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ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध वाले कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का रास्ता साफ

रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति को 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार, भारत और चीन हो सकते हैं दायरे में

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक व्यापक कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस कानून के तहत अमेरिकी प्रशासन को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. भारत और चीन भी इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं, क्योंकि दोनों देश रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद करते हैं.

इस कानून का आधिकारिक नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है. इसके तहत रूस के अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हितों और मॉस्को के सैन्य अभियानों में सहयोग करने वाली संस्थाओं को निशाना बनाया गया है. कानून में ईरान पर प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है.

यह कानून रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच आया है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 17 सितंबर को इस पैकेज को 262-159 मतों से मंजूरी दी थी. इससे पहले यह विधेयक सीनेट से भी पारित हो चुका था.

रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों पर टैरिफ का प्रावधान

नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति उन देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 100 फीसदी तक शुल्क लगा सकते हैं, जो संबंधित 12 महीने की अवधि में रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हों. इस सूची की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी.

रूस से कच्चे तेल की खरीद के कारण भारत और चीन इस प्रावधान के संभावित दायरे में हैं. इसके अलावा कानून कुछ रूसी सामान पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की अनुमति भी देता है. हालांकि, कानून पर हस्ताक्षर होने का मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन से आने वाले सामान पर 100 फीसदी टैरिफ तत्काल लागू हो गया है. कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ की दर और उसके क्रियान्वयन को लेकर विवेकाधिकार देता है. साथ ही, कुछ निर्धारित परिस्थितियों में छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर असर

भारत पहले ही कह चुका है कि इस तरह के अमेरिकी कानून का द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ सकता है. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्रोतों में विविधता बनाए रखने को प्रतिबद्ध है और अपने व्यापार तथा आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा.

रूस से कच्चे तेल की खरीद लंबे समय से भारत और अमेरिका के बीच चर्चा और मतभेद का एक प्रमुख मुद्दा रही है. 2026 में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.

मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश

इस प्रतिबंध पैकेज का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और यूक्रेन में युद्ध को समर्थन देने वाले राजस्व स्रोतों को सीमित करना है. कानून में रूस के ऊर्जा हितों के साथ-साथ तेल के परिवहन और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले तथाकथित 'शैडो फ्लीट' को भी निशाना बनाया गया है.

कानून अमेरिकी प्रशासन को रूस के ऊर्जा कारोबार और प्रतिबंधों से बचने की गतिविधियों में शामिल विदेशी संस्थाओं पर भी अतिरिक्त दबाव बनाने की क्षमता देता है. इसलिए, वॉशिंगटन इस कानून को किस तरह लागू करता है, उसके आधार पर इसका असर भारत और चीन के अलावा अन्य देशों पर भी पड़ सकता है.

ट्रंप के हस्ताक्षर के साथ रूस के ऊर्जा कारोबार को दंडित करने के लिए अमेरिकी कानूनी ढांचे का विस्तार हुआ है. साथ ही, रूस के प्रमुख तेल खरीदारों पर अमेरिकी बाजार में भारी टैरिफ लगाए जाने का जोखिम भी बढ़ गया है.


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