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त्योहारी सीजन में कैश ऑन डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज? सरकार ने ई‑कॉमर्स कंपनियों पर कसा शिकंजा
त्योहारी सेल के दौरान ग्राहकों को लुभाने की कोशिशों के बीच अगर कंपनियां गलत तरीके अपनाती हैं तो सरकार सख्त कार्रवाई के लिए तैयार है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
त्योहारी सीजन में जीएसटी कटौती से जहां बाजार में बिक्री के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, वहीं कुछ ई‑कॉमर्स कंपनियों की चालाकियों से उपभोक्ता परेशान हैं. दरअसल, 'कैश ऑन डिलीवरी' (COD) विकल्प पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने और रिफंड में देरी जैसी शिकायतों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है और इसे ‘डार्क पैटर्न’ करार देते हुए कहा है कि उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन पर अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी.
"डार्क पैटर्न" के जरिए उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को एक्स (X) पर एक पोस्ट करते हुए बताया है कि मंत्रालय को कई शिकायतें मिली हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां कैश ऑन डिलीवरी के लिए अतिरिक्त चार्ज ले रही हैं या जानबूझकर इस विकल्प को कम आकर्षक बना रही हैं. जोशी ने कहा, “इस तरह की गतिविधियों को ‘डार्क पैटर्न’ कहा जाता है, जिसमें उपभोक्ताओं को गुमराह कर उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है.” उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय इन प्लेटफॉर्म्स की गहराई से जांच कर रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
त्योहारी सीजन में बिक्री का रिकॉर्ड टूटा, पर ग्राहक परेशान
GST में कटौती के बाद उपभोक्ताओं को 400 से ज्यादा वस्तुएं सस्ते दामों पर मिल रही हैं. इसके चलते नवरात्र के दौरान सभी श्रेणियों में बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. कार, दोपहिया वाहन, बड़े स्क्रीन वाले टीवी और स्मार्टफोन जैसे प्रोडक्ट्स की बिक्री में भारी तेजी आई है. हालांकि, इस बिक्री उछाल के बीच कई ग्राहकों ने शिकायत की है कि कैश ऑन डिलीवरी विकल्प चुनने पर अतिरिक्त शुल्क जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्राहक इसे न चुनें. दूसरा शिकायत ये मिली है कि प्रीपेड ऑर्डर कैंसिल होने के बावजूद रिफंड में देरी हो रही है.
ई-कॉमर्स कंपनियों से मांगा गया जवाब
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में संबंधित ई-कॉमर्स कंपनियों से जवाब तलब किया जा रहा है. मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जीएसटी राहत और त्योहारों की बिक्री का वास्तविक लाभ ग्राहकों तक पहुंचे, न कि मुनाफाखोरी का जरिया बने.
ग्राहक अधिकारों के उल्लंघन पर नहीं होगी रियायत
सरकार ने पहले भी यह स्पष्ट किया है कि जीएसटी में दी गई राहत अगर उपभोक्ताओं को नहीं पहुंचाई जाती, तो उस पर वित्तीय दंड और कार्रवाई की जाएगी. मंत्रालय की फील्ड टीमें बाजार में सक्रिय हैं और ग्राहक शिकायतों की मॉनिटरिंग की जा रही है.
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