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नीट पेपर लीक में बड़ा खुलासा! CBI ने गिनाईं NTA की सुरक्षा खामियां, एक ही एक्सपर्ट को मिला पेपर तक एक्सेस
जांच एजेंसी के मुताबिक, NTA के गोपनीय कक्ष में पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था नहीं थी. इसके अलावा प्रश्नपत्र तैयार करने के अलग-अलग चरणों में एक ही विशेषज्ञों की भागीदारी से अंतिम प्रश्नपत्र तक उनकी पहुंच बन गई, जिसका कथित तौर पर आरोपियों ने फायदा उठाया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां बताई हैं. 28 जुलाई को विशेष अदालत में दाखिल 94 पन्नों की चार्जशीट में जांच एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया, गोपनीय कक्ष की सुरक्षा और विशेषज्ञों की भूमिका से जुड़े कई सवाल उठाए हैं.
सीबीआई के मुताबिक, परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में जिम्मेदारियों का पर्याप्त विभाजन नहीं था. इसके चलते कुछ विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र तैयार करने के एक से अधिक चरणों में शामिल किया गया और उन्हें अंतिम प्रश्नपत्र तक पहुंच मिल गई.
प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कहां हुई चूक?
सीबीआई के अनुसार, NEET UG प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया मुख्य रूप से चार चरणों में होती है. इनमें प्रश्न तैयार करना, समीक्षा, प्रश्नों की जांच-पड़ताल और विभिन्न भाषाओं में अनुवाद शामिल हैं.
पहले चरण में विशेषज्ञों से प्रश्न और उनके उत्तर तैयार कराए जाते हैं. इसके बाद समीक्षा के दौरान चार अलग-अलग सेट के लिए प्रश्न चुने जाते हैं. प्रत्येक सेट में 45 प्रश्नों को अंतिम रूप दिया जाता है, यानी कुल 180 प्रश्नों का चयन होता है.
इसके बाद विषय विशेषज्ञ इन प्रश्नों को हल करके उत्तरों की जांच करते हैं. किसी सवाल या उत्तर में विवाद होने पर NTA के निदेशक संबंधित विशेषज्ञों के साथ मिलकर उसका समाधान करते हैं. अंतिम चरण में प्रश्नपत्रों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जाता है और अनुवाद की सटीकता की भी जांच की जाती है.
सीबीआई का कहना है कि आदर्श स्थिति में इन सभी चरणों की जिम्मेदारी अलग-अलग विशेषज्ञों को दी जानी चाहिए थी, ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी न मिल सके.
एक ही विशेषज्ञ को मिल गया अंतिम प्रश्नपत्र तक एक्सेस
जांच एजेंसी के मुताबिक, NEET UG 2026 के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में कई विशेषज्ञों को एक से अधिक चरणों में शामिल किया गया. समीक्षा के बाद कुछ विशेषज्ञों को अंतिम प्रश्नपत्र सेट तक पहुंच मिल गई.
सीबीआई ने खास तौर पर अनुवाद और दोबारा अनुवाद की प्रक्रिया का उल्लेख किया है. जांच एजेंसी के अनुसार, इस चरण में एक विशेषज्ञ को चारों मास्टर प्रश्नपत्र सेट देखने का अवसर मिल सकता था. सीबीआई ने इसे परीक्षा की गोपनीयता के लिहाज से गंभीर खामी माना है.
NTA के गोपनीय कक्ष की सुरक्षा पर भी सवाल
सीबीआई ने दिल्ली के ओखला स्थित NSIC भवन में NTA के गोपनीय कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. इसी कक्ष में NEET UG के प्रश्नपत्र तैयार किए जाते थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, गोपनीय कक्ष में आने-जाने वाले विशेषज्ञों की तलाशी या जांच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. इसके अलावा CCTV निगरानी समेत सुरक्षा के अन्य उपायों में भी कमियां पाई गईं.
13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
सीबीआई ने 28 जुलाई को विशेष अदालत में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. जांच एजेंसी ने NTA के पैनल में शामिल पुणे के तीन विषय विशेषज्ञों, पी.वी. कुलकर्णी, मनीषा गुरुनाथ मांढरे और मनीषा संजय हवलदार को मामले में मुख्य आरोपी बताया है. सीबीआई के आरोप के मुताबिक, इन विशेषज्ञों ने कथित तौर पर आर्थिक लाभ के बदले प्रश्नपत्र लीक करने के लिए NTA की प्रक्रियागत खामियों का फायदा उठाया.
बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचा पेपर
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन विशेषज्ञों तक पहुंच बनाने में मनीषा संजय वाघमारे की भूमिका रही. आरोप है कि वाघमारे ने बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए राजस्थान और हरियाणा के कुछ अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाया.
सीबीआई ने अपनी जांच में आरोपियों की लोकेशन, मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और एक आवासीय सोसाइटी के एक्सेस-कंट्रोल रिकॉर्ड समेत कई डिजिटल और अन्य सबूतों का इस्तेमाल किया है. एजेंसी के अनुसार, इन रिकॉर्ड से परीक्षा से कुछ दिन पहले संबंधित छात्रों और उनके अभिभावकों की आरोपियों से मुलाकात की पुष्टि हुई. सीबीआई की चार्जशीट में सामने आई ये बातें NEET UG जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.
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