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Noida TwinTowers: 3 महीने तक फ्लैट में मामूली सी दरार आने पर फ्री में होगी मरम्मत
इन टॉवर्स के बगल में रह रहे लोगों को बिल्डिंग के जमींदोज किए जाए जाने के बाद यह चिंता सता रही है कि क्या उनका आशियाना इसके बाद अगले कई सालों तक सुरक्षित बना रहेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः रविवार को नोएडा के सेक्टर 93ए स्थित विशालकाय Supertech के ट्विन टॉवर्स की इमारत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक साल बाद गिरा दिया गया. अब केवल इस जगह पर टनों मलबा पड़ा है, जिसे उठाने में कम से कम तीन महीने का वक्त लग जाएगा. देश में पहली बार विस्फोटकों के जरिए गिराई गई इतनी ऊंची इमारत का यह पहला वाक्या था. हालांकि अब इन टॉवर्स के बगल में रह रहे लोगों को बिल्डिंग के जमींदोज किए जाए जाने के बाद यह चिंता सता रही है कि क्या उनका आशियाना इसके बाद अगले कई सालों तक सुरक्षित बना रहेगा. विशेष रूप से सुपरटेक और एटीएस विलेज का एक टावर ट्विन टावर्स के काफी करीब हैं.
ऐसे में आपको अगले तीन महीने तक कंपनी की तरफ से इंश्योरेंस का फायदा मिलेगा. विस्फोट से भविष्य में अगर किसी भी फ्लैट में एक हल्की सी दरार भी आई तो उसकी मरम्मत का इंतजाम फ्लैट मालिक को नहीं करना होगा. बल्कि उसको किए गए इंश्योरेंस की मदद से घर की मरम्मत की जाएगी.
100 करोड़ का कराया है कंपनी ने बीमा
ट्विन टावर्स को तोड़े जाने से पहले ही टाटा इंश्योरेंस कंपनी ने मुंबई की एडिफिस कंपनी की ओर से 100 करोड़ का बीमा कराया था. इसकी अवधि एक-दो दिन की नहीं, बल्कि पूरे तीन महीने की होगी.
एडिफिस के उत्कर्ष मेहता ने बताया कि विध्वंस प्रक्रिया के दौरान जोखिम की आशंका भी एक कारक थी. इससे टावर के आसपास की सोसायटियों के फ्लैटों का बीमा कराया गया. इसके लिए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी और टाटा इंश्योरेंस कंपनी से बातचीत हुई. टाटा इंश्योरेंस के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. अगर आसपास के किसी फ्लैट में कोई नुकसान हुआ है तो वह जानकारी दे सकता है. अगर विस्फोट से नुकसान हुआ है, तो निश्चित रूप से इसके लिए बीमा कंपनी से दावा किया जाएगा.
फिलहाल केवल खिड़िकयों के कांच और बाउंड्री वॉल टूटी
हालांकि अभी तक की जानकारी के अनुसार केवल कुछ फ्लैट्स की खिड़कियों में लगा कांच और एटीएस विलेज की तरफ की बाउंड्री वॉल को नुकसान होने की खबर आई है. ट्विन टावर्स को गिराने के लिए 5 करोड़ रुपये सुपरटेक बिल्डर्स से लिए जाएंगे जबकि 15 करोड़ रुपये मलबे को बेचकर इकठ्ठा किए जाएंगे.
250 से 300 करोड़ रुपये हुआ था खर्च
आपको बता दें कि जिस जगह ये ट्विन टावर बना हुआ था, उस जगह की कीमत मौजूदा समय में 10 हजार रुपए प्रति वर्ग फीट है. मतलब ट्विन टावर की कीमत अभी के हिसाब से 1 हजार करोड़ से भी ज्यादा थी, लेकिन विवाद के चलते अगर ट्विन टावर की वैल्यू की बात करें तो इसकी कीमत करीब 800 करोड़ लगाई गई थी. इसे बनाने में 250 से 300 करोड़ के बीच खर्च हुआ था.
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