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अगस्त में खुदरा महंगाई 2% के पार, एसबीआई रिसर्च ने दी राहत की उम्मीद
मानसून और खाद्य कीमतों से निकट भविष्य में दबाव, पर मध्यम अवधि में महंगाई घटने की उम्मीद जताई गई
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
देश की खुदरा महंगाई अगस्त में 2 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कीमतों का दबाव धीरे-धीरे कम होगा. हालांकि निकट भविष्य में मानसूनी बारिश और खाद्य पदार्थों की कीमतें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नीतिगत राह को जटिल बना सकती हैं.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) महंगाई अगस्त में बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 1.55 प्रतिशत थी. खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में तेजी आने से यह वृद्धि दर्ज हुई. कोर इन्फ्लेशन 4.16 प्रतिशत पर पहुंच गया. ग्रामीण महंगाई 1.69 प्रतिशत रही, जबकि शहरी महंगाई 2.47 प्रतिशत दर्ज हुई.
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के बाद का परिदृश्य अपेक्षाकृत बेहतर दिख रहा है. रिपोर्ट का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कमी का असर कीमतों पर दिखेगा. “वित्त वर्ष 2026-27 में सीपीआई महंगाई 65 से 75 आधार अंकों तक कम हो सकती है. इसमें आवश्यक वस्तुओं पर 25-30 आधार अंकों और सेवाओं पर 40-45 आधार अंकों की गिरावट शामिल होगी.”
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना जैसे प्रमुख फसल उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से निकट भविष्य में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. 1 अगस्त से 11 सितंबर तक राष्ट्रीय वर्षा सामान्य से 8.7 प्रतिशत अधिक रही, जबकि कुछ राज्यों में यह 100 प्रतिशत से भी ऊपर दर्ज हुई.
“यह चिंता की बात है क्योंकि प्रभावित राज्य भारत के बड़े खरीफ फसल उत्पादक हैं,” एसबीआई रिसर्च ने कहा. हालांकि, देश के सबसे बड़े अनाज उत्पादक उत्तर प्रदेश में अब तक मौसम की चरम स्थितियों से बचाव रहा है.
क्षेत्रीय स्तर पर महंगाई में बड़ा अंतर देखा गया. अगस्त में 35 में से 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महंगाई 4 प्रतिशत से नीचे रही. वहीं केरल में नारियल तेल की कीमतों और व्यक्तिगत देखभाल व सोने के उच्च भार के चलते महंगाई 9.04 प्रतिशत पर पहुंच गई. लक्षद्वीप एकमात्र ऐसा अन्य क्षेत्र रहा जहां महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर रही.
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में महंगाई दर 2 प्रतिशत के स्तर से थोड़ी ही ऊपर रही है, लेकिन आरबीआई द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है. “अगस्त का आंकड़ा थोड़ा ऊंचा रहने के कारण अक्टूबर में दर कटौती मुश्किल दिख रही है. यहां तक कि दिसंबर में भी दर कटौती कठिन होगी यदि पहली और दूसरी तिमाही की वृद्धि के आंकड़े देखें जाएं,” रिपोर्ट में कहा गया.
कुल मिलाकर बैंक ने निष्कर्ष निकाला कि मौसम की अनिश्चितता और खाद्य कीमतों की अस्थिरता से अल्पकालिक चुनौतियां बनी रह सकती हैं. लेकिन मध्यम अवधि में महंगाई का रुख अनुकूल दिखता है, जो भविष्य में केंद्रीय बैंक को नीति निर्धारण के लिए पर्याप्त गुंजाइश देगा.
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