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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर के रिकॉर्ड स्तर से 50 अरब डॉलर घटकर 734.6 अरब डॉलर
लगातार चौथे सप्ताह घटा विदेशी मुद्रा भंडार, रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच RBI का हस्तक्षेप जारी; कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी पूंजी निकासी ने बढ़ाई चिंता
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार चौथे सप्ताह घटकर 734.6 अरब डॉलर रह गया है. सितंबर में 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब इसमें करीब 50 अरब डॉलर की गिरावट आ चुकी है. रुपये पर बढ़ते दबाव को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप बढ़ाए जाने के बीच भंडार में यह कमी आई है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बढ़ती निकासी ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है.
4 सितंबर को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. इसके बाद पांच सप्ताह से भी कम समय में इसमें करीब 51 अरब डॉलर की कमी आई है. यह गिरावट बताती है कि विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रहा है.
रुपये को संभालने के लिए RBI का हस्तक्षेप बढ़ा
विदेशी मुद्रा भंडार में ताजा गिरावट RBI की ओर से स्पॉट मार्केट में डॉलर की बिक्री और डॉलर-रुपये की बिक्री/खरीद वाले विदेशी मुद्रा स्वैप के इस्तेमाल को दर्शाती है. इन कदमों का उद्देश्य रुपये में गिरावट को नियंत्रित करने के साथ बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को भी मैनेज करना है.
हालांकि, RBI के हस्तक्षेप के बावजूद रुपये पर दबाव बना हुआ है. बुधवार को रुपया करीब 0.5 फीसदी कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.8450 पर आ गया. यह 96.96 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है.
कच्चे तेल की ऊंची वैश्विक कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी इक्विटी निवेश की बढ़ती निकासी ने रुपये पर दबाव और बढ़ा दिया है. रुपये में कमजोरी से आयातित महंगाई का जोखिम भी बढ़ता है, खासकर इसलिए क्योंकि भारत कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है.
सितंबर में भी तेजी से घटा था भंडार
ताजा गिरावट सितंबर में विदेशी मुद्रा भंडार में आई तेज कमी के बाद हुई है. 18 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भंडार 14.88 अरब डॉलर घटकर 765.9 अरब डॉलर रह गया था. इसके बाद 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में इसमें 18.34 अरब डॉलर की और कमी आई और यह 747.56 अरब डॉलर पर आ गया.
25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में गिरावट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कमी के कारण हुई. इस दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 15.57 अरब डॉलर घटकर 615.41 अरब डॉलर रह गईं. वहीं, स्वर्ण भंडार 2.59 अरब डॉलर घटकर 108.7 अरब डॉलर हो गया. विशेष आहरण अधिकार (SDR) 97 मिलियन डॉलर घटकर 18.64 अरब डॉलर और IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन 86 मिलियन डॉलर घटकर 4.8 अरब डॉलर रह गई.
ताजा गिरावट से पहले विदेशी मुद्रा के असामान्य रूप से बड़े प्रवाह का दौर भी रहा था. जून से सितंबर के बीच RBI की ओर से उठाए गए कदमों से करीब 143.5 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आया, जिसमें लगभग 133 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा जमा के जरिए आए. इससे सितंबर में भंडार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में मदद मिली थी.
रुपये को समर्थन और नकदी प्रबंधन के बीच संतुलन
RBI की विदेशी मुद्रा संबंधी गतिविधियां घरेलू नकदी प्रबंधन से भी जुड़ी हैं. अगस्त के अंत में केंद्रीय बैंक की फॉरवर्ड बुक में डॉलर की नेट शॉर्ट पोजिशन रिकॉर्ड 200.06 अरब डॉलर पर पहुंच गई, जो जुलाई के अंत में 136.77 अरब डॉलर थी. यह बढ़ोतरी बड़े एकमुश्त डॉलर प्रवाह को सोखने के बाद हुई.
इसके बाद RBI ने अपनी फॉरवर्ड पोजिशन को मैनेज करने और रुपये की अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए खासकर छोटी अवधि के डॉलर-रुपया सेल/बाय स्वैप का इस्तेमाल किया है.
भंडार का स्तर अभी भी मजबूत
हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 50 अरब डॉलर की कमी आई है, लेकिन इसका मौजूदा स्तर अभी भी पर्याप्त है. वित्त मंत्रालय की सितंबर की आर्थिक समीक्षा के मुताबिक 18 सितंबर तक 765.9 अरब डॉलर का भंडार मौजूद था, जो करीब 11.1 महीने के वस्तु आयात को कवर करने के बराबर था. हालांकि, समीक्षा में अस्थिर पूंजी प्रवाह, ऊंची ऊर्जा कीमतों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को रुपये और बाहरी क्षेत्र के लिए जोखिम बताया गया था.
अब बाजार की नजर रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के प्रवाह और RBI के आगे के हस्तक्षेप पर रहेगी. रुपया एक बार फिर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है. ऐसे में आने वाले हफ्तों में रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए RBI कितनी तेजी से विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है, यह बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बना रहेगा.
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