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मर्सिडीज-बेंज इंडिया की 2025 में बिक्री 2.85% घटी, BMW ने बढ़ाया मार्केट शेयर, रणनीति में बदलाव के संकेत
पांच साल की लगातार वृद्धि के बाद मर्सिडीज-बेंज इंडिया की सालाना बिक्री में पहली बार गिरावट आई है. एंट्री और कोर लग्जरी सेगमेंट में कमजोरी के बीच BMW की 14 फीसदी की मजबूत वृद्धि बढ़ती प्रतिस्पर्धा को रेखांकित करती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
पांच साल तक लगातार वृद्धि दर्ज करने के बाद मर्सिडीज-बेंज इंडिया की कैलेंडर वर्ष 2025 में रिटेल बिक्री सालाना आधार पर 2.85 फीसदी घटकर 19,007 यूनिट रह गई, जबकि 2024 में कंपनी ने 19,565 यूनिट की बिक्री की थी. यह 2020 के बाद कंपनी की पहली सालाना बिक्री गिरावट है और संकेत देती है कि ‘वॉल्यूम के बजाय वैल्यू’ को प्राथमिकता देने की उसकी रणनीति एंट्री और कोर लग्जरी सेगमेंट में उसकी पकड़ को कमजोर कर रही है.
मर्सिडीज-बेंज लगातार रिकॉर्ड राजस्व की बात कर रही है, जिसे हाई-मार्जिन टॉप-एंड व्हीकल्स (TEVs), AMG मॉडल्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) से बढ़ावा मिल रहा है. हालांकि, एंट्री-लेवल बिक्री में तेज गिरावट एक ऐसी कमजोरी को उजागर करती है, जिसका प्रतिद्वंद्वी कंपनियां तेजी से फायदा उठा रही हैं.
एंट्री लग्जरी सेगमेंट की कमजोरी ने ग्रोथ पर असर डाला
गिरावट मुख्य रूप से एंट्री लग्जरी पोर्टफोलियो में केंद्रित रही, जिसमें सालाना आधार पर 20 फीसदी की गिरावट आई और यह कुल बिक्री का केवल 13 फीसदी रह गया. A-Class, GLA और बेस C-Class वेरिएंट जैसे मॉडल पहली बार लग्जरी कार खरीदने वाले ग्राहकों को आकर्षित करने में संघर्ष कर रहे हैं. इसकी बड़ी वजह कीमतों में तेज बढ़ोतरी और आक्रामक डिस्काउंटिंग का अभाव है. जर्मन कार निर्माता ने ब्रांड इक्विटी बनाए रखने के लिए जानबूझकर यह रणनीति अपनाई है.
वहीं, कोर सेगमेंट ने कुल बिक्री में 62 फीसदी का योगदान दिया, जबकि टॉप-एंड व्हीकल्स की हिस्सेदारी 25 फीसदी रही. ये आंकड़े भले ही स्वस्थ नजर आएं, लेकिन डेटा एक असंतुलित पोर्टफोलियो को उजागर करता है, जो प्रीमियम और खास ग्राहकों पर काफी हद तक निर्भर है. इससे मर्सिडीज हाई-वॉल्यूम और प्रतिस्पर्धी मिड-लग्जरी सेगमेंट में कमजोर स्थिति में आ जाती है.
टॉप-एंड व्हीकल्स और AMG पर्याप्त नहीं
S-Class, Mercedes-Maybach और AMG पोर्टफोलियो समेत मर्सिडीज-बेंज के टॉप-एंड व्हीकल्स की बिक्री में 11 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि अकेले AMG में सालाना आधार पर 34 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी हुई. EV पोर्टफोलियो में 12 फीसदी की वृद्धि हुई और BEV ने टॉप-एंड बिक्री में 20 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की. यह हाई-टिकट प्रोडक्ट्स पर कंपनी के स्पष्ट फोकस को दर्शाता है. हालांकि, ये बढ़त राजस्व को समर्थन देती हैं, लेकिन एंट्री सेगमेंट में हुए वॉल्यूम नुकसान की भरपाई नहीं कर सकतीं. इस सेगमेंट में ऐसे ग्राहक तेजी से प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की ओर जा रहे हैं, जो बेहतर कीमत, फाइनेंसिंग और नए EV विकल्प पेश कर रही हैं.
BMW इंडिया ने बढ़ाई रफ्तार
BMW इंडिया से मिल रही प्रतिस्पर्धा अब साफ तौर पर दिखाई दे रही है. CY2025 में BMW ग्रुप इंडिया ने रिकॉर्ड 18,001 कारों की बिक्री की, जिसमें 17,271 BMW यूनिट्स और 730 MINI कारें शामिल थीं. यह सालाना आधार पर 14 फीसदी की वृद्धि है. BMW की सफलता के पीछे व्यापक प्रोडक्ट रेंज, आक्रामक फाइनेंसिंग और EV सेगमेंट में समय पर एंट्री जैसे कारण हैं. इससे कंपनी उन ग्राहकों को आकर्षित करने में सफल रही है, जो पहले एंट्री-लेवल मर्सिडीज मॉडल चुन सकते थे.
रणनीतिक फैसला या बाजार को गलत समझने की चूक?
मर्सिडीज-बेंज लगातार ‘वॉल्यूम के बजाय वैल्यू’ पर जोर दे रही है. कंपनी ब्रांड इक्विटी और रीसेल वैल्यू को सुरक्षित रखने के लिए डिस्काउंटिंग से बच रही है. हालांकि, यह रणनीति प्रीमियम इमेज को बनाए रखने में मदद करती है, लेकिन CY2025 के आंकड़े बाजार की वास्तविकताओं के साथ संभावित असंतुलन की ओर इशारा करते हैं. BMW जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के पहली बार लग्जरी कार खरीदने वाले ग्राहकों के बीच पकड़ मजबूत करने और एंट्री सेगमेंट के भविष्य के टॉप-एंड ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण पाइपलाइन होने के बीच मर्सिडीज को भारत के तेजी से बढ़ते लग्जरी सेगमेंट में अपनी जमीन गंवाने का जोखिम है.
विरोधाभास साफ है. मर्सिडीज-बेंज का राजस्व मजबूत गति से बढ़ रहा है, लेकिन कंपनी उन आकांक्षी ग्राहकों से दूर होती जा रही है, जो भारत के लग्जरी कार बाजार का भविष्य तय करेंगे. अगर BMW 2026 में अपनी रफ्तार बरकरार रखती है, तो मर्सिडीज को लग सकता है कि उसकी प्रीमियम-केंद्रित रणनीति मार्जिन तो सुरक्षित रखती है, लेकिन व्यापक लग्जरी बाजार में उसकी प्रासंगिकता को नुकसान पहुंचा रही है.
उत्कर्ष अग्रवाल, BW रिपोर्टर्स
(BW ऑटो वर्ल्ड, BW बिजनेसवर्ल्ड के ऑटोमोटिव वर्टिकल के एडिटोरियल लीड और BW बिजनेसवर्ल्ड के स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में उत्कर्ष तेजी से बदलते ऑटोमोटिव और टेक्नोलॉजी परिदृश्य के केंद्र में काम करते हैं, जहां कहानी सिर्फ उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजनेस, पॉलिसी और बदलते उपभोक्ता व्यवहार तक फैली हुई है. उनका काम प्रोडक्ट रिव्यू, एग्जीक्यूटिव इंटरव्यू और फीचर स्टोरीज तक फैला है, जो भारत के ऑटोमोटिव और टेक्नोलॉजी सेक्टर को आकार देने वाली ताकतों पर नजर रखते और उनका विश्लेषण करते हैं. अपने मुख्य ऑटोमोटिव और टेक कवरेज के साथ-साथ उन्हें राजनीतिक, लाइफस्टाइल और ट्रैवल कंटेंट तैयार करने का भी पूर्व अनुभव है.)
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