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स्टेशनरी बेचने से IIGJ के CEO तक... देबाशीष बिस्वास की 30 साल की प्रेरक यात्रा

बैंकिंग से शिक्षा जगत तक 30 साल का सफर, 60 हजार से ज्यादा छात्रों को दे चुके हैं मार्गदर्शन देवाशीष बिस्वास

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

आज यानी 14 अगस्त को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी (IIGJ) के CEO देबाशीष बिस्वास का जन्मदिन है. यह अवसर उनके तीन दशक से अधिक लंबे और बहुआयामी पेशेवर सफर को याद करने का भी है. बैंकिंग, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, मीडिया और शिक्षा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले बिस्वास ने कॉर्पोरेट लीडर और उद्यमी के साथ-साथ एक समर्पित मेंटर के रूप में भी हजारों युवाओं के भविष्य को दिशा दी है. लगातार सीखने, नई चुनौतियों को स्वीकार करने और खुद को समय के साथ ढालने की उनकी सोच ही उनकी इस प्रेरक यात्रा को खास बनाती है.

देबाशीष बिस्वास की सफलता की कहानी किसी सीधी और आसान यात्रा की तरह नहीं रही है. कॉर्पोरेट बोर्डरूम और CXO एडवाइजरी की दुनिया में पहुंचने से पहले उन्होंने दुकान-दुकान जाकर स्टेशनरी और येलो-पेज विज्ञापन बेचे. उन्होंने एक छोटी विज्ञापन कंपनी में ऑफिस असिस्टेंट के रूप में भी काम किया और एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ में फील्ड ऑफिसर की जिम्मेदारी भी संभाली.

इन शुरुआती अनुभवों के बाद करीब तीन दशक पहले उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय बैंक में बड़ा अवसर मिला, जिसने उनके कॉर्पोरेट करियर की मजबूत नींव रखी. इसके बाद उन्होंने HDFC Bank, Standard Chartered Bank, Amway India, Tata Teleservices, Disney Star, CIMA UK और Macmillan Education जैसी प्रमुख संस्थाओं के साथ काम किया. बाद में उन्होंने IIGJ की कमान संभाली.

जूनियर ऑफिसर से CEO तक का सफर

बिस्वास ने 1992 में एक जूनियर ऑफिसर के रूप में अपने कॉर्पोरेट करियर की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने GM, AVP और बिजनेस हेड जैसी क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिकाएं निभाईं. समय के साथ वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर VP South Asia, VP Global Institutional Alliances, Country Head और CEO जैसे पदों तक पहुंचे.

उन्होंने अपने करियर के दौरान कई बहुसांस्कृतिक और अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में कारोबार को विकसित और विस्तार देने का काम किया. उन्हें ब्रिटेन, UAE, इजरायल, मॉरीशस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, सिंगापुर, मलेशिया, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में काम करने का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी मिला.

26 साल के कॉर्पोरेट करियर के बाद चुनी उद्यमिता की राह

साल 2019 में लगातार 26 वर्षों तक कॉर्पोरेट जगत में काम करने के बाद देबाशीष बिस्वास ने उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाया. उन्होंने CXO एडवाइजरी, मैनेजमेंट कंसल्टिंग, लीडरशिप ट्रेनिंग और कोचिंग पर केंद्रित अपना वेंचर शुरू किया.

इसके दो साल बाद उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और प्रोफेशनल्स के लिए लीडरशिप कम्युनिकेशन पर काम करने वाली एक LLP की सह-स्थापना की. यह उनके उस जुनून का विस्तार था, जिसने उनके करियर के एक बड़े हिस्से को परिभाषित किया है.

60,000 से ज्यादा छात्रों के मेंटर

युवाओं का मार्गदर्शन देवाशीष बिस्वास के करियर का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहा है. पिछले 16 वर्षों में उन्होंने देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के 60,000 से अधिक छात्रों को मेंटर किया है.

अहमदाबाद से इलाहाबाद, भोपाल से बेंगलुरु और कोच्चि से कटक तक विभिन्न शहरों में उन्होंने युवाओं के साथ काम किया है. आज भी वे यह काम प्रो बोनो आधार पर जारी रखे हुए हैं. वे भारत और विदेशों की कई शैक्षणिक संस्थाओं और गैर-लाभकारी संगठनों के साथ मेंटर, सलाहकार और गवर्निंग काउंसिल सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं.

औसत छात्र से लगातार सीखने वाले प्रोफेशनल तक

देबाशीष बिस्वास खुद को स्कूल के दिनों में एक औसत से नीचे का छात्र बताते हैं, लेकिन उनकी शैक्षणिक यात्रा लगातार खुद को बेहतर बनाने की उनकी सोच को दर्शाती है. उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया और IMT गाजियाबाद से मार्केटिंग में MBA की डिग्री हासिल की. इसके अलावा उन्होंने मैनेजमेंट में M.Phil भी किया है. उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में IIM कलकत्ता और IIT दिल्ली के सर्टिफिकेट प्रोग्राम, ICF-मान्यता प्राप्त लीडरशिप कोच सर्टिफिकेशन और Lean Six Sigma Black Belt भी शामिल हैं.

संगीत भी है जिंदगी का अहम हिस्सा

कॉर्पोरेट और शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ संगीत भी देबाशीष बिस्वास की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. उन्होंने वेस्टर्न क्लासिकल वायलिन की ट्रेनिंग ली है और ट्रेनिंग के पहले ही वर्ष में गोल्ड मेडल हासिल किया था.

उनके पास ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक, लंदन से ग्रेड 6 का सर्टिफिकेट भी है. वह लंबे समय तक प्रोफेशनल सिंथेसाइजर बजाते रहे हैं और गायन भी करते हैं. संगीत में किशोर कुमार और केके उनके पसंदीदा कलाकारों में शामिल हैं.

नेतृत्व का मतलब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि प्रभाव पैदा करना

अपने जन्मदिन के अवसर पर उनके सहयोगी और मेंटीज उनके करियर की एक खास विशेषता को रेखांकित करते हैं. उनके अनुसार, देबाशीष बिस्वास के लिए नेतृत्व का अर्थ केवल बिजनेस ग्रोथ को मैनेज करना नहीं है, बल्कि लोगों को सक्षम बनाना, सकारात्मक प्रभाव पैदा करना और ऐसी संस्थाएं तैयार करना है जो बदलते समय के साथ प्रासंगिक और मजबूत बनी रहें.

देबाशीष बिस्वास की तीन दशक लंबी यात्रा यह भी दिखाती है कि करियर हमेशा एक सीधी रेखा में आगे नहीं बढ़ता. अलग-अलग भूमिकाएं, नई चुनौतियां, लगातार सीखने की इच्छा और दूसरों को आगे बढ़ाने की सोच ही एक व्यक्ति की वास्तविक पहचान और नेतृत्व क्षमता को आकार देती है.


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