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RBI का बड़ा प्रस्ताव: ग्रामीण को-ऑपरेटिव बैंकों से अब 3 करोड़ तक मिलेगा होम लोन
RBI के नए ड्राफ्ट के तहत बड़े ग्रामीण को-ऑपरेटिव बैंक एक ग्राहक को 3 करोड़ रुपये तक का हाउसिंग लोन दे सकेंगे. साथ ही, लोन चुकाने के लिए ज्यादा समय और अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर मोरेटोरियम की सुविधा भी मिल सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्रामीण सहकारी बैंकों (Rural Cooperative Banks) के लिए कर्ज और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. RBI ने 6 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सर्कुलर में होम लोन की सीमा बढ़ाने, लोन की अवधि तय करने और कुछ सदस्यों को सिक्योरिटी के बदले कर्ज देने से जुड़े नए प्रावधान प्रस्तावित किए हैं. इन बदलावों से ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए घर खरीदना या बनाना आसान हो सकता है.
बैंक की जमा राशि के हिसाब से तय होगी होम लोन लिमिट
नए प्रस्ताव के मुताबिक, ग्रामीण सहकारी बैंकों से मिलने वाले होम लोन की अधिकतम सीमा बैंक की कुल जमा राशि के आधार पर तय होगी.
- 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा वाले बैंक एक ग्राहक को 3 करोड़ रुपये तक का होम लोन दे सकेंगे.
- 1,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक जमा वाले बैंक 2 करोड़ रुपये तक का कर्ज दे सकेंगे.
- 100 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपये तक जमा वाले बैंक 1.4 करोड़ रुपये तक का होम लोन दे सकेंगे.
- 100 करोड़ रुपये से कम जमा वाले छोटे बैंकों के लिए यह सीमा 60 लाख रुपये होगी.
इस बदलाव से बड़े ग्रामीण सहकारी बैंकों के ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा रकम का होम लोन मिल सकेगा.
लोन चुकाने के लिए भी मिलेगी ज्यादा मोहलत
RBI ने सिर्फ कर्ज की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं दिया है, बल्कि लोन रिपेमेंट की शर्तों में भी राहत का प्रस्ताव रखा है. 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा वाले ग्रामीण सहकारी बैंक अपने बोर्ड की मंजूरी से लोन की अवधि तय कर सकेंगे. वहीं, अन्य ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए हाउसिंग लोन की अधिकतम अवधि 20 साल प्रस्तावित है. इस अवधि में मोरेटोरियम यानी शुरुआती समय में EMI भुगतान से मिलने वाली छूट भी शामिल होगी.
अंडर-कंस्ट्रक्शन घर के लिए 24 महीने का मोरेटोरियम
अगर ग्राहक ऐसा घर खरीदता है जिसका निर्माण अभी चल रहा है, तो उसे 24 महीने तक का मोरेटोरियम मिल सकता है. यानी इस अवधि में होम लोन की EMI चुकाने से राहत मिल सकती है. इससे अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
FD, सोना और इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले मिलेगा लोन
RBI ने 'नॉमिनल मेंबर्स' को लेकर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. बैंक के नियमों में प्रावधान होने पर ऐसे सदस्यों को भी लोन दिया जा सकेगा. हालांकि, यह कर्ज सिक्योरिटी के बदले मिलेगा. इसके लिए ग्राहक बैंक में अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सोने-चांदी के आभूषण, जीवन बीमा पॉलिसी या सरकारी प्रतिभूतियां गिरवी रख सकता है. इससे जरूरत के समय ग्राहकों के लिए बैंक से फंड जुटाने का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा.
अनसिक्योर्ड लोन और रियल एस्टेट एक्सपोजर पर सीमा
RBI ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के जोखिम को नियंत्रित करने के लिए कुछ सीमाएं भी प्रस्तावित की हैं. किसी एक ग्राहक या संस्था को बैंक अपनी टियर-1 कैपिटल के अधिकतम 20 फीसदी तक ही कर्ज दे सकेंगे. इसके अलावा, बैंकों के कुल लोन में बिना गारंटी वाले यानी अनसिक्योर्ड लोन की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक सीमित रखने का प्रस्ताव है. रियल एस्टेट सेक्टर में भी बैंकों के एक्सपोजर की सीमा तय की गई है.
1 अप्रैल 2027 से लागू होने का प्रस्ताव
RBI ने इन प्रस्तावित बदलावों पर संबंधित पक्षों से 28 अगस्त 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं. अगर ड्राफ्ट को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने का प्रस्ताव है. कुल मिलाकर, RBI के प्रस्ताव से ग्रामीण सहकारी बैंकों के ग्राहकों के लिए होम लोन की उपलब्धता और रकम दोनों बढ़ सकती हैं. खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में घर खरीदने या बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह बदलाव अहम साबित हो सकता है.
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