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दृष्टिहीन-बधिर महिलाओं ने मांगी नेतृत्व में बराबर भागीदारी, जनगणना 2027 में सटीक आंकड़ों की उठाई मांग
सेंस इंडिया के मुताबिक, सटीक आंकड़ों के अभाव में यह समुदाय नीतियों, सरकारी योजनाओं और सेवाओं में अदृश्य रह सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
देशभर से दिल्ली पहुंचीं दृष्टिहीन-बधिर महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि उन्हें केवल सहायता और देखभाल की जरूरत वाले लोगों के रूप में नहीं, बल्कि अधिकार-धारक, अधिवक्ता और नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जाना चाहिए. उड़ान नेटवर्क की पहल के तहत शुक्रवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित संवाद में महिलाओं ने अपनी चुनौतियां साझा कीं और जनगणना 2027 में दृष्टिहीन-बधिर लोगों के सटीक आंकड़े दर्ज करने के साथ सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं की जानकारी सुलभ प्रारूपों में उपलब्ध कराने की मांग की. सेंस इंटरनेशनल इंडिया (सेंस इंडिया) की ओर से ‘दृष्टिहीन-बधिर लड़कियों और महिलाओं की नेतृत्व और वकालत कौशल का निर्माण’ विषय पर चर्चा की गई. सेंस इंडिया के दृष्टिहीन-बधिर वयस्कों के नेटवर्क ‘उड़ान नेटवर्क’ ने महिलाओं को सीधे मीडिया से संवाद करने का मंच दिया.
नेतृत्व और भागीदारी के लिए तीन प्रमुख मांगें
कार्यक्रम में तीन प्रमुख मांगों पर जोर दिया गया. पहली, दृष्टिहीन-बधिर लड़कियों और महिलाओं को अपने लिए बोलने और नेतृत्व करने के वास्तविक अवसर दिए जाएं. दूसरी, दृष्टिहीन-बधिरता को जनगणना 2027 और अन्य आधिकारिक आंकड़ों में सटीक रूप से दर्ज किया जाए. तीसरी, सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, चुनाव और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी जानकारी सुलभ प्रारूपों में उपलब्ध कराई जाए.
उत्तराखंड की कलाकार और शिक्षिका बनने की आकांक्षा रखने वाली आशा पटवाल, शिलॉन्ग की बेकर मेडन सोबेन लिंगखोई, कोलकाता की नर्तकी और उद्यमी एलिस, अहमदाबाद की कैफे प्रोफेशनल और कलाकार डोडियार महेश्वरी तथा वायनाड की स्वतंत्र पेशेवर और अधिवक्ता गंगा ने अपने अनुभव साझा किए.
‘समावेश का मतलब सिर्फ मौजूदगी नहीं’
कार्यक्रम में कहा गया कि दृष्टिहीन-बधिर लड़कियों और महिलाओं को लिंग, विकलांगता, संचार और पहुंच से जुड़ी कई परस्पर जुड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है. इन कारणों से शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक जीवन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी प्रभावित होती है.
महिलाओं ने कहा कि समावेश का अर्थ केवल किसी मंच पर मौजूद होना नहीं है. उन्हें अपनी बात रखने, फैसलों को प्रभावित करने और नेतृत्व करने की शक्ति और अवसर भी मिलना चाहिए.
जनगणना 2027 में सटीक आंकड़ों की मांग
कार्यक्रम में जनगणना 2027 में दृष्टिहीन-बधिर लोगों, खासकर महिलाओं और लड़कियों से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े दर्ज करने की जरूरत पर जोर दिया गया. सेंस इंडिया के मुताबिक, सटीक आंकड़ों के अभाव में यह समुदाय नीतियों, सरकारी योजनाओं और सेवाओं में अदृश्य रह सकता है.
सेंस इंटरनेशनल इंडिया के सीईओ उत्तम कुमार ने कहा कि करीब तीन दशकों के अनुभव ने दिखाया है कि दृष्टिहीन-बधिर लड़कियां और महिलाएं जानती हैं कि क्या बदलने की जरूरत है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने और सुने जाने के अवसर कम मिलते हैं. उन्होंने कहा कि जनगणना 2027 में दृष्टिहीन-बधिरता और RPwD Act के तहत मान्यता प्राप्त सभी 21 निर्दिष्ट विकलांगताओं को सटीक रूप से दर्ज करना जरूरी है.
ब्रेल से डिजिटल प्रारूप तक सुलभ जानकारी की मांग
कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी जानकारी दृष्टिहीन-बधिर लोगों की व्यक्तिगत संचार जरूरतों के अनुरूप उपलब्ध कराने की मांग की गई. इसके लिए ब्रेल, बड़े प्रिंट, स्पर्श संचार, स्पर्श सांकेतिक भाषा और सुलभ डिजिटल प्रारूप जैसे विकल्पों को महत्वपूर्ण बताया गया.
महिलाओं ने कहा कि उनके जीवन से जुड़े फैसले लेने के बाद उन्हें चर्चा में शामिल करना पर्याप्त नहीं है. उन्हें शुरुआत से ही निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए और नेतृत्व के लिए सक्षम बनाया जाना चाहिए.
‘देखभाल पाने वालों’ से अधिकार-धारकों तक
इस पहल का उद्देश्य दृष्टिहीन-बधिर लड़कियों और महिलाओं को केवल सहायता और देखभाल की प्राप्तकर्ता मानने वाली सोच को बदलना है. उड़ान नेटवर्क के जरिए उन्हें अधिकार-धारक, अधिवक्ता, योगदानकर्ता और नेता के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने का मंच दिया गया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन दृष्टिहीन-बधिर क्षेत्रीय केंद्रों (DBRC), उड़ान नेटवर्क के सदस्यों और सेंस इंडिया के राज्य साझेदार संगठनों के सहयोग से किया गया. इन संगठनों ने महिलाओं को मीडिया संवाद के लिए तैयार करने के साथ जरूरी मार्गदर्शन, पहुंच और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई. इस पहल को डिसेबिलिटी राइट्स फंड (DRF) का समर्थन प्राप्त है.
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