनर्गठन (Internal Promoter Restructuring) को आसान बनाएगा.
छह मुथूट फैमिली ट्रस्टों को मिली छूट
सेबी ने जिन ट्रस्टों को ओपन ऑफर नियम से छूट दी है, उनमें Thomas John Muthoot (MF) Trust, Thomas George Muthoot (MF) Trust, Thomas Muthoot (MF) Trust, Preethi John Muthoot (MF) Trust, Nina George (MF) Trust और Remmy Thomas (MF) Trust शामिल हैं. पुनर्गठन के तहत ये ट्रस्ट कई चरणों में शेयर हासिल करेंगे. इसमें अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रेफरेंस शेयर (Compulsorily Convertible Preference Shares-CCPS) का इक्विटी में रूपांतरण और प्रमोटरों की पत्नियों से शेयर ट्रांसफर भी शामिल है.
पुनर्गठन के बाद 63.35% हिस्सेदारी होगी
प्रस्तावित लेनदेन पूरा होने के बाद ये छह ट्रस्ट मिलकर मुथूट फिनकॉर्प में 63.35 फीसदी हिस्सेदारी और नियंत्रण अपने पास रखेंगे. मुथूट फिनकॉर्प के पास मुथूट माइक्रोफिन में 50.21 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में सामान्य परिस्थितियों में यह अप्रत्यक्ष अधिग्रहण सेबी के शेयर अधिग्रहण एवं टेकओवर नियम, 2011 के तहत अनिवार्य ओपन ऑफर की शर्त को लागू कर देता. हालांकि, सेबी ने इस मामले में विशेष छूट प्रदान की है.
IPO की तैयारी के तहत हुआ पुनर्गठन
सेबी ने कहा कि उसने मई 2026 में भी इसी तरह के पुनर्गठन प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. हालांकि, इसके तुरंत बाद मुथूट फिनकॉर्प के निदेशक मंडल ने IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इसके चलते कंपनी को सेबी के 'इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स' (ICDR) नियमों के तहत न्यूनतम प्रमोटर योगदान (Minimum Promoters' Contribution-MPC) की शर्तों का पालन करने के लिए पुनर्गठन की संरचना में बदलाव करना पड़ा. साथ ही CCPS को इक्विटी में बदलने की योजना के कारण नई छूट के लिए आवेदन करना पड़ा.
प्रमोटरों के पास बनी रहेगी आवश्यक हिस्सेदारी
पुनर्गठन के बाद Thomas John Muthoot, Thomas George Muthoot और Thomas Muthoot संयुक्त रूप से मुथूट फिनकॉर्प में 28.23 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास बनाए रखेंगे. यह हिस्सेदारी IPO के लिए आवश्यक न्यूनतम प्रमोटर योगदान की शर्त पूरी करने के लिए रखी जाएगी.
सार्वजनिक निवेशकों के हितों पर नहीं पड़ेगा असर
सेबी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह पुनर्गठन परिवार की आंतरिक उत्तराधिकार (Family Succession) योजना का हिस्सा है. इससे मुथूट माइक्रोफिन के नियंत्रण या प्रबंधन में कोई बदलाव नहीं होगा और न ही सार्वजनिक शेयरधारकों के हित प्रभावित होंगे.
नियामक ने कहा कि यह छूट आदेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगी. इस अवधि के भीतर अधिग्रहण पूरा करना होगा और लेनदेन के 21 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) भी जमा करनी होगी. SEBI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत केवल ओपन ऑफर नियमों तक सीमित है. अधिग्रहण करने वाले पक्षों को अन्य सभी लागू नियामकीय प्रावधानों का पालन करना होगा.
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