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पावर प्लांट्स में सिर्फ 9 दिन का कोयला, 42% घटा स्टॉक; लॉजिस्टिक्स बनी बड़ी चुनौती

बिजली की बढ़ती मांग और परिवहन संबंधी दिक्कतों के चलते थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का दबाव बढ़ा, 190 में से 51 प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले के भंडार पर दबाव बढ़ गया है. अगस्त 2026 में पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक सालाना आधार पर करीब 42 फीसदी घटकर 29 मिलियन टन (MT) रह गया, जो एक साल पहले 50 MT था. क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली की बढ़ती मांग के बीच कोयला आधारित बिजली उत्पादन और खपत बढ़ने तथा कोयले की आपूर्ति में परिवहन संबंधी बाधाओं के कारण प्लांट स्तर पर स्टॉक में कमी आई है.

पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक कवर भी एक साल पहले के 17 दिनों से घटकर अगस्त में करीब 9 दिन रह गया. यह नवंबर 2023 के बाद सबसे निचला स्तर है. स्टॉक में गिरावट मुख्य रूप से घरेलू कोयले पर निर्भर पावर प्लांट्स में देखने को मिली है.

5 महीनों में कोयले की खपत 8% बढ़ी

अप्रैल से अगस्त के बीच थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की खपत सालाना आधार पर करीब 8 फीसदी बढ़कर 395 MT हो गई. इसी अवधि में बिजली की मांग 9.5 फीसदी बढ़ी. रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान असामान्य रूप से गर्म गर्मी और सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बिजली की मांग को बढ़ाया. जून से अगस्त के बीच संचयी बारिश दीर्घकालिक औसत से 13 फीसदी कम रही.

अप्रैल-अगस्त के दौरान कुल बिजली उत्पादन भी सालाना आधार पर करीब 10.5 फीसदी बढ़ा, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में 20.7 फीसदी की वृद्धि हुई. हालांकि रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन तेजी से बढ़ा, लेकिन चौबीसों घंटे बिजली की मांग को पूरा करने में कोयला आधारित बिजली की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रही. इससे थर्मल प्लांट्स के कोयला भंडार पर दबाव बढ़ा.

51 पावर प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर

अगस्त में देश के 190 थर्मल पावर प्लांट्स में से 51 में कोयले का स्टॉक गंभीर रूप से कम था. एक साल पहले ऐसे प्लांट्स की संख्या 20 थी. इनमें से ज्यादातर प्लांट घरेलू कोयले पर निर्भर हैं, इसलिए समय पर कोयले की ढुलाई और आपूर्ति इनकी स्थिति के लिए महत्वपूर्ण है.

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के मानदंड के अनुसार, जब किसी पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक निर्धारित मानक स्तर से 25 फीसदी नीचे चला जाता है, तो उसे गंभीर श्रेणी में माना जाता है.

राजस्थान में स्थिति सबसे अधिक दबाव वाली रही, जहां करीब 72 फीसदी कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता वाले प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर था. इसके बाद मध्य प्रदेश में 69 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 60 फीसदी क्षमता ऐसी स्थिति में थी.

बिहार में करीब 45 फीसदी और झारखंड में 48 फीसदी कोयला आधारित क्षमता वाले प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर था. वहीं ओडिशा में यह अनुपात 10 फीसदी और पश्चिम बंगाल में सिर्फ 6 फीसदी रहा.

खदानों पर स्टॉक पर्याप्त, लेकिन परिवहन बना चुनौती

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक सेहुल भट्ट के अनुसार, मार्च 2026 की शुरुआत में 157 MT के उच्च स्तर पर पहुंचा खदानों के मुहाने यानी पिटहेड पर कोयले का स्टॉक अगस्त में घटकर करीब 76 MT रह गया.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट साल की शुरुआत में जमा हुए अतिरिक्त स्टॉक के सामान्य स्तर पर लौटने को दर्शाती है, न कि कोयले की उपलब्धता में व्यापक कमी को. भट्ट ने कहा कि मौजूदा पिटहेड स्टॉक अगस्त 2024 और 2025 के दौरान दर्ज 76.1 MT के औसत के आसपास है. इससे संकेत मिलता है कि स्टॉक में गिरावट के बावजूद कोयले की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है और आपूर्ति पक्ष पर कोई बड़ा दबाव नहीं है. हालांकि, पावर प्लांट्स तक कोयला पहुंचाने में परिवहन क्षमता और बढ़ती मांग के बीच अंतर चुनौती बना हुआ है. पूर्वी कोयला क्षेत्र में लंबे समय तक हुई बारिश से खनन गतिविधियां और कोयले की ढुलाई प्रभावित हुई, जिससे पावर प्लांट्स तक आपूर्ति की गति धीमी हुई.

रेक लोडिंग बढ़ी, लेकिन पावर प्लांट्स तक पहुंच कम रही

अप्रैल से अगस्त के बीच कोयले की रेक लोडिंग करीब 5 फीसदी बढ़ी, जबकि पावर प्लांट्स तक कोयले की प्राप्ति सिर्फ 3 फीसदी बढ़ी. इसके मुकाबले कोयले की खपत 8 फीसदी बढ़ी. इसका मतलब है कि अतिरिक्त कोयला ढुलाई पावर प्लांट्स की बढ़ी हुई खपत के अनुरूप स्टॉक को फिर से भरने के लिए पर्याप्त नहीं रही.

स्थिति को सुधारने के लिए Coal India ने 7 सितंबर 2026 से फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट वाले पावर प्लांट्स को रेल परिवहन के साथ सड़क मार्ग से भी अतिरिक्त कोयला उठाने की अनुमति दी है. उम्मीद है कि सड़क के जरिए अतिरिक्त ढुलाई से रेल आधारित परिवहन को सपोर्ट मिलेगा और कम स्टॉक वाले प्लांट्स तक कोयले की आपूर्ति बढ़ाई जा सकेगी.

दूसरी छमाही में बिजली मांग 6-7% बढ़ने का अनुमान

क्रिसिल इंटेलिजेंस की एसोसिएट डायरेक्टर सुरभि कौशल के मुताबिक, वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बिजली की मांग, कोयला आधारित बिजली उत्पादन, कोयले की खपत और पावर प्लांट्स को कोयले की आपूर्ति में सालाना आधार पर 6-7 फीसदी की वृद्धि हो सकती है.

इस अवधि में बिजली की मांग 860-870 अरब यूनिट रहने का अनुमान है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बिजली मिश्रण में कोयला आधारित उत्पादन की हिस्सेदारी 65-70 फीसदी के आसपास बनी रह सकती है. कौशल के अनुसार, खदानों पर पर्याप्त स्टॉक और कोयले की ढुलाई व्यवस्था में सुधार से बढ़ी हुई आपूर्ति जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है.

मौसम और रेल ढुलाई पर रहेगी नजर

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने पावर प्लांट्स में स्टॉक की हालिया गिरावट को संरचनात्मक आपूर्ति संकट के बजाय मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अस्थायी समस्या माना है. हालांकि, खराब मौसम से खनन और कोयले की ढुलाई प्रभावित होने का जोखिम बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, रेल उपलब्धता और रेक लोडिंग क्षमता में सुधार में देरी होने पर पावर प्लांट स्तर पर स्टॉक का दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है.

क्रिसिल इंटेलिजेंस का कहना है कि पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक ऐतिहासिक औसत 16-18 दिनों के स्तर तक वापस लाने के लिए लगातार अधिक कोयला आपूर्ति जरूरी होगी. आने वाले महीनों में कोयले की ढुलाई और पावर प्लांट्स तक समय पर आपूर्ति बिजली क्षेत्र के लिए अहम बनी रहेगी


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