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बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव
सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने टैक्स बकाया की वसूली से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है. अब बकाया टैक्स की वसूली के लिए गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े प्रावधान नियमों का हिस्सा नहीं होंगे. हालांकि, टैक्स बकाया की वसूली के लिए संपत्ति कुर्क करने और उसकी बिक्री समेत अन्य उपाय जारी रहेंगे. इसके साथ ही वैल्युअर्स और अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर्स को पंजीकरण पूरा करने के लिए छह महीने की अतिरिक्त समय सीमा दी गई है.
सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है. संशोधन के तहत गिरफ्तारी की शक्ति का उल्लेख करने वाले प्रावधान को हटा दिया गया है. इसके अलावा एक अन्य प्रावधान से ‘गिरफ्तारी और हिरासत को छोड़कर’ शब्द भी हटा दिए गए हैं. नियम 225 के कुछ अन्य उप-नियमों को भी समाप्त किया गया है. इन बदलावों को 1 अप्रैल, 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किया गया है.
संपत्ति कुर्की और बिक्री से जारी रहेगी वसूली
ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर ऋचा साहनी के मुताबिक, टैक्स वसूली नियमों से गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधान हटाना एक महत्वपूर्ण बदलाव है. उनके अनुसार, अब व्यक्तिगत गिरफ्तारी निर्धारित टैक्स वसूली प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होगी. हालांकि, संपत्तियों की कुर्की और बिक्री तथा अन्य वसूली तंत्र के जरिए बकाया टैक्स की वसूली जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि यह बदलाव वित्त अधिनियम, 2026 में किए गए बदलावों के अनुरूप है और इससे संपत्ति आधारित टैक्स वसूली के तरीकों पर जोर दिखाई देता है.
वैल्युअर्स और प्रैक्टिशनर्स को 6 महीने की राहत
सीबीडीटी ने वैल्युअर्स और अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर्स के पंजीकरण की समय सीमा भी बढ़ाई है. नियम 246 और 256 के तहत 30 सितंबर, 2026 तक पंजीकरण की समय सीमा थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च, 2027 कर दिया गया है.
आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 514 के तहत वैल्युअर के रूप में पंजीकरण के आवेदन फॉर्म में भी बदलाव किया गया है. संशोधित फॉर्म में आवेदक की व्यक्तिगत जानकारी, संबंधित संपत्ति वर्ग, शैक्षणिक योग्यता, पूर्व रोजगार और पेशेवर अनुभव की जानकारी मांगी जाएगी. इसके अलावा पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए मूल्यांकन कार्यों और मूल्यांकित संपत्तियों का विवरण भी देना होगा.
11 संपत्ति वर्गों के लिए अलग आवेदन
संशोधित व्यवस्था में संपत्तियों को 11 वर्गों में बांटा गया है. इनमें अचल संपत्ति, कृषि भूमि, बागान, वन, खदान और क्वेरी, सिक्योरिटीज, मशीनरी एवं प्लांट, आभूषण और कलाकृतियां शामिल हैं. प्रत्येक संपत्ति वर्ग के लिए अलग आवेदन करना होगा. पंजीकरण आवेदन के लिए 10,000 रुपये का शुल्क निर्धारित है. हालांकि, वेल्थ टैक्स एक्ट, 1957 के तहत पहले से पंजीकृत वैल्युअर्स को इस शुल्क से छूट दी गई है.
आयकर प्रैक्टिशनर्स के लिए भी बदला फॉर्म
सीबीडीटी ने अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर के रूप में पंजीकरण के लिए फॉर्म 171 में भी बदलाव किया है. संशोधित फॉर्म में शैक्षणिक योग्यता और आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मौजूदा पंजीकरण से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी. आवेदक को यह प्रमाणित करना होगा कि वह कम से कम एक वर्ष से आयकर अधिकारियों के समक्ष प्रैक्टिस कर रहा है.
इसके अलावा नियम 176 में भी संशोधन किया गया है. इसके तहत कुछ संचारों को ‘डिजिटल हस्ताक्षर के साथ’ भेजने की अनिवार्यता को बदलकर ‘इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से’ भेजने का प्रावधान किया गया है. ये सभी बदलाव आयकर (चौथा संशोधन) नियम, 2026 के तहत अधिसूचित किए गए हैं.
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