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दवाओं और जांचों के नाम हिंदी में लिखें डॉक्टर, ब्रजेश पाठक ने की अपील
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, चिकित्सा व्यवस्था में हिंदी और भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल से मरीजों को इलाज समझने में मिल सकती है आसानी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है. उन्होंने चिकित्सकों को लिखे पत्र को शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी साझा किया. उनका कहना है कि इससे मरीजों को यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें कौन सी दवा दी जा रही है और कौन सी जांच कराने की सलाह दी गई है.
"राष्ट्र नायकों की अभिलाषा
चले देश में देशज भाषा"
मेरे द्वारा सभी प्रिय चिकित्सक बन्धुओं से आग्रह किया गया है कि दवाओं एवं जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखें ताकि मरीज को पता रहे कि वह कौन सी दवा खा रहे हैं। मैं निजी तौर पर उन दवाओं को प्राथमिकता दूंगा जिनके नाम… pic.twitter.com/s5YAU16qI6
— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) September 25, 2026
पाठक ने अपने संदेश में लिखा, "राष्ट्र नायकों की अभिलाषा, चले देश में देशज भाषा." इसके साथ उन्होंने चिकित्सकों से दवाओं एवं जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है, ताकि मरीज को यह पता रहे कि वह कौन सी दवा ले रहा है.
उन्होंने अपने पत्र में चिकित्सा व्यवस्था में भारतीय भाषा के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया है. चिकित्सा क्षेत्र में दवाओं, जांचों और उपचार से जुड़ी कई जानकारियां आमतौर पर अंग्रेजी में लिखी जाती हैं. ऐसे में हिंदी या मरीज की समझ की भाषा में जानकारी मिलने से उसे अपने इलाज से जुड़ी बातों को समझने में सुविधा हो सकती है.
मरीज को इलाज की जानकारी समझाने पर जोर
चिकित्सक और मरीज के बीच संवाद इलाज की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. दवा का नाम, उसकी मात्रा, जांच की जानकारी और चिकित्सकीय सलाह मरीज को स्पष्ट रूप से समझ में आना जरूरी है. ऐसे में मरीज की भाषा में जानकारी उपलब्ध कराने से चिकित्सा संबंधी निर्देशों को समझने और उनका पालन करने में मदद मिल सकती है.
पाठक की अपील इसी व्यापक मुद्दे से जुड़ी है. उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया है कि दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखे जाएं, ताकि मरीज को यह जानने में आसानी हो कि उसे क्या दवा दी गई है और कौन सी जांच कराने के लिए कहा गया है.
25 सितंबर को दीनदयाल उपाध्याय की जयंती
पाठक ने यह अपील 25 सितंबर को की है, जो एकात्म मानव दर्शन के प्रतिपादक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती भी है. अपने संदेश में उन्होंने भारतीय भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही है.
उनके संदेश का फोकस चिकित्सा क्षेत्र में भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल पर है. इसका एक उद्देश्य मरीजों के लिए चिकित्सा संबंधी जानकारी को अधिक सहज और समझने योग्य बनाना है. हालांकि दवाओं और जांचों के नाम लिखते समय वैज्ञानिक नाम, ब्रांड नाम और अन्य जरूरी चिकित्सकीय विवरणों की स्पष्टता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है.
हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं की भी गुंजाइश
भारत में मरीजों की भाषाई पृष्ठभूमि अलग-अलग है. हिंदी भाषी क्षेत्रों के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, कन्नड़, मलयालम, गुजराती समेत कई भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल होता है. ऐसे में चिकित्सा संवाद को मरीज की सुविधा और भाषाई पृष्ठभूमि के अनुरूप बनाने की जरूरत पर भी चर्चा होती रही है.
मरीज अगर डॉक्टर की सलाह को अपनी समझ की भाषा में बेहतर तरीके से समझता है तो दवा लेने, जांच कराने और उपचार से जुड़ी सावधानियों का पालन करना उसके लिए आसान हो सकता है. इसी वजह से चिकित्सा क्षेत्र में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल को मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं से भी जोड़कर देखा जाता है.
भाषा की बाधा कम करने की कोशिश
चिकित्सा विज्ञान की अपनी तकनीकी शब्दावली है, लेकिन मरीज के लिए यह समझना जरूरी है कि उसे कौन सी दवा लेनी है, किस जांच की जरूरत है और उपचार के दौरान किन बातों का ध्यान रखना है. ऐसे में चिकित्सा संबंधी जरूरी जानकारी को मरीज की समझ की भाषा में उपलब्ध कराना डॉक्टर और मरीज के बीच संवाद को आसान बनाने में मदद कर सकता है.
ब्रजेश पाठक की चिकित्सकों से की गई अपील इसी दिशा में है. उन्होंने दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है, ताकि चिकित्सा संबंधी जानकारी मरीजों के लिए अधिक स्पष्ट और सहज हो सके.
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